जयपुर41 मिनट पहले

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डांगावास हत्याकांड मामले में 40 आरोपियों के बरी होने के बाद दलित समाज में आक्रोश है। जयपुर के शहीद स्मारक पर आज बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटे और विरोध-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में मौजूद पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि 11 साल पहले जो लोग जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे थे, उनके बयान हो जाते तो इस तरह का फैसला नहीं आता। पक्ष और विपक्ष और सरकारी एजेंसी इसके लिए जिम्मेदार है।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को लेकर गुढ़ा ने कहा-

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जूली तो बाबा साहब के मेहरबानी से एमएलए बना है वरना गांव का सरपंच भी नहीं बन पाता। विपक्ष के सारे विधायकों को इकट्ठे होकर गवर्नर के पास जाना चाहिए। सरकार की खाल उधेड़ लेनी चाहिए।

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बता दें कि नागौर जिले के डांगावास गांव में 2015 को भूमि विवाद के चलते 5 दलितों की हत्या कर दी गई थी।

जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन को संबंधित करते हुए।

जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन को संबंधित करते हुए।

घायल तड़पते रहे थे, बयान नहीं लिए

अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी राजस्थान और समत्स दलित समाज के नेतृत्व के किए गए प्रदर्शन में पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा ने कहा कि इस मामले में 40 आरोपी बरी हो गए। इसके लिए पक्ष-विपक्ष और सरकारी एजेंसी जिम्मेदार है। सरकार को इसमें एक अच्छा वकील नियुक्त कर इसकी जांच करवानी चाहिए।

गोविंद सिंह डोटासरा को लेकर गुढ़ा ने कहा कि उनको शायद लग रहा है कि आरोपी उनके समाज के है। इसलिए डर के कारण इस फैसले पर कुछ बोल भी नहीं रहे है।

रिटायर्ड आईपीएस बोले-इस केस में सबूतों को इग्नोर किया

रिटायर्ड आईपीएस और अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने कहा कि सरकार को इस मामले में न्याय दिलाना चाहिए। लोकल पुलिस से सबूत जुटाने में कमी रखी गई। मामले में पैरवी नहीं हुई, ये न्यायिक प्रणाली पर प्रश्न चिह्न खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि जिन सबूतों को इग्नोर किया, उनको सामने लाना चाहिए। सीबीआई के जांच अधिकारी ने इस पूरे केस को चौपट किया है। इस केस को देश के बड़े वकीलों को देना चाहिए। इस केस में आगे एक्शन नहीं लिया जाता है तो ये देशव्यापी आंदोलन होगा, हम चुप नहीं बैठेंगे।

डांगावास हत्याकांड में जिन लोगों की मौत हुई, उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए।

डांगावास हत्याकांड में जिन लोगों की मौत हुई, उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए।

विधानसभा के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी

14 मई 2015 को मेड़ता के डांगावास गांव में जमीनी विनाद को लेकर रतनाराम मेघवाल, पोरखाराम मेघवाल, पांचाराम मेघवाल , खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल की हत्या हुई थी।

मृतक पांचाराम के बेटे लक्ष्मणराम ने बताया कि घटना वाले दिन वे उसी जगह पर थे, जहां पर हत्या हुई थी।

उन्होंने कहा कि वे होईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि टीकाराम जूली ने उनके परिवार से बस मुलाकात कर आश्वासन दिया है। सरकार से दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग करते है। मांगों पर जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो 20 अगस्त को विधानसभा कूच किया जाएगा।

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