मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंत्री से मुलाकात को लेकर नया निर्देश जारी किया है। अब मंत्री से मिलने से पहले शासन स्तर से अनुमति लेना जरूरी होगा। बिना अनुमति मिलने को विभागीय शिष्टाचार के खिलाफ माना जाएगा। आदेश में कहा गया है कि यदि ऐसी गलती दोबारा होती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंत्री से मुलाकात को लेकर नया निर्देश जारी किया
- Published: 18 Sep 2026, 12:00 PM IST
- Last Updated: 18 Sep 2026, 12:00 PM IST
भोपाल: मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंत्री से मुलाकात को लेकर नया निर्देश जारी किया है। विभाग के आदेश के मुताबिक अब जल संसाधन विभाग के मंत्री से मिलने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले शासन स्तर से अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति मंत्री से मुलाकात करने पर इसे विभागीय शिष्टाचार के खिलाफ माना जाएगा।
विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विभाग में पदस्थ सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस निर्देश की जानकारी दी जाए। साथ ही उन्हें बताया जाए कि मंत्री से मुलाकात के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
बिना अनुमति मिलने पर होगी कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचता है और भविष्य में इस तरह की गलती दोहराई जाती है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश की जानकारी सभी संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचाई जाए, ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।
मुलाकात के लिए पहले लेना होगा अप्रूवल
नए निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को मंत्री से मिलने से पहले अनुमति प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यानी सीधे मंत्री के पास पहुंचकर मुलाकात करने के बजाय पहले संबंधित स्तर से स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। विभाग का यह आदेश 17 सितंबर 2026 को जारी खबर के अनुसार सामने आया है। आदेश में विभागीय कामकाज में अनुशासन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, इस निर्देश को लेकर कर्मचारियों और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कुछ लोग इसे विभागीय प्रोटोकॉल से जोड़कर देख सकते हैं, जबकि कर्मचारियों की ओर से इसे लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। फिलहाल आदेश में मुख्य रूप से मंत्री से मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति लेने और निर्देश का उल्लंघन दोहराने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।