राम सिंहमार, सोनीपत1 घंटे पहले

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MTV हसल 0.5 का विजेता बनने के बाद जश्न मनाते हुए दक्ष। - Dainik Bhaskar

MTV हसल 0.5 का विजेता बनने के बाद जश्न मनाते हुए दक्ष।

कभी दोस्तों के कपड़े, जूते और जैकेट पहनकर दिल्ली-गुरुग्राम में रैप शो करने जाने वाला सोनीपत का दक्ष उर्फ धड़कन पेंढरकर अब एक करोड़ रुपए जीतकर घर लौटा है। MTV हसल 0.5 का विजेता बनने के बाद सोमवार को सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में उसके घर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।

पैराडॉक्स की टीम की ओर से शो में हिस्सा लेने वाले धड़कन ने अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज, दमदार रैप और लगातार शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों के साथ जजों का भी दिल जीता।

आठवीं कक्षा में रैप लिखना और गाना शुरू करने वाले धड़कन ने म्यूजिक कंपोज करने से लेकर मिक्सिंग, मास्टरिंग और वीडियो एडिटिंग तक खुद सीखी। उसके संघर्ष में दोस्तों के कपड़े पहनकर स्टेज पर पहुंचना, बस और शेयरिंग टैक्सी से सफर करना, अपने खर्चे निकालने के लिए काम करना और रैप की बारीकियां सीखने के लिए रात ढाई बजे तक जागना शामिल रहा।

सोनीपत में परिवार जश्न मनाते हुए।

सोनीपत में परिवार जश्न मनाते हुए।

सोनीपत के वर्धमान गार्डेनिया में रहता है परिवार

पिता सुधीर कहते हैं कि पहले लोग उन्हें दक्ष के पिता के रूप में जानते थे, लेकिन अब बेटे की सफलता के कारण उनकी पहचान बन रही है। मां सरिता बताती हैं कि दक्ष को खाना बनाने और अलग-अलग व्यंजन तैयार करने का भी शौक है। परिवार के मुताबिक, उसने अपनी मेहनत, दोस्तों के सहयोग और हरियाणवी संस्कृति को समझने की लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

सुधीर पेंढरकर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। साल 2009 में पिता सुधीर ने सोनीपत के सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में फ्लैट खरीदा और वर्ष 2015 में परिवार के साथ सोनीपत में रहने लगे। इसी दौरान दक्ष का दाखिला घर के सामने स्थित ब्राइट स्कॉलर स्कूल में चौथी कक्षा में कराया गया।

इसी सफर के बीच उसे अपनी दादी को खोने का दर्द भी सहना पड़ा। दैनिक भास्कर से बातचीत में माता-पिता और बहन ने पूरी कहानी शेयर की।

पैराडॉक्स की टीम की ओर से शो में हिस्सा लेने वाले धड़कन ने अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज, दमदार रैप और लगातार शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों के साथ जजों का भी दिल जीता।

पैराडॉक्स की टीम की ओर से शो में हिस्सा लेने वाले धड़कन ने अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज, दमदार रैप और लगातार शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों के साथ जजों का भी दिल जीता।

संघर्ष से लेकर ₹1 करोड़ जीतने तक की पूरी कहानी…

दोस्तों के कपड़े पहनकर करता था शो: दक्ष उर्फ धड़कन पेंढरकर के पिता सुधीर पेंढरकर बताते हैं कि दिल्ली और गुरुग्राम में कॉलेज के बाद जब दक्ष को रैप शो करने जाना होता था, तो कई बार वह रात को अपने दोस्त के पास ही रुकता था। उसके पास स्टेज शो के लिए अच्छे कपड़े, जूते और जैकेट नहीं होते थे। ऐसे में दोस्त अपने कपड़े और जूते उसे पहनने के लिए देते थे। वह किराए की टैक्सी या दूसरे साधनों से शो करने पहुंचता था। मां सरिता बताती हैं कि दोस्तों ने उसके संघर्ष के दिनों में बहुत मदद की। दक्ष ने कभी इन परिस्थितियों को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया। वह लगातार अपने हुनर को निखारने और स्टेज पर बेहतर प्रदर्शन करने में जुटा रहा।

