कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान संसद की सुरक्षा व्यवस्था सुर्खियों में आ गई. जैसे ही प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से रेल भवन की ओर बढ़े, संसद की सुरक्षा में तैनात सभी सुरक्षाकर्मी हाई अलर्ट पर आ गए. आनन-फानन में संसद के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए. सुरक्षा के लिए जिम्मेदार क्विक रिस्पांस टीम (QRT) भी तुरंत एक्टिव हो गई और जवानों ने अपनी-अपनी पोजिशन संभाल ली. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

संसद की सुरक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा मॉर्डन और स्ट्रॉन्ग हो चुकी है. खासकर 2001 के संसद हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए. अब संसद की सुरक्षा सिर्फ हथियारबंद जवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हाई-टेक निगरानी प्रणाली, बायोमेट्रिक एंट्री, सीसीटीवी नेटवर्क, विस्फोटक पहचान उपकरण, दमकल इकाइयां और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी शामिल हैं. संसद सत्र के दौरान सुरक्षा और भी सख्त कर दी जाती है.

संसद की सुरक्षा से जुड़ी बड़ी बातें-

  • करीब 3,300 CISF जवान संसद परिसर की सुरक्षा में तैनात रहते हैं.
  • क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करती है.
  • दमकल और आपदा राहत दल भी संसद परिसर में हर समय मौजूद रहते हैं.
  • संसद सत्र और बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा कई गुना बढ़ा दी जाती है.

3300 सुरक्षाकर्मी होते हैं तैनात

जंतर-मंतर या आसपास किसी बड़े प्रदर्शन के समय अतिरिक्त बल तैनात किया जाता है ताकि किसी भी स्थिति को रोका जा सके. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) संसद परिसर की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी संभालता है. करीब 3,300 सुरक्षाकर्मी अलग-अलग शिफ्ट में तैनात रहते हैं, जिनमें कमांडो, दमकलकर्मी, आपदा राहत दल और विशेष प्रतिक्रिया देने वाली टीमें भी शामिल हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि संसद की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और इसमें कौन-कौन सी एजेंसियां अहम भूमिका निभाती हैं.

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सुरक्षा में कौन-कौन रहता है तैनात? (Getty Image)

जंतर-मंतर पर CJP का प्रोटेस्ट

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन चल रहा है और प्रदर्शनकारी ‘चलो संसद’ मार्च की भी कोशिश कर रहे हैं. इसे देखते हुए संसद भवन के आसपास सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है. जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात हैं. इन घटनाओं के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर संसद की सुरक्षा कौन करता है, वहां कितने जवान तैनात रहते हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कैसी तैयारी रहती है.

संसद की सुरक्षा किसके जिम्मे है?

राज्यसभा सचिवालय की पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) संसद भवन परिसर की सुरक्षा का अहम जिम्मा संभालती है. राज्यसभा सचिवालय के डायरेक्टर (सिक्योरिटी) और स्पेशल डायरेक्टर (सिक्योरिटी) राज्यसभा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते हैं. वहीं, लोकसभा सचिवालय के जॉइंट सेक्रेटरी (सिक्योरिटी) संसद परिसर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था के समन्वय और संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं.

संसद की इन-हाउस सुरक्षा एजेंसी

उनके नेतृत्व में पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस, दिल्ली पुलिस, पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर संसद की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं. पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस संसद की अपनी इन-हाउस सुरक्षा एजेंसी है.

इसका मुख्य काम सांसदों, वीआईपी-वीवीआईपी, संसद भवन की सभी इमारतों और परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा करना है. साथ ही, संसद परिसर में आने वाले हर व्यक्ति, वाहन और सामान की जांच, पहचान और प्रवेश को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी इसी एजेंसी के पास होती है.

इसके लिए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और सख्त एक्सेस कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि केवल ऑथराइज्ड लोगों और वाहनों को ही परिसर में प्रवेश मिल सके. संसद की सुरक्षा संभालने के लिए लगभग 3,300 जवान तैनात किए गए हैं. इनमें सामान्य सुरक्षा कर्मियों के अलावा प्रशिक्षित कमांडो, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी निगरानी टीम भी शामिल होती है.

