Chandpur Assembly Caste Equations पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन चुनावी पहेलियों में शामिल हैं, जहां मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा सामाजिक समूह माने जाते हैं, लेकिन जाट, दलित, सैनी, चौहान, ब्राह्मण और दूसरे पिछड़े-सवर्ण समुदायों का रुख जीत-हार तय करता है। बिजनौर जिले की विधानसभा संख्या 23 चांदपुर में SIR 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 3,03,865 मतदाता दर्ज हैं। SIR से पहले यहां 3,32,361 वोटर थे। यानी नई सूची में 28,496 मतदाता कम हुए, जो करीब 8.57 प्रतिशत की कमी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
चांदपुर की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अंदाजा 2022 विधानसभा चुनाव के परिणाम से लगाया जा सकता है। समाजवादी पार्टी के स्वामी ओमवेश को 90,522 वोट मिले, जबकि भाजपा की तत्कालीन विधायक कमलेश सैनी को 90,288 वोट मिले। जीत का अंतर सिर्फ 234 वोट था। इसके दो साल बाद 2024 लोकसभा चुनाव में चांदपुर विधानसभा खंड में समाजवादी पार्टी के दीपक सैनी ने RLD-NDA उम्मीदवार चंदन चौहान पर 10,616 वोट की बढ़त बनाई। 2027 से पहले यही दो नतीजे इस सीट को बिजनौर जिले की सबसे दिलचस्प लड़ाइयों में शामिल करते हैं।
चांदपुर विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | चांदपुर |
| विधानसभा क्रमांक | 23 |
| जिला | बिजनौर |
| लोकसभा क्षेत्र | बिजनौर |
| श्रेणी | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | स्वामी ओमवेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| 2026 कुल मतदाता | 3,03,865 |
| SIR से पहले मतदाता | 3,32,361 |
| मतदाता कमी | 28,496 |
| कमी प्रतिशत | लगभग 8.57% |
| 2022 विजेता | स्वामी ओमवेश, सपा |
| 2022 उपविजेता | कमलेश सैनी, भाजपा |
| 2022 जीत का अंतर | 234 वोट |
| 2024 लोकसभा खंड में बढ़त | सपा 10,616 वोट आगे |
| प्रमुख सामाजिक समूह | मुस्लिम, दलित, जाट, सैनी, चौहान, ब्राह्मण |
UttarPradesh.org की वर्तमान विधायक प्रोफाइल में स्वामी ओमवेश को चांदपुर विधानसभा संख्या 23 से समाजवादी पार्टी का विधायक दर्ज किया गया है। उनका जन्म 11 जुलाई 1951 को हुआ और उनकी शिक्षा स्नातकोत्तर है। वर्तमान प्रोफाइल में कृषि को उनका व्यवसाय बताया गया है।
चांदपुर में जातीय समीकरण की पहली बड़ी धुरी मुस्लिम मतदाता हैं। इसके बाद दलित, जाट, सैनी और चौहान समुदाय बड़ी राजनीतिक ताकत रखते हैं। ब्राह्मण और अन्य छोटे OBC-सवर्ण समूह करीबी मुकाबले में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2022 विधानसभा चुनाव से पहले चांदपुर में करीब 1.25 लाख मुस्लिम, 48 हजार दलित, 35 हजार जाट, 25 हजार सैनी, 25 हजार चौहान और 20 हजार ब्राह्मण मतदाता बताए गए थे। ये आंकड़े आधिकारिक जाति-वार वोटर सूची नहीं बल्कि चुनावी अनुमान हैं।
चांदपुर का पुराना प्रकाशित जातीय समीकरण
| जाति/समुदाय | 2022 के आसपास अनुमान |
| मुस्लिम | लगभग 1,25,000 |
| दलित/SC | लगभग 48,000 |
| जाट | लगभग 35,000 |
| सैनी | लगभग 25,000 |
| चौहान | लगभग 25,000 |
| ब्राह्मण | लगभग 20,000 |
| अन्य जातियां/समुदाय | करीब 40 हजार से अधिक |
2022 की दूसरी जिला-स्तरीय चुनावी रिपोर्ट में भी मुस्लिम 1.25 लाख, अनुसूचित समाज 48 हजार, जाट 35 हजार, सैनी 25 हजार और चौहान 25 हजार बताए गए थे। अलग-अलग रिपोर्टों में छोटे समुदायों की संख्या में अंतर मिलता है, इसलिए इन आंकड़ों को सटीक जनगणना नहीं माना जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग विधानसभा की मतदाता सूची जाति या धर्म के आधार पर जारी नहीं करता। इसलिए जातिगत संख्या का इस्तेमाल केवल सामाजिक ताकत समझने के लिए किया जाना चाहिए, न कि आधिकारिक वोटर डेटा के रूप में।
2026 के 3.03 लाख वोटर बेस के करीब जातीय संकेत
पुराने 2022 अनुपात को 2026 के 3,03,865 मतदाता आधार के करीब गणितीय रूप से समायोजित करें तो मौजूदा सामाजिक संरचना का एक संकेतात्मक मॉडल तैयार किया जा सकता है।
यह 2026 की नई जातिगत गणना नहीं है। इसमें यह मानकर अनुपातिक समायोजन किया गया है कि विभिन्न सामाजिक समूहों की हिस्सेदारी लगभग समान रही। SIR में अलग-अलग समुदायों के कितने नाम जुड़े या हटे, इसका कोई आधिकारिक जाति-वार डेटा उपलब्ध नहीं है।
