Published: Sunday, August 30, 2026, 13:21 [IST]
BJP NDA Reservation Debate: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के भीतर ही नई राजनीतिक तकरार का कारण बन गया है। SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर, 'कोटे में कोटा' और आर्थिक आधार पर आरक्षण में बदलाव को लेकर सहयोगी दल अलग-अलग राय रखते हैं।
चिराग पासवान और रामदास अठावले मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के समर्थन में क्रीमी लेयर और उप-कोटा का विरोध कर रहे हैं, जबकि जीतन राम मांझी और ओम प्रकाश राजभर आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि यूपी चुनाव से पहले आरक्षण पर NDA के सहयोगियों के बीच यह मतभेद कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है?
चिराग और अठावले एक तरफ, मांझी-राजभर दूसरी तरफ
आरक्षण के मुद्दे पर NDA के भीतर साफ तौर पर दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान SC आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा के विरोध में हैं। वहीं रामदास अठावले आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं। दूसरी ओर जीतन राम मांझी की पार्टी HAM और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और कमजोर समुदायों तक इसका लाभ पहुंचाने की मांग कर रही हैं।
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मांझी की पार्टी क्यों मांग रही है 'कोटे में कोटा'?
जीतन राम मांझी की पार्टी HAM (सेक्युलर) का तर्क है कि SC और ST आरक्षण का लाभ सभी समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। पार्टी का कहना है कि कुछ समुदाय आरक्षण का अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ उठा चुके हैं, जबकि मुसहर जैसे अत्यंत वंचित दलित समुदाय अभी भी पीछे हैं। इसलिए पार्टी SC-ST आरक्षण के भीतर उप-कोटा की व्यवस्था का समर्थन कर रही है, ताकि सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से पिछड़े समुदायों को अलग से पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।
चिराग पासवान का पलटवार- पहले खुद छोड़ें लाभ
चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी के रुख पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था का समर्थक है तो उसे पहले खुद आरक्षण से मिलने वाले लाभों को छोड़ने की पहल करनी चाहिए। चिराग ने मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे तक की मांग की। उनका तर्क है कि SC आरक्षण सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना के आधार पर दिया गया संवैधानिक अधिकार है।
ओम प्रकाश राजभर ने क्यों उठाई आरक्षण में सुधार की मांग?
ओम प्रकाश राजभर ने आर्थिक आधार पर आरक्षण और मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा का समर्थन किया है। उनका कहना है कि आरक्षण का असली उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाना था, लेकिन आज इसका लाभ कई ऐसे परिवारों की अगली पीढ़ियों को भी मिल रहा है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चुके हैं। राजभर का तर्क है कि जो लोग मुख्यधारा में आ चुके हैं, उन्हें अलग कर सबसे कमजोर वर्गों तक आरक्षण का वास्तविक लाभ पहुंचाने पर विचार होना चाहिए।
यूपी चुनाव से पहले NDA के लिए क्यों बढ़ी सियासी चुनौती?
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा NDA के लिए बेहद संवेदनशील बन सकता है, क्योंकि गठबंधन के सहयोगी दलों का बड़ा राजनीतिक आधार दलित, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग है। चिराग और अठावले जहां मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ मजबूत संदेश दे रहे हैं, वहीं मांझी और राजभर कमजोर जातियों के भीतर लाभ के पुनर्वितरण की बात कर रहे हैं। ऐसे में विपक्ष भी NDA के इन मतभेदों को राजनीतिक हथियार बना सकता है और चुनावी बहस को आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रित करने की कोशिश कर सकता है।