प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण को लेकर ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग बुधवार को सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा। इसके आधार पर ही ओबीसी सीटें रिजर्व होंगी और जिलेवार लॉटरी निकाली जाएगी। ये काम 15 अगस्त तक पूरा किया जाना है। सबसे पहले दैनिक भ

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  • आज सरकार को ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग क्या रिपोर्ट देगा; सबसे पहले भास्कर में

प्रधानों के लिए 75 से 80 के बीच सीटें रिजर्व की जा सकती हैं। आयोग ने प्रदेश में ओबीसी की आबादी 3.80 करोड़ मानी है। यानी कि यह आंकड़ा अनुमानित आबादी का 45 प्रतिशत से अधिक है। 14,403 ग्राम पंचायतें, 309 निकायों में 10,245 वार्ड हैं। इन्हीं में से करीब पौने दो हजार के आसपास सीटें रिजर्व करने का प्रस्ताव रहेगा। निकायों के लिए 6 और 9 सितंबर को वोटिंग का प्रस्ताव है। जबकि पंचायतों के लिए 13 अक्टूबर से अलग-अलग चरणों में मतदान कराए जाएंगे।

40% सीटों पर ओबीसी प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में जनरल सीटों पर भी जीते हैं

आयोग ने इससे पहले हुए निकाय और पंचायत चुनावों के आंकड़ों के अध्ययन के अनुसार माना है कि करीब 40 प्रतिशत सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार जीते हैं। हालांकि कई निकायों या बड़े निकायों में ये आंकड़ा 32 से 33 प्रतिशत तक रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि जनरल सीटों पर सर्वाधिक ओबीसी प्रत्याशी जीतते रहे हैं।

21% से कम आरक्षण कई जगह रहेगा

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से मिले दिशा-निर्देशों को ही आधार रखा है। जहां एसटी-एससी की आबादी ज्यादा है और ओबीसी भी हैं, उन जगहों पर ओबीसी का कुल 21 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिलेगा। मेवाड़ के कुछ जिलों, पूर्वी राजस्थान के जिलों सहित प्रदेशभर में कई जगहों पर ऐसे केस देखने को मिलेंगे। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं होगा। पहले के चुनावों में ऐसी तस्वीर रही है।

देरी क्यों : तीन महीने में देनी थी रिपोर्ट... डेढ़ साल लग गए, वह भी कोर्ट की सख्ती के बाद

प्रदेश में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण वर्गीकरण के लिए गठित ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट का पिछले साल से इंतजार था। इस आयोग का गठन 9 मई 2025 को हुआ था और तीन बार इसका कार्यकाल बढ़ाया गया। शुरुआती आदेश में आयोग को 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी थी।

पहली बार कार्यकाल विस्तार दिसंबर 2025 तक किया गया। दूसरा 31 मार्च 2026 तक किया गया। तीसरा 30 सितंबर 2026 तक किया गया। प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव में यह पहला मौका होगा, जब ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी सीटें निर्धारित होंगी और इसके आधार पर ही चुनाव होंगे। उधर, यह भी पहला मौका होगा, जब आयोग ओबीसी अनुमानित जनसंख्या का आंकड़ा इस रिपोर्ट में शामिल करेगा। आयोग ने इसके लिए दो हफ्ते का सर्वे भी परिवारों के बीच किया है, जिसे 51 हजार कार्मिकों ने अंजाम दिया है।

दूसरे राज्यों में स्थानीय चुनावों में आरक्षण वृद्धि के प्रस्ताव दिए गए...

गौरतलब है कि दूसरे राज्यों में स्थानीय चुनावों में आरक्षण वृद्धि की सिफारिश आयोग की ओर से की गई है। इस रिपोर्ट में फिलहाल, इसका खुलासा नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की सिफारिश नहीं की गई है। ऐसे में ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण देने के आसार कम ही हैं।

चुनाव में देरी, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ढाल बना आयोग...

प्रदेश में समय पर चुनाव नहीं हो सके हैं। पंचायत चुनाव डेढ़ साल से पेंडिंग हैं, जबकि निकाय चुनाव एक साल से। इसके लिए राज्य सरकार ने ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने का आधार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रखा था। अब आयोग बुधवार को रिपोर्ट सरकार को देगा। इससे तय है कि अब निर्धारित तिथियों पर चुनाव होंगे।