स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के काम में आनाकानी कर रहे पटवारियों की मांग मध्य प्रदेश सरकार ने मांग ली है। राजस्व विभाग ने पटवारियों को राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए भू-संसाधन प्रबंधन कमिश्नर ने सभी

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सूत्रों के मुताबिक, पटवारियों की पदोन्नति की कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर करने की तैयारी है।

जून 2007 या इससे पुराने संवर्ग वालों को फायदा

पदोन्नति की कार्रवाई मध्य प्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित (कार्यपालिक एवं तकनीकी) सेवा भर्ती नियम 2012 में 18 जून 2018 को किए गए संशोधन के आधार पर की जाएगी। इसके प्रावधानों के अंतर्गत ही 1 जनवरी 2026 को 50 साल से कम आयु वाले पटवारियों की लिस्ट बनाई गई है।

विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जिस पटवारी की 1 जनवरी 2026 को आयु 50 साल से कम है और पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले हुई है, उसका नाम भी सूची में जोड़ा जाए।

30 सितंबर तक जानकारी देनी होगी

पटवारियों की जानकारी कलेक्टरों के माध्यम से संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार के जरिये मांगी गई है। कहा गया है कि 30 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे अनिवार्य रूप से इसे जमा कर दिया जाए।

बता दें कि स्वामित्व योजना में पटवारियों को रजिस्ट्रीकर्ता बनाया गया है लेकिन उन्होंने आपत्ति जताई है। पटवारियों का कहना है कि जमीन का स्वामित्व लाभार्थी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है। ऐसे में पटवारी को रजिस्ट्रीकर्ता यानी निष्पादक बनाकर भविष्य की व्यक्तिगत कानूनी जवाबदेही तय करना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि स्वामित्व, कब्जे या सीमांकन को लेकर भविष्य में विवाद हुआ तो इसकी जिम्मेदारी पटवारी की क्यों होगी?

कई स्तर पर विवाद की आशंका जताई

पटवारियों के मुताबिक, आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शा और खसरा पर्याप्त नहीं होते। वास्तविक कब्जा, वारिस, सह-स्वामित्व, चतुर्सीमा, पुराने दावे और कोर्ट में लंबित विवाद जैसे कई पहलू सामने आ सकते हैं। यदि बाद में किसी व्यक्ति ने स्वामित्व को चुनौती दी तो निष्पादक के तौर पर दर्ज पटवारी भी कानूनी प्रक्रिया में घसीटा जा सकता है।

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