PM मोदी के दोस्त असगर को वापस मिली हड़पी हुई जमीन, बीजेपी विधायक पर लगाया था कब्जा करने का आरोप

असगरअली वोरा और बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 81 वर्षीय दोस्त असगरअली वोरा के जमीन विवाद पर अपडेट आया है. पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बड़ा मोड़ सामने आया है. 8 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर जमीन मामले में दखल और CBI जांच की मांग करने वाले असगरअली वोरा के मामले में बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने विवादित जमीन से जुड़ी कंस्ट्रक्शन परमिट वापस करने की प्रोसेस शुरू कर दी है. कंपनी ने महापालिका के नगररचना विभाग को लेटर देकर विवादित जमीन से जुड़ी बांधकाम परमिशन यानी CC सरेंडर कर उसे कैंसिल करने की मांग की है. कंपनी ने परमिशन के लिए जमा फीस वापस करने की मांग भी की है.

यह पूरा मामला मौजे नवघर स्थित पुराने सर्वे नंबर 240, नए सर्वे नंबर 185, हिस्सा नंबर 6-ब और 1405 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है. कंपनी के लेटर में जमीन को लेकर चल रहे विवाद का जिक्र किया गया है. कंपनी के मुताबिक, संबंधित जमीन को लेकर रजिस्टर्ड डॉक्यूमेंट के जरिए ट्रांजैक्शन हुआ था और 17 अप्रैल 2026 को महापालिका की ओर से बांधकाम परमिशन जारी की गई थी. लेकिन विवाद सामने आने के बाद अब कंपनी ने बांधकाम परमिशन महापालिका को वापस करने का फैसला लिया है.

पुलिस शिकायत भी वापस लेने की तैयारी

जमीन विवाद के बीच असगरअली वोरा के खिलाफ पुलिस में पहले की गई शिकायत को वापस लेने की प्रोसेस शुरू करने की बात भी सामने आई है. यानी एक तरफ कंपनी बांधकाम परमिशन सरेंडर कर रही है, वहीं दूसरी ओर वोरा के खिलाफ की गई पुलिस शिकायत वापस लेने की तैयारी भी है.

सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़ा है पूरा विवाद

दरअसल, जमीन के मूल मालिक असगर अली वोरा ने अपने बचपन के दोस्त PM नरेंद्र मोदी को सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन और उसके मालिक बीजेपी के मीरा-भाईंदर विधायक नरेंद्र मेहता पर जमीन हड़पने और दबाव बनाने के आरोपों की जानकारी दी थी. विधायक नरेंद्र मेहता पहले भी जमीन से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं. मीरा रोड में बनाए गए आलीशान सेवन इलेवन क्लब में नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने और कुछ जमीन मामलों में भी उन पर आरोप लगते रहे हैं.

PM मोदी से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम

असगरअली वोरा ने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर मामले में दखल की मांग की थी. वोरा और प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित बी. एन. स्कूल में साथ पढ़ाई की थी. प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान वोरा ने बताया था कि उन्होंने 1989 में भाईंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी. उनका आरोप है कि 2011 में स्वयं बिल्डर्स और मेहता की सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया. वोरा के मुताबिक, वह पिछले करीब 15 साल से इस मामले को लेकर अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे हैं.

वोरा ने प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात को पॉजिटिव बताते हुए कहा था कि उन्हें मामले में कार्रवाई की उम्मीद है. इसके बाद सरकारी स्तर पर भी इस मामले में एक्टिविटी तेज हुई. मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में मीटिंग हुई. मीटिंग में असगरअली वोरा, मेहता, मीरा-भाईंदर महानगरपालिका कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा और नगररचनाकार पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे.

मीटिंग में मेहता की ओर से नगररचना विभाग को एक लेटर दिया गया. लेटर में उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और जमीन से जुड़ी मिली बांधकाम परमिशन महापालिका को वापस करने की बात कही है. लेटर के मुताबिक, संबंधित जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी गई थी. अब विवाद के बीच मेहता की ओर से जमीन का कब्जा छोड़ने और बांधकाम परमिशन वापस करने की बात सामने आई है.

विनोद जगदाले

विनोद जगदाले

विनोद जगदाले को 22 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव है. वो मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं. ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए और एक्सक्लूसिव खबरें भी सामने लेकर आए. उनकी पहचान निष्पक्ष, बेबाक और जमीनी पत्रकार के तौर पर की जाती है. विनोद जगदाले 10 से ज्यादा सम्मान से सम्मानित और जनहित की आवाज को मजबूती से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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