भारतीय राजनीति में लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहने के बावजूद सोनिया गांधी ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा बेहद सीमित दायरे में रखा. अब करीब छह दशक बाद वह अपनी कहानी को किताब के जरिए सामने लाने जा रही हैं. कांग्रेस की लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी की संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ उनके निजी जीवन, परिवार, रिश्तों और भारतीय राजनीति के उतार-चढ़ाव को एक अलग नजरिए से सामने लाने का दावा करती है.

नवंबर में प्रकाशित होगी संस्मरण पुस्तक

अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से प्रकाशित होने वाली यह किताब 10 नवंबर को पाठकों के बीच आएगी. करीब 544 पन्नों की इस पुस्तक में सोनिया गांधी के जीवन के उन पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है, जो अब तक सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा बहुत कम रहे हैं. 

किताब का केंद्र सिर्फ राजनीति नहीं है. इसमें उनके बचपन, प्रेम, परिवार, व्यक्तिगत दुख और उस परिस्थितियों का जिक्र है, जिन्होंने उन्हें धीरे-धीरे भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के केंद्र तक पहुंचाया.

इटली के छोटे शहर से भारत तक का सफर

सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ और उनका बचपन युद्ध के बाद के दौर में एक साधारण माहौल में बीता. वर्ष 1965 में वह कैम्ब्रिज पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई. उस समय सोनिया मेनिनो 19 वर्ष की थीं और राजीव गांधी जवाहरलाल नेहरू के पोते थे.

यह मुलाकात आगे चलकर एक ऐसे रिश्ते में बदली, जिसने सोनिया गांधी की पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी. विवाह के बाद उनका जीवन भारत और नेहरू-गांधी परिवार से गहराई से जुड़ता चला गया.

परिवार पर हुए हमलों ने बदली जिंदगी

सोनिया गांधी की निजी जिंदगी पर सबसे गहरा असर परिवार में हुई राजनीतिक हत्याओं का पड़ा. वर्ष 1984 में उनकी सास इंदिरा गांधी की हत्या हुई. इसके सात वर्ष बाद 1991 में उनके पति राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई.

इन घटनाओं ने सोनिया गांधी की निजी दुनिया को गहरे सदमे में डाल दिया. किताब में वह बताती हैं कि किस तरह व्यक्तिगत दुख और परिस्थितियों ने उन्हें उस सार्वजनिक जीवन की ओर धकेला, जिससे वह पहले दूरी बनाए रखना चाहती थीं.

निजी जिंदगी को हमेशा रखा था पर्दे में

सोनिया गांधी ने दशकों तक अपनी निजी भावनाओं और पारिवारिक जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा. उनका राजनीतिक व्यक्तित्व अक्सर उनके निजी व्यक्तित्व पर भारी रहा.

अब संस्मरण के जरिए वह उन अनुभवों और भावनाओं को साझा करने की कोशिश कर रही हैं, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक अपने तक सीमित रखा. उनका कहना है कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान अनुभव नहीं रहा, क्योंकि इसके लिए उन्हें लंबे समय से भीतर संजोए अनुभवों और यादों को सामने लाना पड़ा.

2004 का फैसला भी रहेगा खास

सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय 2004 का लोकसभा चुनाव रहा. कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद उनके प्रधानमंत्री बनने की व्यापक चर्चा हुई थी. हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया.

यह फैसला भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा और इससे उनकी राजनीतिक भूमिका को एक अलग पहचान मिली. उन्होंने सत्ता के शीर्ष पद से दूरी बनाते हुए भी राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाई.

छह दशकों के बदलाव की कहानी

‘Belonging: A Journey of Love’ को सिर्फ एक राजनीतिक संस्मरण के रूप में नहीं देखा जा रहा है. यह भारत में करीब छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को एक ऐसे व्यक्ति की नजर से देखने का अवसर भी हो सकता है, जिसने इस पूरी अवधि को बेहद करीब से जिया.

किताब के जरिए सोनिया गांधी अपने परिवार, प्रेम, नुकसान, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्षों को अपनी आवाज में दर्ज कर रही हैं. लंबे समय तक निजी जीवन को सार्वजनिक नजरों से बचाकर रखने वाली सोनिया गांधी का यह संस्मरण उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं पर नई रोशनी डाल सकता है, जिन्हें राजनीति की चकाचौंध के पीछे अक्सर नजरअंदाज कर दिया गया.

यह भी पढ़ें - PM मोदी ने रचा इतिहास, लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार फहराया तिरंगा; बनाया नया रिकॉर्ड