सतना के सितपुरा स्थित रिलायंस बायोफ्यूल एनर्जी संयंत्र से कथित प्रदूषण और हजारों मछलियों की मौत के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अपना फैसला सुना दिया है। अधिकरण ने उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कहा कि संयंत्र और मछलियों की मौत के ब

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क्या था पूरा मामला

यह मामला पिछले वर्ष अगस्त के अंतिम सप्ताह में सामने आया था, जब सतना-पन्ना नेशनल हाईवे स्थित सितपुरा के पास एक निजी तालाब में हजारों मछलियां मृत मिली थीं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि बारिश के दौरान रिलायंस बायोफ्यूल संयंत्र का अपशिष्ट और प्रदूषित पानी तालाब तक पहुंच गया, जिससे जल प्रदूषित हुआ और बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो गई।

घटना के बाद बचवई और छींदा गांव के लोगों ने पर्यावरण, भूजल और खेती पर भी खतरे की आशंका जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहुंचा।

NGT ने क्या कहा

न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध वैज्ञानिक रिपोर्टों और जांच दस्तावेजों का परीक्षण किया। अधिकरण ने कहा कि अब तक मिले साक्ष्यों से यह साबित नहीं हो पाया कि संयंत्र से निकले अपशिष्ट के कारण ही मछलियों की मौत हुई।

हालांकि, पर्यावरणीय जोखिम को देखते हुए अधिकरण ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी तरह के प्रदूषण को रोकने के लिए संयंत्र प्रबंधन को सभी जरूरी एहतियाती उपाय तत्काल लागू करने होंगे।

संयंत्र प्रबंधन को दिए गए ये निर्देश

NGT ने परियोजना प्रबंधन को वर्षा जल के साथ अपशिष्ट बहाव रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल (Retaining Wall) बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा परिसर में बेहतर हाउसकीपिंग बनाए रखने, दुर्गंध नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाने और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया कि इन सभी उपायों के अनुपालन की नियमित रिपोर्ट मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी जाए।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी मिली जिम्मेदारी

NGT ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को तालाब के पानी में बढ़े बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।

बोर्ड को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि मछलियों की मौत के पीछे वास्तविक प्रदूषण स्रोत क्या था। यदि जांच में कोई एजेंसी जिम्मेदार पाई जाती है तो उसके खिलाफ पर्यावरणीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने जताई थी पर्यावरणीय चिंता

घटना के समय स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट का असर केवल तालाब तक सीमित नहीं है, बल्कि खेतों और भूजल पर भी पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रदूषण रोकने के स्थायी उपाय करने की मांग की थी।

अब निगरानी पर रहेगा पूरा मामला

NGT के आदेश के बाद अब पूरे मामले की निगरानी मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। संयंत्र को पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा, जबकि बोर्ड समय-समय पर निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि भविष्य में प्रदूषण या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।