Aug 11, 2026 09:40 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

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इस सर्वे के अनुसार, 58.7% लोगों ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। केवल 20.7% लोगों को लगा कि वे समझती हैं। वहीं, 20.5% लोग तटस्थ रहे या उन्होंने कोई राय नहीं दी।

pm modi rahul gandhi

राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन और उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने पहली बार राष्ट्रीय फलक पर यह दिखलाया कि भारत की Gen Z (1996 से 2010 के बीच पैदा हुए लोग) की आवाज को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अब, इस गरमाए माहौल के बीच आए एक नए सी-वोटर (CVoter) स्नैप पोल ने देश के युवाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। C-Voter के एक स्नैप पोल से पता चला है कि लगभग 10 में से 6 युवा यह नहीं मानते कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को समझती हैं।

यह सर्वे हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है, जिनका नेतृत्व 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने किया था। यह सर्वे दिखाता है कि भारत की Gen Z राजनीतिक पार्टियों, चुनावी मुद्दों और राष्ट्रवाद को कैसे देखती है और सोशल मीडिया उनकी राय को कितना प्रभावित करता है। आखिरकार, इस आंदोलन ने दिखाया है कि Gen Z का अपना एक अलग अंदाज़ और अपनी भाषा है। इसलिए, इस सर्वे के ज़रिए हम आपको यह समझने में मदद करेंगे कि भारत के युवाओं की सोच और प्राथमिकताएं कैसे बनती हैं। इस सर्वे में 18 से 35 वर्ष के बीच के लगभग 1,270 युवाओं को शामिल किया गया था ।

राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती

इस सर्वे के अनुसार, 58.7% लोगों ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। केवल 20.7% लोगों को लगा कि वे समझती हैं। वहीं, 20.5% लोग तटस्थ रहे या उन्होंने कोई राय नहीं दी। दिलचस्प बात यह है कि यह सोच राजनीतिक पसंद से परे है। सर्वे के मुताबिक, BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन करने वालों में से 54% ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां Gen Z की चिंताओं को नहीं समझती हैं। केवल 26% ने इसके पक्ष में जवाब दिया। कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष का समर्थन करने वाले जेन जी में यह आंकड़ा काफी ज़्यादा था। लगभग 64% लोगों ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां भारत के युवाओं की सोच से मेल नहीं खातीं। अन्य पार्टियों का समर्थन करने वाले लगभग 58.5% लोगों की भी यही राय थी।

शिक्षा और स्वास्थ्य Gen Z का कितना फोकस

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद पंजाब और झारखंड में हुए आंदोलनों ने दिखाया है कि Gen Z शिक्षा को कितना महत्व देती है। C-Voter सर्वे से पता चलता है कि युवा रोज़मर्रा के मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। सर्वे में शामिल लोगों में से 53% ने बताया कि रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य चुनाव के सबसे बड़े मुद्दे थे। महंगाई दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा (13.1%) था, और उसके बाद भ्रष्टाचार (11.9%) का नंबर था।

वोट देने का क्या होगा आधार?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली, पानी और सड़क जैसे पुराने मुद्दे 'जेन ज़ी' (Gen Z) के 8.2% लोगों के लिए अहम थे। सर्वे में शामिल 4.8% लोगों के लिए कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा चुनाव के सबसे अहम मुद्दे थे। भारत के 'जेन ज़ी' के सिर्फ़ 2.7% लोगों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अहम थी। सर्वे से 'जेन ज़ी' की वोटिंग पसंद के बारे में भी पता चला। लगभग 33.3% लोगों ने कहा कि वोट देने का फ़ैसला करने में "मुद्दे" सबसे अहम आधार थे। भारत के 'जेन ज़ी' (20%) के लिए नेता का चुनाव दूसरे नंबर पर था। 'जेन ज़ी' के सिर्फ़ 13.9% लोगों ने कहा कि वे मुख्य रूप से पार्टी के आधार पर वोट देंगे। सिर्फ़ 7.7% लोगों ने कहा कि उनके फ़ैसले में उम्मीदवार सबसे अहम बात होगी।