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- Reported by: Harish V NairEdited by: मोनू झा
- Updated Aug 13, 2026, 10:03 PM IST
हैदराबाद की नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह को लेकर चल रहे विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने बड़ा यू-टर्न लिया है। BCI ने 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में पंजीकरण पर लगाई रोक को कुछ ही घंटों में वापस ले लिया है।
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NALSAR दीक्षांत समारोह विवाद
हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित 'नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च' (NALSAR) यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के पासआउट छात्रों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अपने उस विवादित आदेश को वापस ले लिया है, जिसके तहत 2026 बैच के छात्रों के वकील (एडवोकेट) के रूप में पंजीकरण पर रोक लगा दी गई थी। BCI का यह फैसला उस आदेश के जारी होने के कुछ ही घंटों भीतर सामने आया।
दरअसल, नालसार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का 2026 बैच के कुछ छात्रों ने विरोध किया था। छात्रों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की जल्द सुनवाई से इनकार करने के मामले को लेकर आपत्ति जताई थी। इस विरोध के बाद BCI ने कड़ा रुख अपनाते हुए 2026 बैच के सभी छात्रों के वकालत पंजीकरण पर अस्थायी रोक लगा दी थी और यूनिवर्सिटी से तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी थी।
BCI ने क्यों वापस लिया अपना फैसला?
नवीनतम निर्णय में BCI ने स्पष्ट किया कि सर्वसम्मति से चर्चा के बाद यह पाया गया कि नालसार के 2026 बैच के अधिकांश छात्र पूरी तरह बेकसूर हैं और उनका किसी के प्रति अनादर दिखाने का कोई इरादा नहीं था। बार काउंसिल ने बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से मिली रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बाहरी तत्वों और गिने-चुने शिक्षकों ने छात्रों को भड़काने में भूमिका निभाई थी।
बार काउंसिल ने क्या कहा?
काउंसिल ने जोर देकर कहा कि जिन छात्रों की इस पूरे घटनाक्रम में कोई भूमिका नहीं रही है, उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। बीसीआई के इस यू-टर्न के बाद नालसार के सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट के बादल छट गए हैं और उनके एडवोकेट के रूप में पंजीकृत होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
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Harish V Nairauthor
Harish V Nair is Senior Editor (Legal) with Times Now TV. In his journalism career spanning 20 years, he has specialised in coverage of Supreme Court and issues pertaining to judiciary.
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