गुरुग्राम जाकर समझा लोगों का म्यूजिक टेस्ट: सुधीर बताते हैं कि दक्ष ने रैपिंग को केवल गाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों की पसंद को समझने के लिए भी मेहनत की। वह गुरुग्राम जाता था और वहां देखता था कि लोग किस तरह का म्यूजिक पसंद करते हैं। इसके बाद उसी हिसाब से अपने गानों और प्रस्तुति पर काम करता था। धीरे-धीरे उसके रैप सॉन्ग गुरुग्राम और दिल्ली यूनिवर्सिटी में लोकप्रिय होने लगे। वर्ष 2015 में सोनीपत आने के बाद उसने अपने दोस्तों के साथ रहकर हरियाणवी बोली और संस्कृति को समझना शुरू किया। पिता के अनुसार, दक्ष की खासियत है कि वह जहां भी जाता है, वहां की बोली सीखने और उसे अपने अंदाज में अपनाने की कोशिश करता है।

दो साल तक किया इंतजार: परिवार के मुताबिक, दक्ष लंबे समय से MTV हसल में हिस्सा लेना चाहता था। इसके लिए उसे दो साल तक इंतजार करना पड़ा, क्योंकि शो में आवेदन करने की निर्धारित उम्र पूरी होने का इंतजार था। 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद उसने आवेदन किया और पहली बार में ही विजेता बन गया। पिता सुधीर बताते हैं कि दक्ष ने मार्च में ऑडिशन दिया था। उसे उसी महीने मुंबई जाना था, लेकिन शो की तारीख आगे बढ़ गई। इसके बाद 17 जून को वह शो में हिस्सा लेने के लिए मुंबई रवाना हुआ। उसके लिए यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे सपने को पूरा करने का मौका था।

एक जुलाई को इसी सफर के बीच उसे अपनी दादी को खोने का दर्द भी सहना पड़ा- बीच में दादी-फाइल

एक जुलाई को इसी सफर के बीच उसे अपनी दादी को खोने का दर्द भी सहना पड़ा- बीच में दादी-फाइल

‘We Do It For Culture’ रैप से हुआ चयन:धड़कन के पिता बताते हैं कि उसने ‘We Do It For Culture’ नाम का रैप MTV हसल 0.5 के लिए भेजा था। इसी गाने की वजह से उसके चयन का रास्ता बना। शो में पैराडॉक्स की टीम की ओर से खेलते हुए उसने अपनी अलग पहचान बनाई। उसके हरियाणवी लहजे और प्रस्तुति ने उसे दूसरे प्रतिभागियों से अलग रखा। पिता के मुताबिक, एक एपिसोड में उसकी परफॉर्मेंस के आधार पर उसे सीधे टिकट टू फिनाले दिया गया। लगातार कड़े मुकाबलों के बीच उसने अपना प्रदर्शन बनाए रखा और आखिरकार शो जीतकर एक करोड़ रुपए अपने नाम कर लिए। रफ्तार के शो में जीती मैकबुक: धड़कन की सफलता के पीछे एक पुराना अनुभव भी अहम रहा। वर्ष 2024 में उसने बॉलीवुड स्टार रफ्तार के शो ‘ओ सीन चेंज’ के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। वहां रैप प्रतियोगिता में उसने एप्पल की मैकबुक जीती। परिवार के अनुसार, इसी मैकबुक से उसने म्यूजिक एडिटिंग, कंपोजिशन और तकनीकी काम सीखने शुरू किए। वह आज भी उस मैकबुक को संभालकर रखे हुए है। वर्ष 2025 में कॉलेज फर्स्ट में उसने प्रतियोगिता जीती और गुरुग्राम में आयोजित स्पीडो प्रतियोगिता में भी विजेता रहा। इन अनुभवों ने उसे अपने हुनर पर भरोसा करना सिखाया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। हरियाणवी कलाकार सुनकर सीखी ठेठ हरियाणवी:बहन दीक्षा बताती हैं कि दक्ष रैप की बारीकियां सीखने के लिए दिन-रात अलग-अलग रैपर्स को सुनता था। इसके बाद खुद रिकॉर्डिंग करता और अपनी गलतियां पहचानकर उन्हें सुधारने की कोशिश करता था। वह अपना म्यूजिक कंपोज करने के साथ मिक्सिंग, मास्टरिंग और वीडियो एडिटिंग भी खुद करता था। मां सरिता के अनुसार, कई बार थकान होने के बावजूद वह रात दो से ढाई बजे तक हरियाणवी लोक गायकों, कलाकारों, स्टोरीटेलर्स और शायरों को सुनता रहता था। वह चाहता था कि उसके रैप में असली और ठेठ हरियाणवी लहजा सुनाई दे। किसी हिंदी शब्द को हरियाणवी में बदलने में परेशानी होती तो वह अपने दोस्तों से मदद लेता था। इसी लगातार अभ्यास का असर उसकी परफॉर्मेंस में दिखाई दिया।

