छत्तीसगढ़ के आबकारी-कोल लेवी मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका रायपुर PMLA कोर्ट ने खारिज कर दी।
पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज
- Published: 22 Sep 2026, 08:42 PM IST
- Last Updated: 22 Sep 2026, 08:45 PM IST
रायपुर। छत्तीसगढ़ के आबकारी और कोल लेवी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को फिलहाल जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला है। रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। मामले में बचाव पक्ष और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से लंबी दलीलें पेश की गईं। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका समेत पहलुओं पर किया विचार
ED ने जमानत देने का किया विरोध
मिली जानकारी के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल की ओर से विशेष अदालत में जमानत आवेदन लगाया गया था। सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ताओं ने जमानत के पक्ष में तर्क रखे, जबकि ED ने आवेदन का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के समक्ष मामले की प्रकृति, उपलब्ध सामग्री और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका जैसे पहलुओं पर भी विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले अगस्त 2026 में भी रामगोपाल अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज होने की बात सामने आई थी।
आबकारी और कोल लेवी मामले में ED की जांच जारी
रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित छत्तीसगढ़ आबकारी घोटाले और कोल लेवी प्रकरण से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सामने आया है। ED इन मामलों में कथित अपराध से अर्जित रकम और उसके लेन-देन की जांच कर रही है। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में यह आरोप भी रखा गया है कि कथित आबकारी घोटाले से जुड़ी नकद राशि के लेन-देन में अग्रवाल की भूमिका सामने आई।
फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं अग्रवाल
रामगोपाल अग्रवाल वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। संबंधित मामलों में उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। PMLA के तहत जमानत के मामलों में कानून की विशेष शर्तें लागू होती हैं और अदालत उपलब्ध सामग्री व आरोपी की भूमिका समेत विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विचार करती है। जमानत आवेदन पर हुई सुनवाई के बाद अदालत के फैसले से फिलहाल अग्रवाल को जेल में ही रहना होगा। कथित आबकारी और कोल लेवी घोटाले से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे भी जारी है।
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