परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक की समस्या को लेकर सियासी बयानबाजियां तेज हैं। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मंगलवार को संसद में पास हुए संशोधित विधेयक पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से मांग की कि केवल सजा और जुर्माने की बात नहीं, बल्कि पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।



आशुतोष रांका ने क्या कहा?


आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो जारी करते हुए सवाल उठाया, क्या हम सच में पेपर लीक रोकने की कोशिश कर रहे हैं?



उन्होंने कहा, संसद में जो विधेयक पास हुआ है, उसमें एक बड़ी खामी है। आप पेपर लीक होने के बाद की सारी बातें कर रही हैं, चाहे वो फास्ट ट्रैक कोर्ट हों, सजा या जुर्माना हो। लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है, इसके बारे में आज भी कोई बात नहीं हुई।

विज्ञापन


Are we really trying to stop paper leaks? pic.twitter.com/OSsutev9AK

— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 29, 2026

विज्ञापन



सीजेपी नेता ने तर्क दिया कि जब तक परीक्षा व्यवस्था की जड़ में बदलाव नहीं होंगे, तब तक लीक की घटनाएं नहीं रुकेंगी।



किन पांच सूत्रीय मांगों का जिक्र किया?


उन्होंने पांच सूत्रीय मांग का जिक्र करते हुए कहा, जब तक आप राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार की बात नहीं करेंगे, परीक्षा कार्यक्रम और कैलेंडर में पारदर्शिता की बात नहीं करेंगे और पाठ्यक्रम में पारदर्शिता की बात नहीं करेंगे, जब तक कोचिंग सेंटर के बारे में बात नहीं करेंगे, डिजिटल जांच की बात नहीं करेंगे। पूरे परीक्षा तंत्र की शुरू से अंत तक जांच नहीं करेंगे और उस प्रक्रिया को मजबूत नहीं बनाएंगे। परीक्षा व्यवस्था के ढांचे को ठीक करने की बात नहीं करेंगे, तब तक पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं होने वाला है।



ये भी पढ़ें: PM Modi Video Row: वीडियो ब्लॉक होने के बाद मेटा ने दिया सरकार को भरोसा, सरकार क्यों नहीं संतुष्ट?



रांका ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल उस हिस्से को संबोधित कर रही है कि पेपर लीक के बाद क्या होगा। बात इस पर भी करनी होगी कि पेपर लीक को कैसे रोका जाए।



उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा समेत सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बातचीत करे। उन्होंने कहा, आप हमारा पांच-बिंदुओं वाली मांग देखिए। छात्रों, शिक्षाविदों, और साइबर समेत सभी तरह के विशेषज्ञों से बात कीजिए। सरकार जल्दबाजी में फैसले न ले, क्योंकि यह देश के बच्चों के भविष्य का सवाल है।