आगामी 2027 में उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं, जिसके तुरंत बाद 2028 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और तेलंगाना में चुनाव प्रस्तावित हैं।
80वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2026) पर लाल किले की प्राचीर से दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन वैसे तो चुनावी भाषण के रूप में तैयार नहीं किया गया था, लेकिन इसके प्रमुख विषयों में आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिहाज से गहरा राजनीतिक और सामाजिक संदेश साफ नजर आया।
आगामी 2027 में उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं, जिसके तुरंत बाद 2028 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और तेलंगाना में चुनाव प्रस्तावित हैं। इस विस्तृत चुनावी कैलेंडर से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को अपने भाषण के केंद्र में रखा।
6 करोड़ 'लखपति दीदी' का नया लक्ष्य: महिला केंद्रित बड़ा दांव
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने 3 करोड़ 'लखपति दीदी'- सालाना कम से कम ₹1 लाख कमाने वाली सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाएं, बनाने का अपना पिछला लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।
पीएम ने कहा कि 3 करोड़ और महिलाओं को इस दायरे में लाने से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक "क्रांतिकारी बदलाव" आएगा।
इस योजना के विस्तार को उन्होंने महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और स्थानीय निकायों (पंचायतों व नगर निगमों) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जोड़कर पेश किया।
उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे कृषि और ग्रामीण बहुल राज्यों के चुनाव से पहले महिला कल्याण को केंद्र में रखना राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का वादा किया, जो यूपी, पंजाब, उत्तराखंड के मतदाताओं को सीधे प्रभावित करेगा।
सुरक्षा और 'दिमागी नक्सल' पर कड़ा प्रहार
राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक शांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने वामपंथी उग्रवाद पर एक नया बहस छेड़ दी।
उन्होंने कहा, "हथियारबंद नक्सली भले ही कमजोर पड़ चुके हों या खत्म हो गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अभी भी देश के भीतर हिंसा, अराजकता और अस्थिरता फैलाने के मौकों की तलाश में हैं।"
उन्होंने देशवासियों और युवाओं को इस तरह की वैचारिक उग्रवाद और देश विरोधी ताकतों से सतर्क रहने की हिदायत दी।
इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं (यूक्रेन और पश्चिम एशिया युद्ध) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने अपनी आंतरिक ताकत के दम पर इन संकटों का मुकाबला किया है।
पीएम मोदी ने विकास, युवा, महिलाएं, और सुरक्षा पर जोर देकर चुनावी राज्यों को सकारात्मक संदेश दिए, और विपक्ष को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी कि "दिमागी नक्सलियों" के खिलाफ सतर्क रहें।
युवाओं के लिए बड़ा ऐलान
उन्होंने कहा कि भारत की 140 करोड़ जनसंख्या में युवा सबसे बड़ी ताकत हैं, और उन्हें सिर्फ रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले और वैश्विक नेता बनना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि अगले 1 साल में 1 करोड़ युवाओं को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि भारतीय युवा AI की दुनिया में विश्व स्तर पर नेतृत्व कर सकें।
दूसरा, पीएम मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, JEE, UPSC, आदि) की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महंगी कोचिंग से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ पड़ता है, और इससे बचाने के लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराएगी।
तीसरा, उन्होंने 5-15 साल के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी स्पोर्ट्स टैलेंट हंट अभियान शुरू करने की घोषणा की। इसका लक्ष्य 2036 ओलंपिक की मेजबानी और भारत को मेडल पावरहाउस बनाना है। पीएम ने कहा कि युवाओं को नशा मुक्त रहना चाहिए, और सरकार नशा मुक्ति अभियान चलाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन 2027-28 के चुनावी कैलेंडर से ठीक पहले BJP की रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है, जिसमें महिला + युवा + सुरक्षा + विकास के जरिए चुनावी जीत का फॉर्मूला है।