​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले पर IT संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को इसके लिए खुद माफी मांगनी होगी, वर्ना कंपनी का 'सेफ हार्बर' संरक्षण यानी कानूनी सुरक्षा वापस ले लिया जाएगा।

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मेटा ने इस घटना पर खेद जताते हुए माफी की पेशकश की, लेकिन समिति ने इसे अपर्याप्त माना।

  • Published: 03 Aug 2026, 10:23 PM IST
  • Last Updated: 03 Aug 2026, 11:06 PM IST

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा में 'पेपर लीक' रोकने के लिए सख्त कार्रवाई का वादा करते हुए एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो को फेसबुक द्वारा लगभग 5 घंटे के लिए हटा दिया गया था। इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थाई समिति ने निशिकांत दुबे की अध्यक्षता में टेक दिग्गजों केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारियों की बैठक बुलाई। यद्यपि मेटा ने इस घटना पर खेद जताते हुए माफी की पेशकश की, लेकिन समिति ने इसे अपर्याप्त माना।

​5 घंटे तक गायब रहा PM का वीडियो, जुकरबर्ग की व्यक्तिगत माफी की मांग 
भाजपा सांसद और IT समिति के प्रमुख निशिकांत दुबे ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री का वीडियो इस तरह हटाया जाना कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि यह बेहद गंभीर मामला है। मेटा ने हालांकि इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद जताया, लेकिन समिति ने स्पष्ट किया कि सिर्फ कंपनी की औपचारिक माफी काफी नहीं है। समिति की मांग है कि मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग खुद इसके लिए माफी मांगें। इसके साथ ही, चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

​'सेफ हार्बर' संरक्षण छीनने की चेतावनी 
​संसदीय समिति ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मार्क जुकरबर्ग व्यक्तिगत रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो सरकार मेटा को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' की कानूनी सुरक्षा वापस ले सकती है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत सेफ हार्बर क्लॉज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की कानूनी देनदारी से सुरक्षा प्रदान करता है। यदि यह संरक्षण वापस लिया जाता है, तो प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट के लिए Meta सीधे कानूनी रूप से जिम्मेदार होगा।

​एल्गोरिदम पक्षपात और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) पर घेरा 
​बैठक के दौरान समिति ने टेक प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम और उनके प्रभाव पर भी सवाल खड़े किए। निशिकांत दुबे के अनुसार, प्रमुख मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, सपा, आप आदि की कुल एल्गोरिदम व्यूअरशिप 23 मिलियन है, जबकि सड़कों पर उकसाने वाले या गैर-पंजीकृत समूहों की व्यूअरशिप 27 मिलियन तक पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत न हटाने को लेकर भी मेटा व अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों से तीखे सवाल पूछे गए।