संसद के अंदर दी गई ट्रेनिंग (In-House)

2021 में संसद सुरक्षा कर्मियों के लिए 256 ट्रेनिंग स्लॉट ऑर्गेनाइज किए गए. इनमें उन्हें कई तरह की जरूरी ट्रेनिंग दी गई, जैसे-

  • तनाव से कैसे निपटें (Stress Management)
  • आग, भूकंप और दूसरी आपदाओं के समय क्या करना है (Disaster Management)
  • काम करने की क्षमता और प्रोफेशनल स्किल बढ़ाने की ट्रेनिंग
  • भारतीय और विदेशी भाषाओं का ऑनलाइन प्रशिक्षण
  • सांसदों और संसद की कार्यप्रणाली की जानकारी
  • सदन में हंगामे या विशेष परिस्थितियों में मार्शलों की भूमिका
  • प्राथमिक उपचार (First Aid) की ट्रेनिंग
  • इसके अलावा सुरक्षा कर्मियों की फिटनेस और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए फिजिकल कंडिशनिंग प्रोग्राम (PCP) भी आयोजित किया गया.

बाहरी एजेंसियों के साथ ट्रेनिंग

संसद सुरक्षा कर्मियों ने 55 ट्रेनिंग स्लॉट बाहरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ भी पूरे किए, इनमें शामिल थे-

  • NSG (मानेसर) में सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशन से जुड़ी फील्ड ट्रेनिंग.
  • CISF की National Industrial Security Academy (हैदराबाद) में शुरुआती सुरक्षा प्रशिक्षण.
  • North Eastern Police Academy (मेघालय) में नेतृत्व (Leadership) विकसित करने की ट्रेनिंग.
  • इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा बम और IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की पहचान और उनसे सुरक्षित तरीके से निपटने का प्रशिक्षण.

2021 में संसद सुरक्षा कर्मियों ने 311 ट्रेनिंग स्लॉट पूरे किए, ताकि सभी किसी भी सामान्य या आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपट सकें.

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संसद पर सख्त पहरा (Getty Image)

क्या होती है क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT)?

क्विक रिस्पॉन्स टीम यानी QRT संसद की सबसे अहम सुरक्षा इकाइयों में से एक है. इसका काम किसी भी आपात स्थिति में बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचना और हालात को नियंत्रित करना होता है. चाहे संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना हो, सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश हो या किसी तकनीकी कारण से अलर्ट जारी हो, QRT कुछ ही मिनटों में सक्रिय हो जाती है. इसके जवान विशेष हथियारों और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस होते हैं.

दमकल और आपदा राहत दल भी रहते हैं तैनात

संसद परिसर में सिर्फ सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि फायर ब्रिगेड और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम भी हर समय मौजूद रहती है. आग लगने, प्राकृतिक आपदा या किसी दुर्घटना की स्थिति में यही टीमें सबसे पहले कार्रवाई करती हैं. हाल ही में तेज हवा के कारण बूम बैरियर गिरने के बाद भी सुरक्षा और तकनीकी टीम ने तुरंत स्थिति को सामान्य कर दिया.

संसद सुरक्षा में कौन-कौन सी एजेंसियां ​​शामिल हैं?

  1. संसद सुरक्षा सेवा
  2. दिल्ली पुलिस
  3. संसद ड्यूटी ग्रुप (PDG)
  4. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
  5. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG)
  6. नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF)
  7. क्विक रिस्पॉन्स टीम (QR)
  8. स्पेशल प्रोटेक्शनग्रुप (SPG)

संसद सत्र में क्यों बढ़ जाती है सुरक्षा?

जब संसद का सत्र चलता है, तब प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और कई बड़े अधिकारी संसद भवन में मौजूद रहते हैं. इसलिए सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क रहती हैं. अगर उसी समय जंतर-मंतर या आसपास किसी बड़े संगठन का प्रदर्शन हो, तो संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ा दी जाती है. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग भी की जाती है.

2001 के हमले के बाद क्या बदला?

13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए. संसद परिसर में प्रवेश के नियम सख्त हुए, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी लगाए गए, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू हुआ और हर वाहन व व्यक्ति की कई चरणों में जांच शुरू की गई. समय के साथ इसमें फेस रिकग्निशन, एक्स-रे स्कैनर और अन्य आधुनिक तकनीकें भी जोड़ी गईं.

प्रदर्शन और सुरक्षा के बीच संतुलन

जंतर-मंतर दिल्ली का निर्धारित प्रदर्शन स्थल है, जहां विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना देते हैं. लेकिन जब संसद सत्र चल रहा हो और संसद मार्च जैसी घोषणाएं हों, तब सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार और संसद की सुरक्षा- दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है. इसी वजह से संसद के आसपास सुरक्षा घेरा और ज्यादा मजबूत कर दिया जाता है.

अंकिता

अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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