
नवरात्रि अष्टमी भोगImage Credit source: pexels
Durga Ashtami 2026: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस बार 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो चुके हैं. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दुर्गा अष्टमी का दिन बहुत ही विशेष और पवित्र माना जाता है. इस पावन अवसर पर माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का विशेष भोग लगाया जाता है. नौ दिनों के लंबे फलाहार के बाद पक्का भोजन यानी पूरी, हलवा और चने से मां दुर्गा का पूजन संपन्न होता है. यह सात्विक भोजन माता रानी को अत्यंत प्रिय है. अष्टमी के दिन भक्तजन बहुत ही प्रेम और श्रद्धा के साथ इसे तैयार करते हैं. व्रत का समापन भी इसी पावन और शुद्ध भोग को ग्रहण करके किया जाता है. आइए जानते हैं कि इस खास भोग को लगाने के पीछे क्या धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपा है.
मां दुर्गा को बहुत प्रिय है हलवा, पूरी और चने का सात्विक भोग
दुर्गा अष्टमी के दिन पूरी, हलवा और काले चने का भोग लगाने का धार्मिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्व होता है. नौ दिनों तक लगातार केवल फलाहार करने के बाद जब पक्का भोजन तैयार किया जाता है, तो उसे सबसे पहले माता रानी को समर्पित किया जाता है. यह भोजन पूरी तरह से सात्विक होता है और माता रानी को अत्यंत प्रिय माना गया है. मान्यता है कि इस विशेष भोग को अर्पित करने से देवी मां अपने भक्तों पर बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं और उनके घर में सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं. नवरात्रि के व्रत का समापन इसी सात्विक भोग के साथ किया जाता है. इसके बाद ही भक्तजन प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं. इस परंपरा का पालन करने से पूजा-अर्चना का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मन में सकारात्मकता बनी रहती है.
भोग से जुड़ा वैज्ञानिक कारण और सेहत के लिए इसके लाभ
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अष्टमी पर हलवा, पूरी और चने का भोग लगाने के पीछे एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है. नौ दिनों तक लगातार उपवास रखने के बाद शरीर को तुरंत ताकत और ऊर्जा की बहुत ज्यादा जरूरत होती है. काले चने में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, जो शरीर की कमजोरी को तुरंत दूर करने में मदद करती है. वहीं दूसरी ओर सूजी का हलवा बहुत ही हल्का और सुपाच्य होता है, जो पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है. यह भोजन पाचन तंत्र पर बिना कोई भारी दबाव डाले शरीर को भरपूर पोषण देता है. इसलिए उपवास खोलने के लिए इस सात्विक आहार को सबसे सही और उत्तम माना गया है. यह परंपरा हमारी सेहत और पोषण का भी पूरा ध्यान रखती है.
माता रानी को क्यों पसंद है पूरी, हलवा और काले चने का भोग
दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर मां दुर्गा को पूरी, सूजी का हलवा और काले चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है. नौ दिनों के लंबे फलाहार के बाद जब यह पक्का और सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, तो इसे सबसे पहले माता रानी को समर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुद्ध घी में तैयार हलवा, गरमा-गरम पूरी और मसालेदार चने का यह सात्विक आहार देवी मां को बेहद प्रिय है. इस विशेष भोग को पूरे भक्ति भाव से अर्पित करने से माता रानी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं. नवरात्रि के व्रत का समापन भी इसी पावन भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करके किया जाता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

रजनी गुप्ता
रजनी गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम ए, एम फिल (ज्योतिष) की शिक्षा प्राप्त की है. भारतीय विद्या भवन से वास्तु शास्त्र में डिप्लोमा प्राप्त किया है. इसके अलावा अंक शास्त्र (न्यूमरोलॉजी) और टैरो कार्ड की विद्या भी प्राप्त की है. 17 वर्ष से लगातार ज्योतिष से जुड़ी हुई हैं. हमेशा कोशिश रहती है कि लोगों का सही मार्गदर्शन किया जाए. उनके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन से लोगों के जीवन में काफी बदलाव भी आए है. अपनी सेवाएं टैरो कार्ड ओर न्यूमरोलॉजी के माध्यम से प्रदान करती हूं. इस समय मैं Astropatri.com से जुड़ी हुई हैं. हमेशा से ही अध्यात्म की ओर झुकाव रहा है, शायद इसीलिए प्रभु ने उन्हें यह रास्ता दिखाया कि लोगों की सहायता कर सकूं. इसके साथ साथ उन्हें कविताएं लिखने और पेंटिंग करने में भी बहुत रुचि है. सालासर बालाजी की कृपा से अपने पथ पर निरंतर अग्रसर हैं.
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