Published: Saturday, August 29, 2026, 12:35 [IST]
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आने वाली किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) रिलीज से पहले ही विवाद में आ गई है। मामला किताब की कहानी से ज्यादा उसके भारत में प्रकाशन को लेकर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने दावा किया है कि पेंग्विन पर किताब के कुछ हिस्सों को हटाने का दबाव था।
इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित कब्जे से जुड़े हिस्से शामिल थे। हालांकि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (Penguin Random House India) ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। कंपनी ने साफ किया है कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है और उसने किताब को प्रकाशित करने से इनकार नहीं किया था।
विवाद शुरू कैसे हुआ?
'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव'सोनिया गांधी की संस्मरणात्मक किताब है। इसे अमेरिका में Alfred A Knopf, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का ही एक इम्प्रिंट, 10 नवंबर 2026 को रिलीज करने वाला है। Penguin Random House की आधिकारिक बुक लिस्टिंग में भी किताब की रिलीज तारीख 10 नवंबर दी गई है।
विवाद तब शुरू हुआ, जब रिपोर्ट सामने आई कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इस किताब को प्रकाशित नहीं करेगा। रिपोर्टों में कहा गया कि पांडुलिपि के एक हिस्से में कुछ एडिटोरियल बदलाव और कटौती सुझाई गई थी, जिन्हें सोनिया गांधी ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भारत में पेंग्विन की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
कंपनी ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अपना पक्ष रखा। कंपनी ने कहा कि वह भारत में 'Belonging' की प्रकाशक नहीं है। साथ ही उसने उस दावे को भी गलत बताया कि लेखिका ने एडिटोरियल बदलाव स्वीकार नहीं किए, इसलिए कंपनी ने किताब प्रकाशित करने से हाथ खींच लिया।
कंपनी के मुताबिक, किसी किताब के तथ्यों की जांच करना और लेखक को किताब बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना प्रकाशक की जिम्मेदारी का हिस्सा है। Penguin ने इसे नॉर्मल पब्लिशिंग प्रोसेस बताया। कंपनी ने यह भी कहा कि संबंधित बातचीत के दौरान वह किताब प्रकाशित करने को लेकर इच्छुक थी। हालांकि, उसने लेखिका के साथ हुई गोपनीय बातचीत पर आगे टिप्पणी करने से इनकार किया।
PM मोदी, RSS और चीन वाले हिस्से पर क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पेंगुइन के स्पष्टीकरण के बाद गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रकाशक पर प्रधानमंत्री मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जे से जुड़े हिस्सों को बदलने या हटाने का दबाव था।
गहलोत ने कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक, जिन हिस्सों में बदलाव या कटौती की बात थी, उनमें चीन, मोदी और RSS से जुड़े विषय प्रमुख थे। मुझे बताया गया कि इसके पीछे सरकारी हस्तक्षेप था।" गहलोत ने खुद यह भी माना कि उन्होंने सोनिया गांधी की पांडुलिपि नहीं देखी है और न ही इस मुद्दे पर सोनिया गांधी से सीधे बात की है। उन्होंने कहा कि यह बात उन्हें पार्टी में चल रही चर्चा से पता चली है।
अशोक गहलोत ने कहा,
"पेंगुइन इंडिया' जिसकी लेखक सोनिया गांधी हैं उस पुस्तक के प्रकाशन की घोषणा हुई पूरे देश में इसका इंतजार होने लगा कि कब पुस्तक आएगी। फिर खबर आई कंपनी किताब छापने के लिए तैयार है फिर क्या कारण है कि भारत इसकी छपाई के लिए ये तैयार नहीं हैं। कोई ना कोई दबाव है। सोनिया गांधी से पूछा गया कि कुछ अंश हटाना चाहते हैं वे कैसे स्वीकार करती? इन्होंने मना कर दिया, उसमें चीन, पीएम मोदी और RSS पर कुछ होगा इसलिए इनको तकलीफ होगी। लोकतंत्र कहां है?"
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, "लेखिका सोनिया गांधी की किताब 10 नवंबर को रिलीज़ होने वाली थी, और पूरे देश में इसका इंतजार था। फिर अचानक, चौंकाने वाली खबर आई। पेंगुइन इंडिया की ग्लोबल पेरेंट कंपनी किताब पब्लिश करने के लिए तैयार थी, फिर भी उसका इंडियन ऑफिस ऐसा करने को तैयार नहीं था। जरूर कोई प्रेशर रहा
यानी यहां सबसे अहम बात यह है कि गहलोत का आरोप अभी आरोप ही है। पेंगुइन की तरफ से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है, जिसमें इन खास हिस्सों को हटाने के लिए सरकारी दबाव की पुष्टि की गई हो।
कांग्रेस ने क्यों उठाया अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा?
गहलोत ने इसे सिर्फ प्रकाशन का मामला नहीं माना। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ दिया। उनका सवाल था कि अगर किताब दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपने मूल रूप में प्रकाशित हो सकती है, तो भारत में उसके कंटेंट को लेकर अलग रुख क्यों अपनाया जा रहा है।
कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी इसी लाइन पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि किताब के प्रकाशन को लेकर दबाव बनाया गया। वहीं बीजेपी की तरफ से इसे कांग्रेस की तरफ से डर का माहौल बनाने और राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश बताया गया।
'क्या प्रकाशक तय करेगा कि सोनिया क्या लिखेंगी?'
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस पूरे विवाद पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी प्रकाशक को यह तय करना चाहिए कि सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती अपनी किताब में क्या लिखें और क्या नहीं।
कमलनाथ ने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या कोई प्रकाशक यह तय करेगा कि सोनिया गांधी क्या लिखेंगी और क्या नहीं? सवाल यह भी है कि प्रकाशक अपनी इच्छा से ऐसा कर रहा है या उस पर किसी तरह का दबाव है?" इस बयान के साथ कांग्रेस ने इस विवाद को सीधे फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और राजनीतिक दबाव के मुद्दे से जोड़ दिया है।
India Edition: भारत में किताब कौन प्रकाशित करेगा?
फिलहाल भारत में किताब के प्रिंट एडिशन के प्रकाशक और डिस्ट्रीब्यूटर को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि, ऑनलाइन लिस्टिंग से किताब के ई-बुक एडिशन को लेकर जानकारी मिलती है। अमेजन पर Belonging का ई-बुक वर्जन 2,615 रुपये में प्री-ऑर्डर के लिए सूचीबद्ध है। लिस्टिंग में इसके प्रकाशक के तौर पर William Collins का नाम दिया गया है, जो HarperCollins UK का इम्प्रिंट है।
सोनिया गांधी की किताब में क्या मिलेगा?
Alfred A Knopf के मुताबिक, किताब सोनिया गांधी की जिंदगी के निजी और राजनीतिक सफर को सामने रखेगी। इसमें युद्ध के बाद के इटली में उनका बचपन, राजीव गांधी से मुलाकात और शादी, नेहरू-गांधी परिवार में उनका जीवन और बाद में राजनीति में आने की कहानी शामिल है।
किताब में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी के सार्वजनिक जीवन में आने और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले का भी जिक्र है। फिलहाल इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में किताब के कंटेंट को लेकर वास्तव में किसी तरह का दबाव था, या मामला सिर्फ सामान्य एडिटोरियल और फैक्ट-चेकिंग प्रक्रिया का हिस्सा था? Penguin ने सरकारी दबाव की बात स्वीकार नहीं की है। दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता अपने आरोपों पर कायम हैं। अब नजर इस बात पर है कि भारत में किताब का प्रकाशन किसके जरिए होता है और उसके अंतिम संस्करण को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है।