PM का विरोध कोई मंत्री कैसे कर सकता है? चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

सुप्रीम कोर्टImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने CEC और ECs एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजने के मामले में बंटा हुआ फैसला सुनाया. अब SC की तीन जजों की बेंच यह तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई पांच जजों की बेंच करे या नहीं. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कई सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से नॉमिनेट किए गए मंत्री से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह उनके फैसले के खिलाफ जाएगा.

जस्टिस दत्ता ने कहा कि कि या इस सिस्टम से जनता में उतना ही भरोसा पैदा होता है जितना किसी निष्पक्ष तीसरे सदस्य के होने पर होता? कुछ शुरुआती बातें जरूरी हैं. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र ECI पर निर्भर करते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा नॉमिनेट किए गए मंत्री से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपने नॉमिनेट करने वाले के ही खिलाफ जाएगा.

जस्टिस दत्ता ने कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी का सिद्धांत उसे प्रधानमंत्री का विरोध करने से रोकेगा. यह सोचना बहुत दूर की कौड़ी है कि काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स (CoM) का हिस्सा कोई मंत्री नेता या सरकार से असहमति वाला रुख अपनाएगा. कैबिनेट मंत्रियों को शामिल करने से वह स्वतंत्र संतुलन नहीं मिल पाता जो एक निष्पक्ष चयनकर्ता से मिलता. यह प्रक्रिया काफी हद तक दिखावटी बनकर रह जाती है.

जस्टिस शर्मा की अलग राय

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मामले में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने अपने साथी जज जस्टिस दीपांकर दत्ता की राय से असहमति जताई है. जस्टिस शर्मा ने कहा कि वह जस्टिस दत्ता की ओर से की गई सभी टिप्पणियों और अपनाए गए तर्क से खुद को सहमत नहीं कर पा रहे हैं. जस्टिस शर्मा का मानना है कि इस मामले में उठाए गए संवैधानिक सवालों पर संविधान पीठ द्वारा विचार किया जाना चाहिए.

उन्होंने बेहद विनम्रता के साथ अपनी असहमति दर्ज करते हुए कहा कि वह अपने साथी न्यायाधीश द्वारा अपनाई गई पूरी तर्क-पद्धति को स्वीकार करने के लिए स्वयं को तैयार नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि दोनों जजों ने मामले को सीजेआई के पास भेजा है और कहा है कि इस मामले पर आगे तीन नहीं, पांच जजों की बेंच सुनवाई करे और निर्णय ले.

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पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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