Published: Thursday, July 16, 2026, 16:37 [IST]
Rath Yatra Pakistan: आज पूरी दुनिया में महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा का पर्व मनाया जा रहा है। वहीं पाकिस्तान में भी एक धार्मिक आयोजन के तहत, सिंध प्रांत की राजधानी कराची में सालाना जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली गई। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदू समुदाय के सैकड़ों लोगों ने इस यात्रा में भाग लिया। जैसे ही सजाया गया रथ कराची की सड़कों से गुजरा, कई राहगीर इस यात्रा को देखने के लिए रुक गए। श्रद्धालु इस दौरान नाच रहे थे और भगवान जगन्नाथ की धुन में रमकर हरे कृष्ण का जाप व भजन गा रहे थे।
माथे पर तिलक-हाथ में पाकिस्तानी झंडा
इस यात्रा में कुछ लोग हिन्दू धर्म के प्रतीकों के साथ-साथ पाकिस्तानी झंडे भी हाथो में थामे हुए थे, जो उनकी नागरिक पहचान को बता रहा था। इस आयोजन के वीडियो 'हिमेश चौहान ऑफिशियल' यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए हैं, जो स्थानीय हिंदू समुदाय की भागीदारी को दिखाते हैं।
कौन-कौन से मंदिर जुड़े हैं रथयात्रा से?
पाकिस्तान का हिंदू समुदाय हर साल इस जगन्नाथ रथ यात्रा को मनाता है, जिसमें सबसे बड़ा जुलूस कराची के श्री स्वामीनारायण मंदिर से शुरू होता है। सैकड़ों श्रद्धालु फूलों से सजे रथ को खींचने, प्रार्थना करने, भजन गाने और भगवान जगन्नाथ को समर्पित धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए इकठ्ठे होते हैं। इसके साथ ही पास के मारी माता मंदिर के सदस्य भी इस उत्सव में शामिल होते हैं, जिससे यह आयोजन पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं का एक प्रतीक बनता है। इस जुलूस के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं और पूरे क्षेत्र के दर्शको का ध्यान खींचते हैं।
140 साल पुराने स्वामीनारायण मंदिर का महत्व
कराची के एम।ए। जिन्ना रोड पर स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर 140 साल से भी ज्यादा पुराना है और पाकिस्तान में सबसे महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर परिसरों में से एक माना जाता है। साल 1947 में भारत के विभाजन के दौरान, इस मंदिर परिसर ने भारत प्रवास करने वाले लोगों के लिए एक शरणार्थी शिविर के रूप में काम किया था।
जिन्ना ने भी किया था मंदिर का दौरा
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी उस ऐतिहासिक दौर में इस स्थल का दौरा किया था। आज यह मंदिर न केवल सालाना जगन्नाथ रथ यात्रा बल्कि साल भर अन्य प्रमुख हिंदू त्योहारों की मेजबानी करने वाला एक मुख्य केंद्र बना हुआ है, जिससे यहां की धार्मिक गतिविधियों का संचालन होता है। इन गतिविधियों से सांस्कृतिक धरोहर का मूल्य और बढ़ जाता है।
सार्वजनिक समारोह और धरोहरों का संरक्षण
हालांकि पाकिस्तान में हिंदुओं के सार्वजनिक उत्सव तुलनात्मक रूप से कम देखने को मिलते हैं, लेकिन देश का हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय कई ऐतिहासिक मंदिरों में अपने प्रमुख धार्मिक त्योहारों को लगातार मनाता आ रहा है। इस प्रकार की यात्राएं क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने में मददगार साबित हो रही हैं, जिसे देखने दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं।
आने वाले समय में इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण् हो जाएगा ताकि सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके। इस पूरे आयोजन ने दोनों देशो के नागरिकों के बीच भी सोशल मीडिया के माध्यम से एक पॉजिटिव माहौल बना सके। कुल मिलाकर पुरी से लेकर पाकिस्तान तक जगन्नाथ जी के भक्तों ने बड़े स्तर पर इस उत्सव को सेलिब्रेट किया।
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