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समांथा के बेबी शावर में हुई खास पूजा, ईशा फाउंडेशन ने कराईं ‘कला आवरण’ रस्म, देखें Photos
साउथ फिल्म इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस समांथा रुथ प्रभु इन दिनों अपनी जिंदगी के बेहद खास फेज को एंजॉय कर रही हैं। एक्ट्रेस जल्द ही मां बनने वाली हैं और पति राज निदिमोरू के साथ अपने पहले बच्चे का स्वागत करने की तैयारी कर रही हैं। इसी बीच समांथा ने अपने बेबी शावर सेरेमनी की कुछ खूबसूरत तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। तस्वीरों में वह राज निदिमोरू के साथ नजर आ रही हैं और इस खास मौके पर निभाई गई पारंपरिक रस्मों के बारे में भी उन्होंने विस्तार से बताया है।
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ईशा फाउंडेशन में हुई खास सेरेमनी
समांथा ने अपने बेबी शावर की झलक ईशा फाउंडेशन से शेयर की है। यह सेरेमनी काफी इंटिमेट रखी गई थी। तस्वीरों में समांथा और राज साथ दिखाई दे रहे हैं। इस खास मौके को सिर्फ एक सामान्य बेबी शावर की तरह मनाने के बजाय पारंपरिक आध्यात्मिक रस्मों के साथ सेलिब्रेट किया गया। समांथा ने बताया कि उन्हें हमेशा से भारतीय परंपराओं और रस्मों के प्रति गहरा सम्मान रहा है। हालांकि वह हर रस्म के पीछे छिपे अर्थ को हमेशा समझ नहीं पाती थीं, लेकिन उन्हें विश्वास रहा है कि मंत्रों, पूजा और प्राचीन परंपराओं के पीछे एक गहरी भावना और एनर्जी होती है।
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पुजारी ने एक-एक रस्म का समझाया मतलब
समांथा ने बताया कि इस सेरेमनी को कराने वाले पुजारी श्रीविद्या उपासक थे। उन्होंने एक्ट्रेस को पूजा में होने वाली हर रस्म और उसके पीछे के महत्व के बारे में समझाया। समांथा के मुताबिक, जैसे-जैसे पुजारी ने हर स्टेप का मतलब बताया, उन्हें महसूस हुआ कि यह पूरी सेरेमनी कितनी सोच-समझकर तैयार की गई है। उनके मुताबिक हर मंत्र का अपना एक उद्देश्य था, हर चढ़ावे का एक अर्थ था और पूजा का हर स्टेप अपनी एक खास जगह रखता था।
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क्या है ‘कला आवरण’ रस्म?
बेबी शावर सेरेमनी में ‘कला आवरण’ यानी ‘श्री कल्पम’ नाम की एक खास रस्म भी की गई। यह श्रीविद्या परंपरा से जुड़ी हुई रस्म है। समांथा ने बताया कि इस रस्म में देवी की 94 कलाओं का सम्मान किया जाता है। इन कलाओं को होने वाली मां के सात चक्रों से जोड़ा जाता है। इस दौरान पवित्र जल और मंत्रों का इस्तेमाल करके इन एनर्जी सेंटर को शुद्ध और एनर्जाइज करने की प्रक्रिया की जाती है। एक्ट्रेस ने बताया कि इस रस्म के जरिए मां के भीतर चेतना की जीवंत ऊर्जा के प्रवाह का आह्वान किया जाता है।
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‘मां को देवी के रूप में सम्मान देना’ समांथा को लगा सबसे खास
समांथा ने बताया कि इस पूरी रस्म में उन्हें सबसे ज्यादा जो बात छू गई, वह थी मां को देखने का नजरिया। उनके मुताबिक इस परंपरा में होने वाली मां को देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्हें एक ऐसी पवित्र रचनाकार के तौर पर देखा जाता है, जिसके जरिए एक नई जिंदगी दुनिया में आने वाली है। समांथा के मुताबिक यह रस्म सिर्फ गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए आशीर्वाद नहीं है, बल्कि उस महिला के लिए भी एक आशीर्वाद है, जो मां बनने के साथ अपनी जिंदगी के एक नए रूप में प्रवेश कर रही है। बता दें, समांथा और राज दिसंबर 2026 में अपने पहले बच्चे का स्वागत करने वाले हैं। हालांकि कपल ने अभी बच्चे की सटीक ड्यू डेट रिवील नहीं की है। दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी और अब शादी के करीब एक साल के भीतर अपने पहले बच्चे का स्वागत करने जा रहे हैं।