Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एनएचएआई के डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) पूर्ण चंद्र कहिली को राहत देने वाले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) पटना सर्किट बेंच रांची के आदेश को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कैट के 6 फरवरी 2025 के आदेश को निरस्त करते हुए एनएचएआई के 27 जून 2024 के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसके तहत पूर्ण चंद्र कहिली को डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) के पद से हटाकर टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर वापस कर दिया गया था.


हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मैनेजर (टेक्निकल) पद के लिए सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री आवश्यक शैक्षणिक योग्यता थी. केवल तकनीकी क्षेत्र में लंबे अनुभव के आधार पर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता.

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खंडपीठ के इस आदेश के बाद पूर्ण चंद्र कहिली को अब डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) के बजाय टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर रहना होगा. 
खंडपीठ ने कहा कि कैट ने हाईकोर्ट के 8 सितंबर 2022 के पूर्व आदेश और एनएचएआई के 1996 के भर्ती नियमों की गलत व्याख्या की. 

दरअसल  पूर्ण चंद्र कहिली ने राजस्थान के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ से दूरी शिक्षा के माध्यम से बीटेक की डिग्री प्राप्त की थी. उन्होंने इसी डिग्री के आधार पर 2011 में एनएचएआई के मैनेजर (टेक्निकल) पद के लिए आवेदन किया था. बाद में उन्हें मैनेजर (टेक्निकल) और फिर डिप्टी जनरल मैनेजर (टेक्निकल) के पद पर पदोन्नति मिली थी.


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एनएचएआई ने वर्ष 2021 में उन्हें डिप्टी जनरल मैनेजर के पद से टेक्निकल असिस्टेंट पद पर रिवर्ट कर दिया था. इसके खिलाफ उन्होंने कैट का दरवाजा खटखटाया. कैट ने उनकी याचिका खारिज की थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी. 

हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2022 को प्राकृतिक न्याय के आधार पर रिवर्शन आदेश रद्द कर एनएचएआई को कारण बताओ नोटिस देकर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था. इसके बाद एनएचएआई ने उन्हें बहाल कर शो-कॉज जारी किया और जवाब पर विचार करने के बाद 27 जून 2024 को फिर से रिवर्ट कर दिया.


इस आदेश को पूर्ण चंद्र ने कैट में चुनौती दी. कैट ने 6 फरवरी 2025 को एनएचएआई का आदेश रद्द कर उन्हें डिप्टी जनरल मैनेजर पद पर सभी परिणामी लाभों के साथ बहाल करने का निर्देश दिया था. इसी फैसले के खिलाफ एनएचएआई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

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