Updated On: Jul 18, 2026 | 04:32 PM IST

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सार

NEET Result Mismatch Beed: नीट री-एग्जाम के नतीजों में बीड के दो छात्रों सोहम गवते और ज्ञानेश्वरी पवार के अंकों में भारी गड़बड़ी का आरोप लगा है। एनटीए के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

NEET Result Mismatch Beed

सोहम गवते और ज्ञानेश्वरी पवार के NEET रिजल्ट में गड़बड़ी (फोटो क्रेडिट-X)

विस्तार

NEET Result Mismatch: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET-UG) के पुनः आयोजित (Re-NEET) परीक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग के बीड जिले से दो बेहद चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जहां होनहार छात्रों के अंकों में भारी विसंगति का आरोप लगा है।

आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान के बाद जहां एक छात्र को 522 अंक मिलने की पक्की उम्मीद थी, वहीं उसके स्कोरकार्ड पर महज 95 अंक दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह एक अन्य होनहार छात्रा, जिसे 702 से अधिक अंक मिलने का पूरा भरोसा था, उसे सिर्फ 87 अंक दिए गए हैं। इस अप्रत्याशित परिणाम से हताश अभिभावकों ने अब न्याय के लिए सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच (संभाजीनगर) का रुख करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा की निष्पक्षता पर दोबारा सवालिया निशान लगा दिया है।

522 की उम्मीद और मिले सिर्फ 95 अंक

बीड के रहने वाले छात्र सोहम गवते के घर पर इस NEET रिजल्ट के बाद गम का पहाड़ टूट पड़ा है। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब एनटीए द्वारा आधिकारिक उत्तर पुस्तिका और उत्तर कुंजी जारी की गई थी, तब सोहम ने अपने पिता के साथ मिलकर एक-एक प्रश्न का बारीकी से मिलान किया था। उस स्व-मूल्यांकन में सोहम को 522 अंक मिल रहे थे, जो एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त थे।

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हालांकि, 16 जुलाई को जब अंतिम स्कोरकार्ड जारी हुआ, तो सोहम के होश उड़ गए क्योंकि स्क्रीन पर केवल 95 अंक दर्ज थे। इस सदमे के कारण सोहम ने कई घंटों तक किसी से एक शब्द भी नहीं बोला। उसकी मां ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा दिन-रात केवल दो-तीन घंटे सोकर पढ़ाई करता था, लेकिन एनटीए की इस कथित तकनीकी लापरवाही ने उसकी वर्षों की हाड़-तोड़ मेहनत पर एक झटके में पानी फेर दिया। सोहम के पिता ने ओएमआर शीट में बड़े घोटाले का दावा करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो वे कोर्ट जाएंगे।

टॉपर बनने का सपना चकनाचूर; 702 अंक का दावा करने वाली ज्ञानेश्वरी को मिले 87

एनटीए के इस कथित तकनीकी फाल्ट या मानवीय चूक का शिकार अकेले सोहम नहीं हैं। बीड के ही वडावनी तालुका की रहने वाली छात्रा ज्ञानेश्वरी पवार की आपबीती भी उतनी ही हृदयविदारक है। ज्ञानेश्वरी ने डॉक्टर बनने के अपने अटूट सपने को पूरा करने के लिए एक साल तक प्रतिदिन 18-18 घंटे तक कठिन अध्ययन किया और कई बार खाना तक छोड़ दिया था।

उत्तर कुंजी के अनुसार 702 से अधिक अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर टॉपर बनने की कगार पर खड़ी ज्ञानेश्वरी को जब परिणाम में केवल 87 अंक मिले, तो उसका पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। ज्ञानेश्वरी की माँ ने सीधे तौर पर ओएमआर स्कैनिंग प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने मांग उठाई है कि एनटीए पारदर्शित अपनाते हुए छात्रों की मूल भौतिक ओएमआर शीट उनके सामने प्रस्तुत करे, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस पूरे विवाद ने देश भर के लाखों नीट परीक्षार्थियों के मन में एजेंसी के मूल्यांकन सॉफ्टवेयर को लेकर गहरा संशय पैदा कर दिया है।

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