Parenting Tips: हर टैंट्रम को जिद समझने के बजाय उसके पीछे की भावना समझना बच्चे को अपनी भावनाएं संभालना सिखा सकता है। बच्चे को अपनी बात को सही शब्दों में जाहिर करना सीखाने के लिए जानें 5 आसान तरीके।

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बच्चे का टैंट्रम जिद नहीं, इन 5 बातों का हो सकता है संकेत (AI generated)

  • Published: 11 Sep 2026, 02:36 PM IST
  • Last Updated: 11 Sep 2026, 02:36 PM IST

Parenting Tips: छोटे बच्चे हमेशा यह नहीं बता पाते कि उन्हें गुस्सा, दुख, डर या निराशा किस वजह से हो रही है। ऐसे में उनकी भावनाएं कई बार रोने, चिल्लाने, चीजें फेंकने या जिद करने के रूप में सामने आती हैं। ऐसे समय पर माता-पिता का शांत रहना और पहले बच्चे की बात समझने की कोशिश करना जरूरी है।

बच्चे को अपनी भावनाओं के लिए सही शब्द मिलते हैं, तो धीरे-धीरे वह अपनी बात व्यवहार के बजाय शब्दों में बताना सीख सकता है। जानें बच्चों के गुस्से और रोने को समझने के 5 आसान तरीके।

1. पहले समझें कि बच्चा परेशान क्यों है
बच्चे कई बार अपनी बात शब्दों में नहीं बता पाते और गुस्सा या रोने के जरिए अपनी परेशानी जाहिर करते हैं। ऐसे में डांटने के बजाय पूछें कि उसे किस बात से बुरा लगा।

2. भावनाओं का नाम बताएं
बच्चे को समझाएं कि वह गुस्सा, दुख, डर या निराशा में से क्या महसूस कर रहा है। इससे उसे अपनी भावनाओं को पहचानने और आगे चलकर शब्दों में बताने में मदद मिल सकती है।

3. गुस्से में लंबा लेक्चर न दें
जब बच्चा बहुत गुस्से में हो, तब उसे लंबी बातें समझाने के बजाय पहले शांत होने का समय दें। कम शब्दों में उसे भरोसा दिलाएं कि आप उसकी बात सुन रहे हैं।

 पहले समझें कि बच्चा परेशान क्यों है
पहले समझें कि बच्चा परेशान क्यों है

4. भावना गलत नहीं, गलत व्यवहार जरूर है
गुस्सा या दुख महसूस करना गलत नहीं है, लेकिन मारना, चीजें फेंकना या किसी को नुकसान पहुंचाना सही नहीं। बच्चे को प्यार से दोनों के बीच का फर्क समझाएं।

5. हर जिद पूरी न करें
बच्चे को शांत करने के लिए हर बार उसकी मांग मान लेना सही तरीका नहीं है। उसकी भावना को समझें, लेकिन जरूरत पड़ने पर प्यार से अपनी सीमा भी तय करें।

टैंट्रम के समय याद रखें ये बातें

  • पहले बच्चे को सुनें, फिर समझाएं।
  • खुद भी शांत रहने की कोशिश करें।
  • बच्चे की भावनाओं को नजरअंदाज न करें।
  • गलत व्यवहार पर साफ सीमा तय करें।
  • बच्चा शांत होने के बाद उससे बात करें।

बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने और सही तरीके से जाहिर करने का मौका देना उनकी भावनात्मक समझ विकसित करने में मदद कर सकता है। माता-पिता का व्यवहार भी इसमें अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि बच्चे अपने आसपास के बड़ों से भावनाओं को संभालने का तरीका सीखते हैं।

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