Aug 15, 2026 11:58 am ISTलाइव हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
पीएचडी कर रहे सूबे के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को बड़ी राहत मिली है। लोकभवन ने ऐसे सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की छूट प्रदान कर दी है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
पीएचडी कर रहे सूबे के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को बड़ी राहत मिली है। लोकभवन ने ऐसे सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की छूट प्रदान कर दी है। इसके लिए बिहार के 211 नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में संविदा पर नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के लिए लोकभवन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पीएचडी कर रहे शिक्षकों को सेवा में आने के साथ अपना शोध कार्य जारी रखने का अवसर दिया गया है।
पिछले दिनों इसको लेकर बड़ी समस्या खड़ी हुई थी। कई सहायक प्राध्यापक इस समय पीएचडी कर रहे हैं। इससे इनके भविष्य को लेकर अनिश्चतता की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। लेकिन, अब लोकभवन ने इसे पूरी तरह खत्म कर दिया है। लोकभवन में 12 अगस्त को सभी संबंधित कुलपतियों की बैठक में इसपर सहमति बनी थी। इसी आधार पर ये दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
तीन विकल्प दिए गए
लोकभवन के निर्देश में पीएचडी कर रहे फेलोशिपधारी शोधार्थियों के लिए तीन विकल्प दिए गए हैं। वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, सीएसआइआर-जूनियर रिसर्च फेलोशिप नियमों के तहत अकादमिक अवकाश ले सकते हैं। दूसरा विकल्प संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में ज्वाइन कर फेलोशिप के साथ पीएचडी छोड़ने का है। तीसरा विकल्प फेलोशिप छोड़कर संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में ज्वाइन कर पीएचडी जारी रखना है। हालांकि तीसरे विकल्प के तहत शोध पर्यवेक्षक और विश्वविद्यालय के संबंधित विभागाध्यक्ष से प्रमाण-पत्र या अंडरटेकिंग देना होगा।
इसमें यह पुष्टि करनी होगी कि शोधार्थी ने स्वीकृत शोध योजना के तहत आवश्यक प्रयोगशाला कार्य, फील्डवर्क या डाटा संग्रह का पर्याप्त हिस्सा पूरा कर लिया है और शोध केंद्र या विभाग में उसकी लगातार मौजूदगी जरूरी नहीं है। दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बाद यदि किसी नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक को अपने पुराने कार्यस्थल, शोध संस्थान या किसी अन्य पेशेवर जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है, तो उन्हें ज्वाइनिंग के लिए समय दिया जाएगा। सत्यापन के दौरान किसी अभ्यर्थी के अयोग्य पाये जाने पर संबंधित दस्तावेजों के साथ मामला बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेजा जा सकेगा।
बिना फेलोशिप वाले शोधार्थियों को भी दी गई रियायत
लोकभवन ने स्पष्ट किया है कि जिन पंजीकृत पीएचडी शोधार्थियों को कोई फेलोशिप नहीं मिल रही है और जिन्होंने निर्धारित कोर्सवर्क व रेजिडेंसी अवधि पूरी कर ली है, उन्हें पीएचडी जारी रखते हुए संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में ज्वाइन करने की अनुमति दी जा सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित नियमों का पालन जरूरी होगा। लोकभवन की ओर से सभी कुलपतियों को निर्देश दिया है कि इन दिशा-निर्देशों की जानकारी सभी संबंधित कॉलेजों को दी जाए और इन्हें समान रूप से लागू किया जाए।
रेजिडेंसी अवधि नहीं तो शोध संग ज्वाइनिंग
जिन शोधार्थियों के पीएचडी नियमों में निर्धारित रेजिडेंसी अवधि नहीं है, उनके लिए भी ज्वाइनिंग के साथ शोध जारी रखने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए शोध पर्यवेक्षक व विभागाध्यक्ष का प्रमाण-पत्र, गैर-शिक्षण अवधि में शोध कार्य पूरा करने व निर्धारित अधिकतम अवधि में पीएचडी पूरी करने जैसी शर्तें लागू होंगी।
लेखक के बारे में
Pankaj Vijay
पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार
शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
15 से अधिक सालों का अनुभव
पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।
विजन
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विशेषज्ञता
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बोर्ड रिजल्ट लाइव कवरेज और शिक्षा एवं रोजगार जगत संबंधी ब्रेकिंग
स्कूलिंग के बाद करियर की राहें
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छात्रों के ज्ञान के लिए रिसर्च बेस्ड और एक्सप्लेनर स्टोरी
