Published: Thursday, September 3, 2026, 18:15 [IST]
NEET UG 2026 देने वाले दो छात्रों के लिए पिछले कई महीने बेहद परेशान करने वाले रहे। पहले उन्होंने मेडिकल में दाखिले की उम्मीद के साथ परीक्षा दी, फिर पेपर लीक के विवाद के कारण परीक्षा रद्द हो गई। इसके बाद उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। लेकिन जब री-नीट का रिजल्ट आने का समय आया तो दोनों छात्रों के नतीजे रोक दिए गए। वजह थी पेपर लीक मामले में उनकी कथित भूमिका।
छात्रों ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब अदालत ने दोनों को बड़ी राहत देते हुए NTA को उनका रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं और सिर्फ आरोपों के आधार पर छात्रों को काउंसलिंग से बाहर रखना उनके भविष्य को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
पहले परीक्षा, फिर दोबारा एग्जाम
मामला आदित्य विनोद स्वामी व अन्य बनाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का है। दिल्ली हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जस्टिस जसमीत सिंह ने की। उन्होंने 24 अगस्त को इस मामले में आदेश दिया। दोनों छात्रों ने 3 मई 2026 को NEET UG की परीक्षा दी थी। लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद यह परीक्षा रद्द कर दी गई। इसके बाद छात्रों को दोबारा री-नीट परीक्षा में शामिल होना पड़ा। इस बीच कथित पेपर लीक मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच आगे बढ़ी और CBI ने मामले में चार्जशीट भी दाखिल की।
चार्जशीट में आरोपी नहीं, गवाह हैं छात्र
इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि दोनों छात्रों के नाम सीबीआई की चार्जशीट में आरोपी के तौर पर नहीं, बल्कि गवाह के रूप में दर्ज किए गए। इसके बावजूद एनटीए ने दोनों का री-नीट रिजल्ट रोक दिया। 5 जुलाई को छात्रों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया।
एनटीए ने कोर्ट में बताया कि सीबीआई की तरफ से उसे जानकारी दी गई थी कि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल किया या उसे दूसरे लोगों के साथ साझा किया था।
CBI ने लगाया पेपर खरीदने का आरोप
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने हाईकोर्ट के सामने कहा कि दोनों छात्रों ने लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल किया था और इसके लिए पैसे भी दिए थे। यानी छात्रों पर पेपर लीक से फायदा लेने का गंभीर आरोप लगाया गया। लेकिन दूसरी तरफ, सीबीआई की चार्जशीट में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया था।
यही वजह थी कि मामले में छात्रों के रिजल्ट को रोकने को लेकर सवाल खड़े हुए। छात्रों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब उन्हें चार्जशीट में आरोपी नहीं बनाया गया है, तो उनका रिजल्ट इस तरह रोकना उनके भविष्य पर सीधा असर डाल रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा- आरोप अभी साबित नहीं हुए
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। इन आरोपों की सच्चाई आगे सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के जरिए तय होगी। अदालत ने माना कि केवल ऐसे आरोपों के आधार पर छात्रों का रिजल्ट रोकना सही नहीं होगा, जिन पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों छात्र अपने करियर के बेहद अहम शुरुआती दौर में हैं। अगर उन्हें NEET UG काउंसलिंग में शामिल होने से रोक दिया जाता है, तो इससे उनके मेडिकल करियर पर ऐसा असर पड़ सकता है, जिसकी बाद में भरपाई करना मुश्किल हो।
NTA को 24 घंटे में रिजल्ट जारी करने का आदेश
कोर्ट ने अब एनटीए को दोनों छात्रों का रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया है। आदेश अपलोड होने के 24 घंटे के अंदर रिजल्ट घोषित करना होगा। अदालत ने काउंसलिंग को लेकर भी छात्रों को राहत दी है। अगर उस समय तक काउंसलिंग का रिजल्ट जारी हो चुका है, तब भी दोनों छात्र ऑफलाइन तरीके से काउंसलिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसका मतलब है कि पात्रता की बाकी शर्तें पूरी करने पर दोनों छात्रों के लिए NEET UG काउंसलिंग के अगले चरण में शामिल होने का रास्ता खुल गया है।
राहत मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया कि रिजल्ट जारी करने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों को भविष्य की किसी कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह राहत मिल गई है। अगर आगे की जांच या कानूनी प्रक्रिया में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित एजेंसियां कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती हैं।
यानी फिलहाल छात्रों को रिजल्ट और काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिला है, लेकिन पेपर लीक मामले से जुड़ी जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
8 जनवरी 2027 को अगली सुनवाई
इस मामले की मुख्य याचिका पर अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को होगी। एनटीए को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया है। इस दौरान मामले में छात्रों की भूमिका, पेपर लीक से जुड़े आरोप और जांच में सामने आए सबूतों पर आगे सुनवाई होगी।
NEET UG विवाद में नया मोड़
NEET UG 2026 को लेकर पहले ही लाखों मेडिकल अभ्यर्थी परेशान रहे हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा परीक्षा कराई गई। इसके बाद रिजल्ट और काउंसलिंग को लेकर भी छात्रों को इंतजार करना पड़ा। ऐसे समय में दो छात्रों का रिजल्ट रोकने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत के इस आदेश के बाद अब दोनों छात्रों को अपना रिजल्ट देखने और पात्रता पूरी होने पर मेडिकल काउंसलिंग में आगे बढ़ने का मौका मिल गया है।