Pitru Paksha Rules: इस बार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दौरान कुछ खास भूलकर भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि जो व्यक्ति के काम करता है, दुर्भाग्य उसका पीछा नहीं छोड़ता।

Pitru Paksha Do and Don'ts: श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे काम करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में कुछ कामों को करने से बचना चाहिए नहीं तो जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। आगे जानिए ऐसे ही 10 कामों के बारे में जिन्हें श्राद्ध पक्ष में नहीं करना चाहिए…

1. मांस-मदिरा से रहें दूर

2. बाल और नाखून काटने से बचें

3. किसी को खाली हाथ न लौटाएं

पितृ पक्ष के दौरान यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति भोजन या अन्य किसी इच्छा से हमारे घर आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे कुछ न कुछ जरूर दें। भूलकर भी उसका अनादर न करें।

4. तामसिक भोजन न करें

लहसुन-प्याज सहित कुछ चीजों को तामसिक माना जाता है। इनका उपयोग श्राद्ध के दौरान नहीं करना चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है।

5. स्त्री संग से भी बचें

श्राद्ध पक्ष में स्त्री संग करने से भी बचना चाहिए, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। ऐसा करने से उत्पन्न संतान परेशानियों का कारण बन सकती है।

6. पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं

धर्म ग्रंथों में पेड़े-पौधों को भी पितरों का ही रूप माना गया है, इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। ऐसा करने से भी पितरों को कष्ट होता है।

7. तेल मालिश न करवाएं

पुराणों की मानें तो श्राद्ध पक्ष में बॉडी मसाज या तेल की मालिश नहीं करवानी चाहिए। इन दिनों में पान खाने की भी मनाही है।

8. दूसरे के घर में न करें श्राद्ध

श्राद्ध से जुड़े अनेक नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इनमें से एक नियम ये भी है कि किसी दूसरे के घर पर श्राद्ध नहीं करना चाहिए। नदी, पर्वत, तीर्थ आदि पर श्राद्ध कर सकते हैं।

9. श्राद्ध के लिए कैसा आसन हो?

श्राद्ध करते समय आसान का भी विशेष महत्व है। विद्वानों की मानें तो लोहे के आसन पर बैठकर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए। रेशमी, कंबल, लकड़ी, कुशा आदि के आसन श्रेष्ठ हैं।

10. रात में न करें श्राद्ध

रात को राक्षसी समय माना गया है, इसलिए इस समय श्राद्ध नहीं करना चाहिए। दोनों संध्याओं (सूर्योदय व सूर्यास्त) के समय भी श्राद्ध करने से बचना चाहिए।

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।