Sep 09, 2026 11:04 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

रोहित पवार ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि हमें महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता से वंचित रखा जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर, वे हमारे भी नेता हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ रोहित पवार और सुनेत्रा पवार के साथ सुप्रिया सुले।
आज से करीब 27 साल पहले मई 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर शरद पवार ने पीए संगमा और तारिक अनवर के साथ मिलकर कांग्रेस में बगावत कर दी थी। इसके बाद इन तीनों नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके विरोध में शरद पवार ने कांग्रेस को तोड़ते हुए जून 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया था लेकिन 27 साल बाद अब उन्हीं शरद पवार के पोते फिर से कांग्रेस की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से NCP के दोनों धड़ों के विलय और NDA में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन फिलहाल दोनों धड़ों का नेतृत्व कर रहीं भाभी और ननद (सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले) ने इसे अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंचाया है।
इस बीच, इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि NCP संस्थापक शरद पवार के पोते और NCP (SCP) विधायक रोहित पवार अपने लिए कांग्रेस में संभावनाएं तलाश रहे हैं। उन्हें हाल ही में पुणे में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के स्वागत में सैकड़ों पोस्टर लगवाते देखा गया। इसके बाद उन अटकलों को और हवा मिली कि रोहित पवार दादा की उस गलती पर पर्दा डालते हुए कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
ट्विस्ट की कहानी इसी साल मार्च से शुरू होती है
बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति और पवार फैमिली में आए इस ट्विस्ट की कहानी इसी साल मार्च में तब शुरू होती है, जब रोहित पवार दिल्ली गए। तब वह विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलकर कुछ दस्तावेज सौंपना चाहते थे और उस विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग के लिए समर्थन जुटाना चाहते थे, जिसमें उनके चाचा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मौत हो गई थी। तब दोनों के बीच बैठक एक घंटे से ज़्यादा चली थी। NCP (SP) के युवा नेता, जो शरद पवार के बड़े भाई दिनकरराव के पोते हैं, ने तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि तब कांग्रेस नेताओं ने रोहित पवार को भरोसा दिलाया था कि "लड़ते रहो; हमारी विचारधारा का समय जरूर आएगा।"
रोहित पवार फैमिली में नई फूट डालेंगे?
इस घटना के कुछ दिनों बाद, महाराष्ट्र में जब अजित पवार के विमान दुर्घटना मामले में FIR दर्ज नहीं हो सकी, तो रोहित पवार कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु जा पहुंचे और वहां 'ज़ीरो FIR' दर्ज कराई। तब से, ये अफवाहें और तेज हो गई हैं कि रोहित पवार कांग्रेस की तरफ झुक रहे हैं। अब जब उन्होंने पुणे में राहुल गांधी के "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के स्वागत में सैकड़ों पोस्टर लगाए तो अटकलें फिर से जोर मारने लगी हैं कि क्या रोहित पवार फैमिली में नई फूट डालेंगे?
हम दोनों की पार्टी के नाम में 'कांग्रेस' शब्द
'द इंडियन एक्सप्रेस' से बात करते हुए रोहित ने बताया, "हम दोनों की पार्टी के नाम में 'कांग्रेस' शब्द है; हमारी विचारधाराओं में कोई अंतर नहीं है। पवार साहब (शरद पवार) कांग्रेस में थे। वह पार्टी हमारे लिए नई नहीं है। भले ही कागज पर हम अलग हों, लेकिन हम दशकों से सहयोगी रहे हैं। अभी, हम दोनों के सामने सबसे जरूरी काम राज्य और केंद्र में 2029 में सत्ता में वापसी करना है।"
गांधी से प्रेरणा मिलती है
रोहित ने कहा कि उन्हें गांधी से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा, "हमें महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता से वंचित रखा जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर, वे हमारे भी नेता हैं।" इसके साथ ही रोहित ने खुद को राज्य में विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर पेश करने के लिए पूरे महाराष्ट्र का दौरा किया है। विपक्ष के पास इस पद का दावा करने के लिए जरूरी संख्या नहीं है और स्पीकर ने भी किसी को यह दर्जा नहीं दिया है। इतना ही नहीं रोहित अक्सर अकेले ही BJP के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरते दिखते हैं। कभी किसानों,तो कभी महिलाओं, छात्रों और ठेकेदारों के मुद्दे उठाते हैं। गांधी की ही तरह, वह अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेजेंटेशन देते हैं और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक का मुद्दा उठाते रहे हैं।
कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते
इसी हफ़्ते, उन्होंने हाल ही में हुए पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के चेयरमैन विवेक भीमन्वार को निशाना बनाया और सोमवार को पुणे में हजारों लोगों ने भीमन्वार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी का समर्थन भी मिला था। इन सब वजहों से उनकी तुलना राहुल गांधी से की जा रही है। कुछ हफ़्ते पहले, जब यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि NCP (SP) शायद NCP में विलय कर सकती है और BJP के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो सकती है, तब यह चर्चा थी कि ऐसी स्थिति में रोहित खुद कांग्रेस में चले जाएंगे। राज्य कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "वे अटकलों के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते और राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय नहीं दिखना चाहते हैं।"