Aug 16, 2026 11:33 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
NLSIU समुदाय ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (हैदराबाद) के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ BCI की ओर से की गई हालिया कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए NALSAR समुदाय के प्रति 'अप्रतिबंधित एकजुटता' जताई गई है।

NLSIU में छात्रों ने CJI और BCI चेयरमैन के दौरे का विरोध किया।
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के छात्रों और पूर्व छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भाग लेने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
NLSIU समुदाय ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (हैदराबाद) के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ BCI की ओर से की गई हालिया कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए NALSAR समुदाय के प्रति 'अप्रतिबंधित एकजुटता' जताई गई है।
700 से ज्यादा छात्र और एल्युम्नाई का विरोध
शनिवार को जारी एक कड़े बयान में NLSIU के 2026 बैच के 165 ग्रेजुएट छात्रों, 409 वर्तमान छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं।
NLSIU के छात्रों ने कहा, दीक्षांत समारोह एक छात्र के शैक्षणिक जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण और उसके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होता है। ऐसे उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को डिग्रियां देने के लिए आमंत्रित करना, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से छात्रों के प्रति तिरस्कार और नीचा दिखाने वाला रवैया व्यक्त किया है, अपमानजनक और छात्रों के संघर्षों का मजाक उड़ाना है।
छात्रों ने NALSAR की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने CJI को अपने दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने पर पुनर्विचार की अपील की थी। साथ ही, NLSIU के छात्रों ने भी उन्हीं कारणों से अपने दीक्षांत समारोह में CJI की उपस्थिति पर गहरा असंतोष जताया है।
BCI की भूमिका और 'विच-हंट' के आरोप
NLSIU समुदाय ने NALSAR मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की ओर से उठाए गए कदमों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों ने मांग की कि BCI, NALSAR के छात्रों और शिक्षकों से उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने की कोशिश करने के लिए बिना शर्त माफी मांगे।
बयान में BCI से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि अध्यक्ष द्वारा आधिकारिक लेटरहेड के इस्तेमाल से संबंधित क्या प्रोटोकॉल हैं।
NALSAR को ज्ञापन में शामिल छात्रों व शिक्षकों की पहचान करने के निर्देशों की आलोचना करते हुए इसे "विच-हंट" करार दिया गया। छात्रों ने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से सभी विश्वविद्यालयों में असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी पर बुरा असर पड़ेगा।
"हमें एक बेहतर BCI चाहिए"
छात्रों ने दलील दी कि BCI की यह कार्रवाई एडवोकेट्स एक्ट-1961 के तहत उसे दी गई शक्तियों से बाहर है और यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत दी गई बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।
BCI अध्यक्ष की लगातार पक्षपातपूर्ण राजनीतिक टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा गया कि ऐसे आचरण से कानूनी पेशे में जनता का भरोसा कम हुआ है। युवा वकीलों और नागरिकों के रूप में छात्रों ने बार काउंसिल में सुधार की मांग उठाई।
हालांकि BCI ने बाद में NALSAR के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी थी, लेकिन छात्रों का कहना है कि एक वैधानिक संस्था की ओर से इस तरह की कार्रवाई शुरू करना ही अपने आप में चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह बयान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए जारी किया गया है।
