जदयू के अंदर चल रही वर्चस्व की लड़ाई का फैसला अब सिर्फ बयानों से नहीं होगा। 23 अक्टूबर को होने वाला विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों का चुनाव भी तय करेगा कि पार्टी में किस नेता की राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत है।
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नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे। 8 सीटों पर होने वाला यह चुनाव बताएगा कि जदयू के अंदर असली बॉस कौन होगा।
संजय झा ने सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक सीट से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया है। सबसे दिलचस्प मुकाबला पटना स्नातक सीट पर है। यहां नीरज कुमार और अनंत सिंह आमने-सामने हैं। अनंत ने जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह को समर्थन दिया है।
MLC चुनाव में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की भूमिका कितनी अहम है? चुनावी नतीजों का दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट…
8 सीटों के MLC चुनाव, दांव पर दिग्गजों की साख
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को अपने गढ़ में हारना पड़ा। अब 8 सीटों के MLC चुनाव को NDA के लिए अहम माना जा रहा है। इस चुनाव में तय होगा कि नीतीश कुमार के बाद JDU का असली बॉस कौन होगा।
इस चुनाव में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विधायक अनंत सिंह समेत कई दिग्गजों की साख दांव पर है। 6 पॉइंट में जानिए जदयू के नेताओं के लिए MLC चुनाव के क्या नतीजे होंगे।

1- संजय झा के लिए साख बचाने की चुनौती क्यों?
जदयू में संजय झा की पिछले छह महीने में काफी प्रगति हुई है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर संगठन को मजबूत करना और नीतीश कुमार के राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।
- इस बीच एमएलसी चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन उनकी राजनीतिक क्षमता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी सबसे बड़ी परीक्षा पटना स्नातक सीट पर है।
- यहां से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है। नीरज को दोबारा टिकट देने के फैसले के बाद जदयू विधायक अनंत सिंह का विरोध सामने आया। अनंत सिंह जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में सक्रिय हैं।
- इससे जदयू के सामने चुनौती सिर्फ विपक्षी उम्मीदवार को हराने की नहीं, बल्कि अपने ही खेमे के विरोध का असर कम करने की भी है।
- अगर नीरज कुमार जीतते हैं तो पार्टी के भीतर यह संदेश जाएगा कि विरोध के बावजूद नेतृत्व का फैसला प्रभावी रहा। संजय झा की स्थिति मजबूत होगी।
- हार की स्थिति में टिकट चयन, नेताओं के बीच तालमेल और चुनावी प्रबंधन पर सवाल उठेंगे। यहां अनंत सिंह का सियासी दायरा बड़ा होगा। अनंत सिंह की मोकामा से निकलकर बिहार के फलक पर मौजूदगी दिखेगी। ललन सिंह की ताकत बढ़ेगी।

2- चुनाव में ललन सिंह की भूमिका कितनी
ललन सिंह की सक्रियता को इस चुनाव में अलग नजरिए से देखा जा रहा है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सामने आने के बाद संजय झा ने ललन सिंह को मामला सुलझाने की जिम्मेदारी दी थी।
2 अक्टूबर को विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद 5 अक्टूबर को ललन सिंह का बयान आया, ‘क्रिया हुई है तो प्रतिक्रिया भी होगी।’ इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक चर्चा में ला दिया।
3. चुनाव प्रचार में संजय झा कितने सक्रिय?
संजय झा ने दरभंगा और मुजफ्फरपुर में एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वह लगातार सक्रियता बनाए हुए हैं।

4. टिकट चयन में किसकी चली?
जदयू ने 23 सितंबर को 4 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा, सारण शिक्षक से आनंद पुष्कर और दरभंगा शिक्षक से घनश्याम राय को उम्मीदवार बनाया गया।
सीट 1- पटना सीट पर नीरज कुमार को दोबारा मौका मिला, जबकि उनके नाम को लेकर अनंत सिंह का विरोध चर्चा में रहा। इस सीट पर टिकट ललन सिंह के सहमति मे नहीं दिया गया।
सीट 2- सारण शिक्षक सीट से आनंद पुष्कर जदयू के प्रत्याशी हैं। वह ब्राह्मण समाज से आते हैं। बिहार के जाने-माने शिक्षक नेता और 5 बार के पूर्व विधान पार्षद दिवंगत केदारनाथ पांडेय के पुत्र हैं। कहा जाता है कि इन्हें टिकट दिए जाने में संजय झा ने अहम भूमिका निभाई।
सीट 3- दरभंगा शिक्षक सीट से घनश्याम राय को टिकट मिला है। घनश्याम को संजय झा का करीबी माना जाता है। वह मुख्य रूप से मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलसचिव और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे।
सीट 4- यहां से अभिषेक झा जदयू प्रत्याशी हैं। वह ललन सिंह और संजय झा दोनों के करीबी माने जाते हैं। दोनों से इनकी ट्यूनिंग अच्छी है। अभिषेक झा को सितंबर 2020 में जेडीयू में शामिल कराने में ललन सिंह की मुख्य भूमिका थी। ललन सिंह ने उन्हें जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता दिलाई थी।
5. गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी अहम
जदयू और भाजपा ने 4-4 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जदयू ने पटना और तिरहुत स्नातक के साथ सारण और दरभंगा शिक्षक सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। पिछली बार की सीटों से तुलना करने पर दो सीटों की अदला-बदली की गई है।
- 2020 के चुनाव में दरभंगा स्नातक सीट पर जदयू ने दिलीप कुमार चौधरी को उम्मीदवार बनाया था। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़े सर्वेश कुमार ने जीत दर्ज की थी।
- तिरहुत स्नातक सीट जदयू के पास थी, जबकि तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह को CPI के संजय कुमार सिंह ने हराया था।
- इस बार गठबंधन में दरभंगा स्नातक सीट भाजपा के खाते में गई, जबकि तिरहुत स्नातक सीट जदयू को मिली है। भाजपा ने दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। जदयू ने तिरहुत स्नातक से अभिषेक झा को उतारा।
- इस सीट बंटवारे में दोनों दलों के बीच क्षेत्रीय संतुलन की कोशिश की गई। संजय झा ने अपने पकड़ वाले क्षेत्र को अपने पास रखा, जबकि बीजेपी की पकड़ वाली सीटें भाजपा के खाते में डाली।

6. नए उम्मीदवारों के पीछे किसका भरोसा?
आनंद पुष्कर और घनश्याम राय जैसे उम्मीदवारों की राजनीतिक स्थिति देखे तो वे संजय झा के करीबी कहे जाते हैं।
सारण शिक्षक सीट से ई. आनंद पुष्कर वामदल छोड़कर जदयू में शामिल हुए। 8 फरवरी 2026 को यानी जदयू का दामन थामा। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।