‘फैन हो गई’ और ‘माहौल’ ने मचाया धमाल: परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, MTV हसल 0.5 के 20 एपिसोड रिलीज हुए और दक्ष ने शो में अपने 10 गाने प्रस्तुत किए। उसके गानों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। ‘फैन हो गई’ तीसरे एपिसोड में आया और शो के यूट्यूब चैनल पर इसे करीब 30 लाख बार देखा जा चुका है।

दादी ने सिखाई हनुमान चालीसा: धड़कन के संगीत का सफर बचपन से शुरू हुआ। मां सरिता बताती हैं कि उसकी दादी आशा रानी ने बचपन में उसे हनुमान चालीसा याद कराई थी। इसके बाद उसे गाने का शौक लग गया। पिता सुधीर के अनुसार, दक्ष ने आठवीं कक्षा में रैप लिखना और गाना शुरू किया था। परिवार के अनुसार, वह बचपन से ही स्टेज शो और डिबेट सहित अलग-अलग गतिविधियों में आगे रहा है। मां उसे बचपन में लोरी सुनाती थीं ‘तुझे सूरज कहूं या चंदा, तुझे दीप कहूं या तारा, मेरा नाम करेगा रोशन, जग में मेरा राज दुलारा।’ आज बेटे की सफलता देखकर मां को लगता है कि उसने लोरी के शब्दों को सच कर दिखाया है।

शो के दौरान दादी का निधन: धड़कन अपनी दादी के काफी करीब था। पिता सुधीर बताते हैं कि मुंबई जाने से पहले वह दादी को शो के बारे में पूरी जानकारी देकर गया था। उसने कहा था कि वह टीवी पर दिखाई देगा और दादी उसे देख सकेंगी। लेकिन 1 जुलाई को, मुंबई जाने के करीब 14 दिन बाद, दादी आशा रानी का निधन हो गया। परिवार के मुताबिक, दादी के निधन की सूचना मिलने पर धड़कन वापस आना चाहता था, लेकिन परिवार ने उसे शो जारी रखने के लिए कहा। उसने मुश्किल समय में भी हिम्मत नहीं हारी और मंच पर अपनी भावनाओं को संभालते हुए प्रदर्शन जारी रखा। अब जब वह एक करोड़ रुपए जीतकर घर लौटा है, तो परिवार को इस बात का मलाल है कि उसकी दादी उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं देख सकीं।

जानिए, शुरुआत की कहानी…

कॉलेज जाने के लिए बस-शेयरिंग टैक्सी का सहारा: बहन दीक्षा बताती हैं कि दक्ष के पास अपना निजी वाहन नहीं था। वह कभी शेयरिंग टैक्सी तो कभी बस से कॉलेज जाता था। कई बार रात नौ बजे तक कॉलेज से लौटने के बाद फ्लैट पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बावजूद वह अपनी पढ़ाई और संगीत दोनों को समय देता रहा। वह दीक्षा की कंपनी में वीडियो एडिटिंग करके भी पैसे कमाता था और शो में आने-जाने का खर्च निकालता था। पिता बताते हैं कि 12वीं के बाद उसने रैप पर और ज्यादा मेहनत शुरू की।

दोस्त रचित के साथ लिखता था रैप: सुधीर बताते हैं कि दक्ष अपने दोस्त रचित के साथ मिलकर रैप लिखता था। दोनों ने साथ काम करते हुए अपने हुनर को निखारा और अब रचित उसके मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं। पिता के अनुसार, उनके बेटे ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। वह उसे आर्थिक रूप से ज्यादा मदद नहीं दे पाए, लेकिन दक्ष ने भी कभी पैसों की बड़ी मांग नहीं की। मां सरिता बताती हैं कि उनका बेटा शुरुआत से ही हर क्षेत्र में आगे रहने की कोशिश करता था। बहन दीक्षा के अनुसार, दक्ष में आत्मसम्मान की भावना है और वह अपने काम के दम पर आगे बढ़ना चाहता था।

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