चालू वित्त वर्ष में बैंकों का कर्ज फंसने के मामले बढ़ने की आशंका है. बिना गारंटी वाले रिटेल कर्ज और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को आवंटित कर्ज में जोखिम के कारण निजी बैंकों पर अपेक्षाकृत अधिक दबाव रह सकता है. मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया. रेटिंग एजेंसी इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में निजी बैंकों में कर्ज के एनपीए में बदलने की अपेक्षाकृत ऊंची दर जारी रह सकती है. हालांकि, कर्ज के नुकसान की लागत अनुकूल रहने और ऐतिहासिक स्तरों से काफी नीचे रहने का अनुमान है.

कितना फंस सकता है कर्ज

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी बैंकों के लिए नए एनपीए बनने की दर 0.8 प्रतिशत और निजी बैंकों के लिए 2.5 प्रतिशत रह सकती है. राशि के लिहाज से चालू वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों के नए एनपीए एक लाख करोड़ रुपए रह सकते हैं जबकि प्राइवेट बैंकों के 1.3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज फंसने का अनुमान है. इक्रा के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में निजी बैंकों के कर्ज के डूबने के मामले इसलिए अधिक रहे, क्योंकि उनके कुल कर्ज में बिना गारंटी वाले खुदरा और एमएसएमई ऋणों की हिस्सेदारी ज्यादा है. नए फंसे कर्ज बढ़ने की आशंका के बावजूद रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि अनुकूल ऋण लागत और पर्याप्त पूंजी के समर्थन से बैंकिंग क्षेत्र का लाभ मजबूत बना रहेगा.

ग्रॉस एनपीए रेश्यो बढ़ सकता है

इक्रा ने अनुमान जताया कि सकल एनपीए अनुपात मार्च 2027 तक बढ़कर 1.7-1.8 प्रतिशत हो सकता है, जो जून 2026 में 1.7 प्रतिशत था. शुद्ध एनपीए अनुपात 0.4-0.5 प्रतिशत रह सकता है, जबकि जून 2026 में यह 0.4 प्रतिशत था. रेटिंग एजेंसी को वित्त वर्ष 2026-27 में बैंक ऋण वृद्धि 15.1-15.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. इससे 32.3-33.8 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण वितरित हो सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ऋण वृद्धि 15.9 प्रतिशत रही थी. हालांकि, इक्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई का दबाव उसके वृद्धि अनुमान के सामने चुनौतियां पैदा कर सकते हैं. उपलब्ध नकदी का इस्तेमाल होने के बाद घरेलू जमा में मजबूत वृद्धि बनाए रखना भी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बैंकों के लिए महत्वपूर्ण होगा.

बैंकों के ब्याज मार्जिन में सुधार हो सकता है

ब्याज दरों के चक्र में बदलाव से बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन को समर्थन मिल सकता है. एजेंसी के मुताबिक, कर्ज पर ब्याज दरें बैंक जमा पर ब्याज की दरों के मुकाबले तेजी से बदल सकती हैं, जिससे बैंकों के ब्याज मार्जिन में सुधार हो सकता है. इक्रा ने अलग से जारी एक अनुमान में कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की प्रबंधन-अधीन परिसंपत्तियां वित्त वर्ष 2026-27 में 15-17 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027-28 में 14-16 प्रतिशत बढ़ सकती हैं. हालांकि, एनबीएफसी की उधारी लागत बढ़ने की आशंका है. वित्त वर्ष 2026-27 में उनके औसत कोष की लागत 0.10-0.20 प्रतिशत बढ़ सकती है. वृद्धि और मौजूदा या परिपक्व हो रहे कर्ज के पुनर्वित्त के लिए एनबीएफसी तथा आवास वित्त कंपनियों को इस वित्त वर्ष में 6.9-7.1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की जरूरत होगी.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

2008 से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता, दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

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