मध्य प्रदेश में फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को और आसान बनाया गया है। अब किसी जिले में काम का दबाव अधिक होने पर फेसलेस रजिस्ट्री की फाइल दूसरे जिले के उपलब्ध सब-रजिस्ट्रार के पास भेजी जा सकेगी। इससे रजिस्ट्री का इंतजार कम होगा, कार्यालयों की भीड़ घटेगी और लोगों को ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा तेजी से मिलेगी।

MP Faceless Registry

अब नहीं अटकेगी फेसलेस रजिस्ट्री की फाइल

  • Published: 07 Aug 2026, 10:22 AM IST
  • Last Updated: 07 Aug 2026, 10:22 AM IST

भोपाल: मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि किसी जिले में फेसलेस रजिस्ट्री के आवेदन ज्यादा होने से काम का दबाव बढ़ जाता है, तो संबंधित फाइल दूसरे जिले के उपलब्ध सब-रजिस्ट्रार के पास भेजी जा सकेगी। इससे लंबित मामलों को कम करने और लोगों को समय पर रजिस्ट्री की सुविधा देने में मदद मिलेगी।

फेसलेस रजिस्ट्री और फेसलेस दस्तावेजों के लिए लागू
नए नियम के तहत अब प्रदेश का कोई भी सब-रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। यह बदलाव रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-6 में किए गए संशोधन के बाद संभव हुआ है। इसके साथ ही पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है।

हालांकि यह सुविधा फिलहाल केवल फेसलेस रजिस्ट्री और फेसलेस दस्तावेजों के लिए लागू होगी। फरवरी 2026 में शुरू किए गए साइबर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के जरिए अब तक 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा चुका है।

आम लोगों को क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी एक जिले में फाइलों का दबाव बढ़ने पर रजिस्ट्री का काम नहीं रुकेगा। सिस्टम के जरिए फाइल ऐसे जिले के सब-रजिस्ट्रार को भेजी जा सकेगी, जहां अधिकारी उपलब्ध हैं। इससे लोगों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर भी कम होंगे।

सरकार का लक्ष्य ऑनलाइन प्रक्रिया को तेज करने के साथ सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। हलफनामा, वसीयत, रजिस्ट्री समेत अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन तय समय में कराने की कोशिश की जाएगी।

75 तरह के दस्तावेज होंगे ऑनलाइन रजिस्टर्ड
फेसलेस व्यवस्था के तहत करीब 75 प्रकार के दस्तावेज ऑनलाइन पंजीकृत किए जा सकेंगे। इनमें रजिस्टर्ड लीज, पट्टा विलेख, प्रॉपर्टी एग्रीमेंट, शपथ-पत्र, दत्तक ग्रहण से जुड़े दस्तावेज, बैंक गारंटी का नवीनीकरण, विक्रय प्रमाण-पत्र, वसीयत, तलाक विलेख, क्षतिपूर्ति बंध-पत्र और शेयर आवंटन पत्र शामिल हैं।
इस प्रक्रिया के लिए आवेदक का आधार नंबर जरूरी होगा। AI आधारित वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए आवेदक की पहचान का मिलान आधार के साथ वोटर आईडी, पैन कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों से किया जाएगा।

ई-केवाईसी और ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी
सही जानकारी मिलने के बाद ही साइबर रजिस्ट्री पूरी होगी। आवेदक को यह भी घोषित करना होगा कि वह किसी दबाव में नहीं है और अपनी इच्छा से दस्तावेज का पंजीयन करा रहा है। इसके लिए पहले ई-केवाईसी और ई-साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में कुल 141 प्रकार के दस्तावेज पंजीकृत होते हैं। सरकार का मानना है कि फेसलेस व्यवस्था के विस्तार से कार्यालयों में भीड़ घटेगी, रजिस्ट्री का इंतजार कम होगा और लोग घर या किसी अन्य स्थान से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।