NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है. NTA के विषय विशेषज्ञों ने ही पेपर लीक किया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक की सबसे बड़ी वजह यह रही कि जिन शिक्षकों ने पेपर तैयार किया, उन्हें ही इसका मराठी भाषा में अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई थी. यहीं से पेपर लीक होने की शुरुआत हो गई.
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, NTA के परीक्षा पैनल में शामिल केमिस्ट्री के शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी, फिजिक्स की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और बायोलॉजी की शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार को पेपर तैयार करने के साथ-साथ उसका मराठी में अनुवाद करने का काम भी दिया गया था.
शिक्षकों ने याद कर लिए पेपर्स, छात्रों तक पहुंचाए
जांच में यह आरोप भी है कि इन शिक्षकों के पास परीक्षा से पहले फाइनल पेपर काफी समय तक उपलब्ध रहा. इसी दौरान उन्होंने सवालों को याद कर लिया और बाद में पुणे में अपनी कोचिंग क्लास में पढ़ने वाले चुनिंदा छात्रों तक ये सवाल पहुंचा दिए.
CBI की चार्जशीट में कहा गया कि इन शिक्षकों को फाइनल पेपर के साथ पर्याप्त समय मिला क्योंकि वे पेपर तैयार करने और फिर उसका अनुवाद करने यानी दोनों अहम प्रक्रियाओं में शामिल थे. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को कई दिनों तक एक सैनिटाइज्ड एनवायरनमेंट में रखा गया था, लेकिन इस दौरान उन्हें घर जाने, कोचिंग क्लास लेने और फिर वापस आकर अपना काम करने की अनुमति थी.
शिक्षकों ने छात्रों को सीधे सवाल रटवाया
चार्जशीट के मुताबिक, शिक्षकों ने फाइनल पेपर से जुड़े सवाल याद कर उनका एक क्वेश्चन बैंक तैयार किया. इसके बाद उन्होंने चुनिंदा छात्रों को वही सवाल पढ़ाए और कुछ सवालों को बहुत महत्वपूर्ण बताकर खास तौर से रटवाया. छात्रों को यह नहीं बताया गया कि ये सवाल सीधे फाइनल NEET-UG पेपर से लिए गए हैं.
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे, जो तीनों टीचरों को जानती थीं, ने कोचिंग के छात्रों से ये सवाल इकट्ठा किए. इसके बाद उसने उन्हें PDF के रूप में टाइप किया और धनंजय लोखंडे को बेच दिया. आरोप है कि लोखंडे ने इस PDF को आगे कई लोगों तक पहुंचाया.
3 विशेषज्ञों ने अलग तरीकों से निकाला पेपर
जांच एजेंसी का मानना है कि इसी तरह यह पेपर देशभर में फैल गया. जांच एजेंसी के अनुसार, मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे ने पेपर को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने में अहम भूमिका निभाई. CBI ने इस पूरी प्रक्रिया में सामने आई खामियों की जानकारी NTA को दे दी है और जल्द ही इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपेगी.
चार्जशीट के मुताबिक, NTA के विषय विशेषज्ञों ने ही NEET-UG 2026 का पेपर लीक किया. पेपर प्रिंटिंग प्रेस से नहीं बल्कि NTA के गोपनीय काम में लगे एक्सपर्ट्स के जरिए लीक हुआ था. 3 विषय विशेषज्ञों ने दिल्ली स्थित NTA ऑफिस से पेपर अलग-अलग तरीकों से बाहर निकाला. जांच में खुलासा हुआ कि गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की कोई तलाशी नहीं ली जाती थी.
NTA में गोपनीय सेक्शन में प्रवेश और निकास के दौरान जांच या तलाशी की कोई व्यवस्था नहीं थी. साथ ही निगरानी के लिए समर्पित CCTV लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम नहीं था. इसी वजह से गोपनीय हॉल में विशेषज्ञों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं की जा सकी.
CBI के अनुसार एक आरोपी ने सवालों को कागज की पर्चियों पर लिखकर छिपा दिया. तो 2 अन्य आरोपियों ने सवालों को याद कर लिया और होटल लौटकर उन्हें लिख लिया या NCERT की पुस्तकों में संबंधित अंश चिन्हित कर दिए. जांच में सामने आया कि NTA ऑफिस की पहली मंजिल के पूरे गोपनीय विंग में लाइव CCTV मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं थी.
NTA के CCTV सिस्टम में सिर्फ 2025 दिनों का बैकअप उपलब्ध था. NEET-UG 2026 से जुड़ा गोपनीय कार्य 7 अप्रैल 2026 को पूरा हो गया था, जबकि CBI ने मामला 12 मई 2026 को दर्ज किया. इसी कारण जांच के दौरान संबंधित अवधि का CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं मिल सका. CBI का दावा है, आरोपी मनीषा संजय हवलदार दिल्ली स्थित अपने ठिकाने पर लौटकर सवालों के संक्षिप्त नोट तैयार करती थी.
छात्रों से सवाल नोटबुक पर लिखने को कहा गया
चार्जशीट के मुताबिक आरोपी पी.वी. कुलकर्णी ने गोपनीय अनुभाग में उपलब्ध कराई गई सादे कागज की शीटों पर रसायन विज्ञान के सभी 135 सवाल और उत्तर विकल्प संक्षेप में लिखे थे. CBI का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था की कई खामियों का फायदा उठाकर पेपर बाहर निकालने की साजिश को अंजाम दिया गया. आरोप है कि विशेषज्ञों ने अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग के दौरान मिले एक्सेस का गलत इस्तेमाल किया.
जांच में यह बात सामने आई कि छात्रों से कहा गया कि सवालों को हाथ से नोटबुक में लिखें, ताकि कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बने. फिजिक्स के सवाल तेजस शाह को बताए गए, जिन्होंने उनकी तस्वीरें लेकर लातूर के RCC तक पहुंचाई. जांच में ऑनलाइन पैसों के लेन-देन के सबूत भी मिलने का दावा किया गया है.
प्रत्याशियों को याद कराया पूरा पेपर बैंक
CBI के मुताबिक, पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा मंधारे और डॉ. मनोज शिरुरे ने उम्मीदवारों को अस्पताल बुलाकर परीक्षा से पहले पूरा पेपर बैंक याद कराया. जांच में दावा किया गया है कि पेपर महाराष्ट्र से हरियाणा और फिर राजस्थान तक पहुंचा. टेलीग्राम के जरिए लीक सवालों की PDF भेजी गई, जिसे बाद में लाखों रुपये में बेचा गया. आरोप है कि जयपुर में पेपर की प्रिंट कॉपी निकालकर छात्रों और निजी ट्यूटर्स में बांटी गई. डॉ. शिरुरे के परिवार से 5 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी दावा किया गया है.
इस मामले की जांच कर रही CBI का कहना है कि चार्जशीट में डिजिटल, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पेपर लीक की पूरी साजिश का खुलासा किया गया है. CBI मंगलवार को 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

जितेन्द्र कुमार शर्मा
साल 2002 से क्राइम और इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टिंग का अनुभव। नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, शाह टाइम्स के अलावा टीवी मीडिया में BAG Films के नामी शो सनसनी और रेड अलर्ट में काम किया। उसके बाद न्यूज 24, इंडिया टीवी में सेवाए दी और टीवी 9 भारतवर्ष के साथ सफर जारी है।
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