अलवर में इस बार पंचायतीराज चुनाव 2026 पूर्व मंत्री हेम सिंह भड़ाना के बिना होने वाला है। इन चुनावों में सबसे बड़ा दंगल राजगढ़ और थानागाजी में देखने को मिल सकता है। जिसका कारण साफ है कि अलवर जिला प्रमुख की सीट ST महिला आरक्षित है। इसके अलावा राजगढ़ में
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दरअसल, पूर्व मंत्री हेम सिंह के निधन के बाद यह पहला पंचायतीराज चुनाव होगा, ऐसे में क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर पर खास नजर है। चुनावी मैदान में विधायक की पुत्रवधु, ड्राइवर और IRS अधिकारी के बेटे समेत कई संभावित दावेदार तैयारी में जुटे हैं।
थानागाजी और राजगढ़ ST बाहुल्य क्षेत्र है। इसलिए जिला प्रमुख ही नहीं दो-दो प्रधान बनाने की लड़ाई यहां मीणा नेताओं के बीच रहेगी। ऐसा पहली बार है कि दोनों जगह एसटी प्रधान बनेगा और जिला प्रमुख भी ST का होगा। इसलिए बड़े नेता पूरा गणित लगाने में लगे हैं। कुछ अपने बेटे-बहू को जिला प्रमुख या प्रधान बनाने का मौका चूकना नहीं चाहेंगे। चाहे इसके लिए कैसे ही जोड़ तोड़ करने पड़ें।
पहली बार हेम सिंह भड़ाना के बिना हो रहा पंचायतीराज चुनाव
पूर्व मंत्री और थानागाजी से दो बार विधायक रहे हेम सिंह भड़ाना की मौजूदगी के बिना थानागाजी में पहली बार पंचायतीराज चुनाव होगा। इससे पहले करीब 25 सालों से हेम सिंह भड़ाना यहां सक्रिय थे। इस बार थानागाजी नगर पालिका में भी हेम सिंह के बिना बीजेपी के ज्यादा पार्षद जीतने के बावजूद चेयरमैन कांग्रेस पार्टी का बन गया। अब पंचायतीराज चुनाव में पार्टी को सोच समझकर टिकट देने पड़ेंगे। कांग्रेस पार्टी से थानागाजी के विधायक कांति प्रसाद मीणा पूरी तरह सक्रिय हैं। जिसके कारण नगर पालिका चेयरमैन बनाने में सफल हो गए।

विधायक की पुत्रवधु और IRS का बेटा लड़ सकते हैं चुनाव
थानागाजी विधायक कांति मीणा की पुत्रवधु नेहा मीणा जिला परिषद के वार्ड 13 से चुनाव लड़ सकती हैं। क्षेत्र में उनके नाम की चर्चा शुरू हो गई है। अगर विधायक अपने बेटे की पत्नी को चुनाव लड़ाते हैं तो उनको कांग्रेस पार्टी में जिला प्रमुख प्रत्याशी का दावेदार माना जा सकता है।
वहीं थानागाजी से ही एक रिटायर IRS अधिकारी सीआर मीणा के बेटे अभिषेक मीणा के वार्ड 13 से जिला परिषद का चुनाव लड़ने की चर्चा भी चल रही है। सीआर मीणा भी पिछले चुनावों में थानागाजी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी से टिकट की मांग कर चुके हैं।

राजगढ़-रैणी को मिला आरक्षण में फायदा
राजगढ़ के रैणी को पंचायतीराज चुनाव में लॉटरी से हुए आरक्षण में फायदा मिला है। रैणी में जिला पार्षद के 4 वार्ड हैं। जिनमें से 3 वार्ड ST आरक्षित है। इसलिए यहां से जिला प्रमुख की दावेदारी करने वाले चेहरे सामने आ सकते हैं। राजगढ़ में बीजेपी के प्रत्याशी रहे और सरस डेयरी के पूर्व चेयरमैन बन्नाराम मीणा अपनी पत्नी संजू बालोत को जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ा सकते हैं। यहीं नहीं यहां से बीजेपी के मीणा नेताओं के पास प्रधान बनने का भी मौका है। इसलिए दूसरे नेताओं की भी उम्मीद बढ़ गई हैं।
पूर्व विधायक वापसी करने के जुगाड़ में
वहीं राजगढ़ में कांग्रेस से विधायक रह चुके जौहरी लाल मीणा एक बार फिर से अपनी खिसकी हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाना चाहेंगे, जो पिछली बार निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़े। लेकिन उनकी बुरी तरह हार हुई और जमानत भी नहीं बची। लेकिन बाद में वापस कांग्रेस में आ गए। अब वे अपने परिवार से बेटे या पुत्रवधु को जिला प्रमुख या प्रधान की दावेदारी की दौड़ में शामिल करने में पीछे नहीं रहेंगे।
लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं की नजरें जिला प्रमुख और दोनों प्रधान की सीट पर है। इन क्षेत्रों से पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य की ज्यादा सीटें कांग्रेस के पक्ष में जाती रही हैं। इसलिए कांग्रेस के नेता अच्छे युवा नेताओं को आगे लेकर आ सकते हैं।

विधायक के ड्राइवर भी पीछे नहीं
थानागाजी विधायक कांति प्रसाद मीणा के ड्राइवर रह चुके रामदयाल मीणा भी वार्ड 11 से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। थानागाजी से ही वर्तमान में उप जिला प्रमुख ललिता मीणा वार्ड 13 से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ेंगी। उनकी भी निगाह जिला प्रमुख की कुर्सी पर हैं। मीणा समाज में पढ़ी लिखी महिला हैं और राजनीति में भी सक्रिय हैं। जिला प्रमुख रहते हुए विकास के कामकाज भी समझ भी बना चुकी हैं।