'मेरा बेटा देशभक्त था। मुझे पैसे और नौकरी का कोई लालच नहीं है। मुझे सम्राट चौधरी पर भरोसा है। खुलेआम घूम रहे सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल में डाला जाए और कोर्ट उन्हें फांसी की सजा दे। इससे बढ़कर एक बूढ़ी मां को और क्या न्याय मिल सकता है।
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मेरा बेटा लोगों के खातिर शहीद हो गया। सम्राट सरकार मेरे बेटे को 15 अगस्त के अवसर पर शहीद का दर्जा दे। इसके साथ ही विस्थापितों के लिए उचित व्यवस्था कर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।'
भोजपुर के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की मां आशा देवी ने दैनिक भास्कर से ये बातें कही है। दरअसल, एनकाउंटर मामले में चल रही न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट गुरुवार को बिहार सरकार को सौंप दी गई है।
न्यायिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया X पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया। इसके बाद भरत की मां आशा देवी ने अपना पक्ष रखा।
24 जुलाई को भरत तिवारी की मां, बहन और भाभी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर न्याय की मांग की थी।
गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के दफ्तर पहुंचा था भरत का परिवार
गुरुवार को ही भरत तिवारी का पूरा परिवार पटना में न्यायिक जांच आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC ) के दफ्तर पहुंचा था। NHRC में भरत तिवारी के परिवार को जानकारी मिली कि एनकाउंटर मामले में अब तक 2000 से अधिक लोगों ने आरोपी एसडीएम, एसडीपीओ समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
NHRC के पटना स्थित कार्यालय में भरत तिवारी की मां आशा देवी ने संबंधित सभी फाइलों पर हस्ताक्षर किए हैं।

भरत की मां बोली- सरकार की घोषणा ठीक है, लेकिन मांगों को पहले पूरा करें
भरत की मां आशा देवी ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जो ऐलान किया है, वह अच्छी बात है। लेकिन जो हमारी मांगे हैं पहले उसे पूरा किया जाए। मेरे बेटे को मारने वाले SDM, SDPO, थानाध्यक्ष समेत 11 आरोपियों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। इसके बाद उन्हें फांसी की सजा दी जाए। हमारी मांगे पूरी होने के बाद परिवार सम्राट चौधरी के फैसले पर विचार विमर्श करेगी।
उन्होंने कहा कि अभी तक इस कांड में सिर्फ एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी हुई है। अब तक इस कांड का सबसे बड़ा आरोपी खुलेआम बाहर घूम रहा है। इन लोगों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द होनी चाहिए।
घटना के दिन तीन महिला पुलिसकर्मियों ने मेरे और मेरी बहू के साथ मारपीट की थी, उनकी भी गिरफ्तारी होनी चाहिए। घटना के दिन एसडीएम संजीत कुमार मौके पर मौजूद था। उसकी वहां क्या ड्यूटी थी?

विस्थापितों के बीच भरत तिवारी। -फाइल फोटो
भरत के भाई चंदन तिवारी ने कहा- सरकार बैकफुट पर आई, परिवार को न्याय मिले
भरत के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि सम्राट चौधरी का यह फैसला सराहनीय है। सरकार बैक फुट पर आ चुकी है। मेरे परिवार को सबसे पहले न्याय मिलना चाहिए। आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। इसके बाद ही सरकार के फैसले को मंजूर करेंगे। परिवार को पैसे और नौकरी की कोई जरूरत नहीं है...बस एक बूढ़ी मां और एक भाई को न्याय मिल जाए।
उन्होंने कहा कि बाहर घूम रहे आरोपियों को देखकर परिवार को दुख हो रहा है। उन्हें सलाखों के पीछे देखकर ही संतुष्टि मिलेगी। सभी की गिरफ्तारी होने के बाद पूरा परिवार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलेगा। मुख्यमंत्री ने जब मान लिया है कि गलती हुई है, तब जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए।
चंदन तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार ने भी कहा है कि किसी भी आरोपियों को छोड़ा नहीं जाएगा। उनकी गलती की सजा जरूर मिलेगी। मुझे पता नहीं था कि भरत भईया के चाहने वाले इतने हैं। 2000 से ज्यादा कॉपियां मानवाधिकार विभाग के कार्यालय में पड़ी हुई थी।

भरत की भाभी बोलीं- कातिलों को सजा होने के बाद हम कोई फैसला लेंगे
भरत की भाभी सुमन देवी ने कहा कि मेरे देवर के कातिलों को सजा होने के बाद ही परिवार नौकरी लेने पर विचार करेगी। मेरे देवर की हत्या हुई है। सरकार उसको शहीद का दर्जा देते हुए स्मारक बनवाए।
उन्होंने मांग की है कि 15 अगस्त के अवसर पर भरत को शहीद का दर्जा मिले। क्योंकि भरत एक क्रांतिकारी थे। उन्हें देशद्रोहियों ने मिलकर मार दिया।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग में आशा देवी, सुमन देवी, चंदन तिवारी समेत करीब 10 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए थे।
न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सम्राट सरकार की घोषणा के मायने
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच कर रही न्यायिक जांच आयोग की ओर से सब्मिट किए गए अंतरिम रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का फैसला केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है।
न्यायिक जांच आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान ये संकेत देता है कि सरकार ने पुलिसिया कार्रवाई में हुई चूक को गंभीरता से लिया है।
सरेंडर के बाद एनकाउंटर किए जाने के आरोपों को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर जो गंभीर सवाल उठे थे, सरकार का यह फैसला उन सवालों के बीच पीड़ित परिवार के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़ी तीन तस्वीरें देखिए

17 जून को एनकाउंटर से ठीक पहले पुलिस के सामने खड़ा भरत तिवारी।

17 जून की सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट पर भरत तिवारी ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था।

16 जून को पुलिस जब भरत भूषण तिवारी को समझाने पहुंची तो उसने पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तान दी।
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब तक एक की गिरफ्तारी
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब तक सिर्फ एक गिरफ्तारी हुई है। भोजपुर पुलिस ने एनकाउंटर में शामिल STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया है।
तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सस्पेंड हो चुके हैं। राजेश शर्मा को पटना में मद्य निषेध का डीएसपी बनाया गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भरत तिवारी के परिवार की मुलाकात के बाद उन्हें दोबारा लाइन क्लोज कर दिया गया था।
वहीं, जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार को भी उनके पद से हटाकर पटना मुख्यालय अटैच कर दिया गया था।