Aug 19, 2026 05:36 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • एनएसई आईपीओ का प्राइस बैंड सितंबर की शुरुआत में लॉन्च होने की संभावना है
  • अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले दो हफ्ते में सेबी से आईपीओ की मंजूरी मिल जाएगी
एनएसई के आईपीओ का इंतजार खत्म होने वाला है

एनएसई के आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने वाला है

NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई के आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने वाला है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले दो हफ्ते में सेबी से आईपीओ की मंजूरी मिल जाएगी। वहीं, 15 सितंबर के बाद एनएसई अपना IPO लॉन्च कर सकता है। आइए डिटेल में पूरा प्लान जान लेते हैं।

कब तक आएगा प्राइस बैंड?

CNBC-TV18 ने 19 अगस्त को सूत्रों के हवाले से बताया कि एनएसई आईपीओ का प्राइस बैंड सितंबर की शुरुआत में लॉन्च होने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक एनएसई का वैल्यूएशन ₹5.2 लाख करोड़ से ₹5.3 लाख करोड़ के बीच आंका जा रहा है। वहीं, आईपीओ की कीमत ₹2100 से ₹2300 प्रति शेयर के बीच हो सकती है। हाल ही में एनएसई ने अपना ग्लोबल रोड शो भी पूरा किया है।

कौन-कौन बेच रहा हिस्सेदारी?

ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल पर आधारित होगा। इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। इस इश्यू के जरिए शेयरधारक सामूहिक रूप से एनएसई में अपनी करीब छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रमुख हिस्सेदारी विक्रेताओं में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) शामिल है, जो 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। वहीं, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगा। बता दें कि एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि उसकी सब्सिडयरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (1.19 करोड़ शेयर), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्रा. लि. (1.12 करोड़ शेयर), बैंक ऑफ बड़ौदा (1.10 करोड़ शेयर) और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (1.09 करोड़ शेयर) शामिल हैं। हालांकि, एनएसई में सबसे अधिक 10.72 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) इस आईपीओ में कोई शेयर नहीं बेचेगी।

2016 से हो रहा था प्रयास

बता दें कि एनएसई ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी।

को-लोकेशन मामले में एनएसई ने जून, 2025 में सेबी के समक्ष सैटलमेंट आवेदन दायर किया था। इस मामले में कुछ ब्रोकरों पर एक्सचेंज की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष पहुंच प्राप्त करने का आरोप था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद एनएसई ने 2025 में मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिससे उसकी सूचीबद्धता की राह आसान हुई।