फ्लाईदुबई की फ्लाइट संख्या 1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर हमले के मामले की जांच NIA करेगी. आरोप है कि 30 सितंबर 2026 को उड़ान के दौरान ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने विमान को हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश में कैप्टन पर हमला किया था.

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फ्लाईदुबई फ्लाइट में पायलट पर हमले की जांच करेगी NIA.(Photo-ITG)

फ्लाईदुबई फ्लाइट में पायलट पर हमले की जांच करेगी NIA.(Photo-ITG)

फ्लाईदुबई की फ्लाइट संख्या 1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी. केंद्र सरकार ने एजेंसी को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है. आरोप है कि विमान के ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने फ्लाइट को हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश के दौरान कैप्टन पर हमला किया था.

केंद्र सरकार को मिली जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की यह फ्लाइट 30 सितंबर 2026 को सुबह 7:05 बजे दुबई से रवाना हुई थी. विमान में 174 यात्री और क्रू के 6 सदस्य सवार थे. भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार और ओमानी फर्स्ट ऑफिसर विमान उड़ा रहे थे. सुबह करीब 9:21 बजे जॉर्डन और सऊदी अरब की सीमा के पास विमान तेजी से नीचे आने लगा और फिर सऊदी हवाई क्षेत्र की ओर मुड़ गया.

यात्रियों के मुताबिक, उड़ान के दौरान ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर दिया. आरोप है कि वह विमान को हाईजैक करने या उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहा था. इस दौरान यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने उसे काबू कर लिया. हमले में कैप्टन के सिर और हाथों पर गहरे कट लगे.

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इसके बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के अन्य पायलटों ने कमान संभाली और विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर उतार दिया. विमान की लैंडिंग सुबह 10:45 बजे हुई. इसके बाद सऊदी अधिकारियों ने ओमानी फर्स्ट ऑफिसर को गिरफ्तार कर लिया.

NIA को सौंपी गई जांच

केंद्र सरकार के मुताबिक, इस मामले में एंटी हाईजैकिंग एक्ट, 2016 की धारा 3 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 16 और धारा 15(1)(a) के तहत अपराध बनते हैं. ये राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत निर्धारित अपराधों में शामिल हैं. सरकार ने मामले की गंभीरता, इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों और किसी बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत को देखते हुए जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है. केंद्र ने एजेंसी को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है.

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