मध्य प्रदेश में पटवारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। ग्रेड पे बढ़ाने और लंबित मांगों को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल से राजस्व विभाग की 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं और नामांतरण, सीमांकन, खसरा-खतौनी जैसे कई जरूरी कार्य प्रभावित होंगे।
एमपी में आज से पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल(AI)
- Published: 03 Aug 2026, 10:01 AM IST
- Last Updated: 03 Aug 2026, 10:01 AM IST
मध्य प्रदेश: सोमवार से पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर प्रदेश के सभी जिलों के पटवारी कामकाज से दूर रहेंगे। संघ का कहना है कि जब तक सरकार उनकी वर्षों से लंबित मांगों पर ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल का सीधा असर राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं और आम लोगों के कामकाज पर पड़ने की आशंका है।
पटवारियों को सबसे कम ग्रेड पे
पटवारी संघ का दावा है कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां पटवारियों को सबसे कम ग्रेड पे दिया जा रहा है। संघ के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पटवारियों को 2800 ग्रेड पे मिलता है। वहीं कर्नाटक में 3600 और उत्तराखंड तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में 4200 ग्रेड पे दिया जा रहा है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश में भी वेतनमान में सुधार की मांग की जा रही है।
ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया गया
संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेन्द्र बघेल ने बताया कि मांगों को लेकर पहले चरणबद्ध आंदोलन किया गया। शुरुआत में पटवारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद शासकीय व्हाट्सएप समूहों और ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार किया गया। बावजूद इसके सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने पर अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया गया है।
12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के कारण राजस्व विभाग की 12 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित होंगी। इनमें ई-टोकन, वेब जीआईएस, रिकॉर्ड अपडेट, सारा पोर्टल, सारा एप्लिकेशन, आरसीएमएस, सीएम हेल्पलाइन, लघु सिंचाई गणना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े रिकॉर्ड सत्यापन, रिकॉर्ड स्कैनिंग, राजस्व वसूली और फार्मर रजिस्ट्रेशन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, खसरा-खतौनी, गिरदावरी, अतिक्रमण संबंधी कार्रवाई, कब्जा दिलाने और कानून-व्यवस्था से जुड़े राजस्व कार्य भी प्रभावित होने की संभावना है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों पर निर्भर आम नागरिकों को झेलना पड़ सकता है।
पटवारी संघ का आरोप है कि समय के साथ उनसे लगातार नए ऑनलाइन और फील्ड कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन वेतनमान, पदोन्नति और अन्य लंबित मांगों पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। संघ ने सरकार से जनहित को ध्यान में रखते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की है। वहीं साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।