
Layoff के डर ने बदला जिंदगी का बड़ा फैसलाImage Credit source: x/@JoinBlind
टेक इंडस्ट्री में छंटनी का डर अब सिर्फ नौकरी और कमाई तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर लोगों की प्राइवेट लाइफ और बड़े फैसलों पर भी पड़ने लगा है. Meta की एक महिला कर्मचारी की कहानी ने इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. महिला ने दावा किया है कि कंपनी में नौकरी जाने की लगातार बनी चिंता के कारण उसने फिलहाल मां बनने का फैसला टाल दिया है. महिला ने अपनी पहचान जाहिर किए बिना Blind नाम के प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखी. Blind ऐसा ऑनलाइन फोरम है, जहां वेरिफाइड कर्मचारी गुमनाम तरीके से अपने एक्सपीरियंस शेयर करते हैं. उसने बताया कि Meta में फ्यूचर को लेकर बढ़ती uncertainty ने उसके लिए परिवार शुरू करने जैसे फैसले को भी मुश्किल बना दिया है.
महिला के मुताबिक, हाल ही में पति के साथ हुई बातचीत ने उसे एहसास कराया कि नौकरी की चिंता उनकी जिंदगी को किस हद तक प्रभावित कर रही है. उसने लिखा कि उसने Meta में काम करते हुए बच्चे पैदा करने का विचार छोड़ दिया है. उसकी सबसे बड़ी चिंता कंपनी में होने वाली बार-बार की छंटनी और बदलती प्राथमिकताएं हैं. इसके अलावा, मुआवजे और नौकरी की स्थिरता को लेकर भी उसे भरोसा नहीं है. उसे डर है कि अगर वह अभी मां बनती है तो संभव है कि कुछ समय बाद उसकी नौकरी ही न रहे.
क्यों हो रही है कंपनी में परेशानी?
महिला ने अपनी पोस्ट में कहा कि उसे इस बात की कोई गारंटी नजर नहीं आती कि अगले साल तक भी वह Meta में काम कर रही होगी. ऐसे में मैटरनिटी लीव के बाद वापस नौकरी पर लौटने की स्थिति तक नौकरी सुरक्षित रहेगी, इसकी उम्मीद करना भी उसके लिए मुश्किल है. यही uncertainty उसके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है. वह मां बनना चाहती है, लेकिन नौकरी को लेकर लगातार बना डर उसे यह कदम उठाने से रोक रहा है. मामला सिर्फ पैसों का भी नहीं है. महिला ने इस बात की चिंता जताई कि समय उसके फेवर में नहीं है.

उसने अपनी पोस्ट में लिखा कि उसकी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ तेजी से आगे बढ़ रही है. यानी अगर वह लंबे समय तक इंतजार करती रही, तो हो सकता है कि बाद में उसके पास मां बनने का विकल्प ही न बचे. ऐसे में उसके मन में यह सवाल भी है कि कहीं नौकरी खोने का डर उसे जिंदगी के सबसे अहम फैसलों में से एक से तो वंचित नहीं कर देगा.
महिला की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मुद्दे पर जमकर प्रतिक्रिया दी. कुछ लोगों ने कहा कि नौकरी की असुरक्षा लंबे समय से लोगों के प्राइवेट फैसलों को प्रभावित कर रही है और यही कम होती जन्मदर के पीछे एक वजह हो सकती है. वहीं, कुछ यूजर्स ने कहा कि बड़ी टेक कंपनी की अच्छी सैलरी वाली नौकरी जाने का असर काफी गंभीर हो सकता है. समान वेतन और सुविधाओं वाली दूसरी नौकरी तुरंत मिल जाए, यह जरूरी नहीं है.
यह भी पढ़ें: फाउंडर ने डिग्री और एक्सपीरियंस नहीं, हुनर पर किया भरोसा, टैक्सी ड्राइवर 10 साल में बना बड़ा अधिकारी
हालांकि, कई लोगों ने महिला को यह भी सलाह दी कि उसे अपने जीवन का इतना महत्वपूर्ण फैसला सिर्फ कंपनी की नीतियों या नौकरी की चिंता के आधार पर नहीं लेना चाहिए. एक यूजर ने कहा कि किसी भी संगठन में कर्मचारी आखिरकार एक संख्या की तरह हो सकता है और कंपनी के फैसलों पर उसका नियंत्रण नहीं होता.
यहां देखिए पोस्ट
If your job makes you postpone life, is the TC worth it? pic.twitter.com/i7xchsaRkM
— Blind (@JoinBlind) August 6, 2026

आयुष कुमार
आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.<p></p> अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. <p></p>फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.
Read More