
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो).
पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है. अब यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने छात्रों की नाराजगी को समझते हुए उन्हें आंदोलन के बजाय अपने भविष्य और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी. हालांकि, कोर्ट ने 70 हजार खाली पदों और भर्ती प्रक्रिया पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा. सरकार को तीन सप्ताह के भीतर भर्ती का रोडमैप पेश करना होगा. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग की जांच कराने की बात कही है.
छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह
पुणे में MPSC की तैयारी कर रहे छात्र परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और चयन पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए. सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे को देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में से एक बताया. यहां बड़ी संख्या में छात्र अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए तैयारी करते हैं. ऐसे में आंदोलन के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए. अदालत ने छात्रों से दोबारा पढ़ाई शुरू करने और अपने करियर पर ध्यान देने की अपील की.
‘छात्र समाजविघातक नहीं हैं’
अदालत ने छात्रों की मांगों और उनकी नाराजगी को भी समझने की बात कही. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले विद्यार्थी समाजविघातक नहीं हैं. अगर छात्रों को परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह है या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका है तो उनकी शिकायतों की जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने करीब 70 हजार खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पर भी सरकार से जवाब मांगा है. सरकार को बताना होगा कि इन पदों पर भर्ती कैसे की जाएगी, उम्मीदवारों को समान अवसर कैसे मिलेंगे और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए अदालत ने तीन सप्ताह का समय दिया है.
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई में संयम बरतने की बात भी कही. कोर्ट के अनुसार, छात्रों के खिलाफ दर्ज होने वाली FIR उनके भविष्य और करियर को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने पुलिस के संयमित रवैये की सराहना की और कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अनुमति लेकर निर्धारित स्थान पर आंदोलन करना चाहिए. सुनवाई में आंदोलनकारी गुटों के अलग-अलग रुख भी सामने आए. एक गुट ने आंदोलन वापस लेने की बात कही, जबकि दूसरे गुट ने अदालत की ओर से निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही. ऐसे में आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
MPSC आयोग की जांच को तैयार सरकार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि MPSC अध्यक्ष को हटाना राज्य सरकार के सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आयोग के अध्यक्ष को हटाया जा सकता है. सीएम फडणवीस के मुताबिक, छात्रों के मन में भरोसा कायम करने के लिए राज्य सरकार मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों समेत पूरे आयोग की जांच कराने को तैयार है. उन्होंने कहा कि जांच में अगर किसी तरह का कदाचार सामने आता है तो संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने इस संबंध में राज्यपाल से भी अनुरोध किया है. मुख्यमंत्री ने जांच के लिए समिति या न्यायिक आयोग गठित करने की बात भी कही.
अब सरकार के जवाब पर नजर
बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अब सभी की नजर महाराष्ट्र सरकार के अगले कदम पर है. तीन सप्ताह के भीतर सरकार को खाली पदों पर भर्ती का रोडमैप अदालत में पेश करना होगा. साथ ही, छात्रों की शिकायतों और परीक्षा की निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. छात्रों की मुख्य मांग है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और उन्हें मेहनत के आधार पर निष्पक्ष अवसर मिले.

विनोद जगदाले
विनोद जगदाले को 22 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है. वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं. ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और एक्सक्लूसिव खबरें भी सामने लेकर आए. उनकी पहचान निष्पक्ष, बेबाक और जमीनी पत्रकार के तौर पर की जाती है. विनोद जगदाले 10 से ज्यादा सम्मान से सम्मानित और जनहित की आवाज को मजबूती से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं.
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