Mon, 10 Aug 2026 10:54 AM IST
Bhupendra Singh
अतुल अवस्थी/संजय वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अतुल अवस्थी/संजय वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 10 Aug 2026 10:54 AM IST
सार
18 साल बाद एक बार फिर नेपाल में हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उठा है। पहाड़ से मधेश तक मांग गूंज रही है। इसकी बहस संसद तक पहुंच गई है। आरपीपी इसके समर्थन में है। सुनसरी हिंसा की भी जांच तेज कर दी गई है। समिति फायरिंग के तकनीकी पहलू खंगालेगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रुपईडीहा बॉर्डर का मुख्य प्रवेश द्वार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
नेपाल में करीब 18 साल बाद हिंदू राष्ट्र का मुद्दा एक बार फिर सड़क से सियासत के केंद्र तक पहुंच गया है। सुनसरी के देवानगंज में धार्मिक विवाद के बाद भड़के तनाव ने इसे नई धार दी है। काठमांडू से लेकर तराई और सीमावर्ती इलाकों तक हिंदू राष्ट्र की मांग उठ रही है। अब इसे केवल धार्मिक मांग नहीं, बल्कि नेपाल की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) लंबे समय से नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने और राजशाही बहाल करने की समर्थक रही है। मई 2026 में पार्टी की मुख्य सचेतक खुशबू ओली ने संसद में संविधान संशोधन की प्रक्रिया में सनातन हिंदू राष्ट्र और संवैधानिक राजशाही समेत अन्य मुद्दों को शामिल करने की मांग की थी। मार्च 2026 के चुनाव में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटें जीतीं। हालांकि हिंदू राष्ट्र की व्यवस्था बहाल करने के लिए संविधान संशोधन और व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी होगी।
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कई संगठन भी हिंदू राष्ट्र के समर्थन में...
नेपाल का विश्व हिंदू परिषद और हिंदू स्वयंसेवक संघ समेत कई संगठन भी हिंदू राष्ट्र के समर्थन में हैं। विश्व हिंदू परिषद नेपाल की मातृशक्ति विभाग की अध्यक्ष कृष्णा पांडे के अनुसार, मई 2026 में सरकार को वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना समेत कई सुझाव दिए गए थे और काठमांडू में मंत्रालय स्तर पर बैठक हुई थी।
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लंबे समय तक हिंदू राजशाही वाला देश रहा नेपाल
नेपाल 1768 से 2008 तक करीब 240 वर्ष हिंदू राजशाही वाला देश रहा। 2007 के अंतरिम संविधान में इसे धर्मनिरपेक्ष घोषित किया गया और 28 मई 2008 को राजशाही समाप्त कर गणतंत्र घोषित किया गया।
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