By Oneindia Staff

Time Published: Sunday, August 16, 2026, 0:00 [IST]

बिहार की राजनीति में कुछ चेहरे मंच पर दिखाई देते हैं और कुछ चेहरे मंच तैयार करते हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की शानदार वापसी के पीछे ऐसा ही एक नाम रहा - मनीष कुमार। जेडीयू के राज्य महासचिव और मुख्यालय प्रभारी के तौर पर मनीष ने पार्टी की IT और सोशल मीडिया मशीनरी को एक संगठित चुनावी हथियार में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

"25 से 30, फिर से नीतीश" जैसे विश्वसनीय आह्वान ने चुनावी राजनीति के पुराने नारे को डिजिटल भाषा दी। मनीष कुमार और उनकी टीम ने गीतों, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट वीडियो, ग्राउंड कंटेंट और तेज डिजिटल कम्युनिकेशन के जरिए नीतीश के विकास, स्थिरता और निरंतरता के संदेश को मतदाताओं तक पहुंचाया। रिपोर्टों के मुताबिक, विधानसभा स्तर के ट्रेंड, सेंटिमेंट और स्थानीय मुद्दों को डिजिटल वाररूम में लगातार ट्रैक किया गया।

Bihar Politics - Nishant Kumar and Manish Kumar

लेकिन मनीष कुमार की कहानी केवल 2025 की चुनावी जीत तक सीमित नहीं है। बिहार की राजनीति फिलहाल ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है। नीतीश कुमार के बाद कौन? इस सवाल के बीच निशांत कुमार तेजी से जेडीयू के अगले राजनीतिक चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। जून 2026 में पार्टी की बैठकों में नेताओं ने सार्वजनिक रूप से निशांत को जेडीयू का "भविष्य" बताया और उनके लिए बड़ी भूमिका की मांग की।

निशांत की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती भी यहीं से शुरू होती है। उन्हें केवल नीतीश कुमार का बेटा नहीं, बल्कि अपने काम के आधार पर नेता के रूप में स्थापित होना होगा। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनकी प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाओं को आम आदमी तक पहुंचाने की बताई गई है। हालिया बयानों में उन्होंने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को ज्यादा सुलभ बनाने पर जोर दिया है।

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यहीं मनीष कुमार जैसे पर्दे के पीछे काम करने वाले रणनीतिकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। चुनावी राजनीति में किसी नेता की छवि अचानक नहीं बनती। उसके पीछे संदेश, भाषा, दृश्य, उपलब्धियों का चयन और जनता की प्रतिक्रिया को समझने की लगातार प्रक्रिया होती है।

निशांत कुमार के लिए भी यही मॉडल तैयार होता दिख रहा है-नीतीश की विरासत को दोहराना नहीं, बल्कि उसे अगली पीढ़ी की भाषा में पेश करना। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करीबी सहयोगी रहे मनीष कुमार कहते हैं, "निशांत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे बिहार के लोगों की बुनियादी जरूरतों, खासकर स्वास्थ्य और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं को समझने और उन पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में जनता उनके काम को ही उनकी पहचान बनाएगी।"

निशांत कुमार के सामने स्वास्थ्य क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में विकास की अगली कहानी केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रह सकती। अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, डॉक्टर, डायग्नोस्टिक सुविधाएं और गरीब परिवारों के लिए सुलभ इलाज अब राजनीतिक प्रदर्शन के बड़े पैमाने बन रहे हैं। यही वह जगह है जहां "नीतीश मॉडल" की अगली परीक्षा होगी।

नीतीश ने बिहार की राजनीति को सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के सवालों से जोड़ा। अब निशांत के सामने चुनौती है कि वह उसी विरासत को स्वास्थ्य, मानव विकास और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं की नई कहानी में बदलें और अगर निशांत आने वाले वर्षों में बिहार के स्वास्थ्य सुधार का चेहरा बनते हैं, तो मनीष कुमार जैसे रणनीतिकारों की भूमिका केवल उनकी तस्वीर जनता तक पहुंचाने की नहीं होगी। असली चुनौती होगी- काम को कहानी में बदलना और कहानी को जनता के अनुभव से जोड़ना।

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भारत में बेहतरीन सियासी कामयाबी पार्टरनरशीप के नाम रही है। गांधी-नेहरू, अटल-आडवानी, एमजीआर-करुणानिधि, जयललिता-शशिकला, मुलायम-अमर सिंह, मोदी-शाह, नीतीश-ललन जैसे उदाहरण देश भर में मिल जाएंगे। नए राजनीतिक दौर में बिहार को निशांत-मनीष की जोड़ी से भी क्रांतिकारी पाली की उम्मीद होगी। मनीष कुमार 2025 में मनीष ने नीतीश के लिए चुनावी नैरेटिव को धार दे चुके हैं और अब सवाल यह है कि क्या वही रणनीति निशांत कुमार को विरासत की राजनीति से पॉरफॉर्मेंस की पॉलिटिक्स में स्थापित कर पाएगी? बिहार की राजनीति में अगली लड़ाई शायद इसी बदलाव की होगी।