| सामाजिक समूह | 2026 आधार पर संकेतात्मक संख्या |
| मुस्लिम | लगभग 1,18,000 |
| दलित/SC | लगभग 45,500 |
| जाट | लगभग 33,000 |
| सैनी | लगभग 23,700 |
| चौहान | लगभग 23,700 |
| ब्राह्मण | लगभग 19,000 |
| अन्य OBC, सवर्ण व अन्य समुदाय | लगभग 40,500 |
| संकेतात्मक कुल | करीब 3.04 लाख |
इस मॉडल से एक बात साफ होती है—चांदपुर में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा एकल समूह हैं, लेकिन बाकी सामाजिक समूहों का संयुक्त आकार उससे काफी बड़ा है। इसी कारण मुस्लिम वोट के साथ जाट, दलित, सैनी या चौहान मतों में से कौन सा समूह जुड़ता है, उससे परिणाम बदल जाता है।
चांदपुर वोटर लिस्ट 2026: 3,03,865 मतदाता
बिजनौर जिले की अंतिम SIR मतदाता सूची में कुल 24,85,555 वोटर दर्ज हैं। SIR से पहले जिले में 27,50,319 मतदाता थे। चांदपुर में मतदाता संख्या 3,32,361 से घटकर 3,03,865 हो गई। कुल 28,496 नाम कम हुए।
बिजनौर जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026
| विधानसभा | 2026 कुल मतदाता |
| नजीबाबाद | 3,21,113 |
| नगीना | 3,23,441 |
| बढ़ापुर | 3,33,641 |
| धामपुर | 2,77,670 |
| नहटौर | 2,87,589 |
| बिजनौर | 3,37,655 |
| चांदपुर | 3,03,865 |
| नूरपुर | 3,00,581 |
मतदाता सूची में करीब 28.5 हजार नामों का बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में चुनाव केवल 234 वोट से तय हुआ था। यानी SIR में हुए कुल बदलाव की संख्या पिछले जीत अंतर से 120 गुना से भी अधिक है। बूथवार यह बदलाव किन इलाकों और सामाजिक समूहों में हुआ, 2027 की रणनीति के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।
2012 से 2026 तक कैसे बदला चांदपुर का वोटर बेस?
चांदपुर में मतदाता संख्या पिछले डेढ़ दशक में बढ़ती रही और 2026 SIR के बाद फिर नीचे आई। चुनावी आंकड़ों के मुताबिक 2012 में यहां करीब 2.78 लाख मतदाता थे। 2017 में संख्या 3.12 लाख के पार पहुंची, 2022 में करीब 3.26 लाख और 2024 लोकसभा चुनाव में लगभग 3.30 लाख मतदाता थे। 2026 में अंतिम संख्या 3.03 लाख रह गई।
| वर्ष | मतदाता |
| 2012 | 2,78,379 |
| 2017 | 3,12,817 |
| 2022 | लगभग 3.26 लाख |
| 2024 लोकसभा | 3,30,159 |
| 2026 SIR | 3,03,865 |
इसलिए 2027 में 2022 या 2024 के बूथवार आंकड़ों को सीधे लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। राजनीतिक दलों को नई मतदाता सूची के आधार पर गांव, बूथ और सामाजिक समूहों का दोबारा विश्लेषण करना पड़ेगा।
करीब 1.25 लाख का पुराना मुस्लिम आधार क्यों सबसे बड़ा फैक्टर?
चांदपुर में मुस्लिम मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 1.25 लाख रहा है। यह सीट के किसी एक समुदाय का सबसे बड़ा आधार है।
लेकिन चांदपुर का राजनीतिक इतिहास यह भी बताता है कि इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद मुस्लिम वोट से अकेले नतीजा तय नहीं होता।
2007 और 2012 में बसपा के इकबाल ने चांदपुर सीट जीती। 2007 में उन्हें 58,808 वोट और 2012 में 54,941 वोट मिले। 2017 में भाजपा की कमलेश सैनी ने 92,345 वोट लेकर सीट जीत ली, जबकि बसपा के मोहम्मद इकबाल को 56,696 और सपा के मोहम्मद अरशद को 36,531 वोट मिले। मुस्लिम मतों के अलग-अलग उम्मीदवारों में बंटने के बीच भाजपा ने 35,649 वोट की बड़ी जीत दर्ज की।
यानी चांदपुर में मुस्लिम वोट की संख्या जितनी महत्वपूर्ण है, उसका केंद्रीकरण या विभाजन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
2022 में मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के स्वामी ओमवेश के पक्ष में जाने का चुनावी आकलन रहा और सपा सीट 234 वोट से जीत गई। हालांकि बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार शकील अहमद को भी 37,359 और AIMIM के यासिर अराफात को 1,586 वोट मिले।
2027 में विपक्ष के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि मुस्लिम मतदाता कितने एकजुट रहते हैं।
48 हजार के पुराने दलित आधार पर BSP, SP और BJP की नजर
चांदपुर में अनुसूचित जाति मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 48 हजार है। 2011 जनगणना आधारित आकलन में भी सीट पर SC हिस्सेदारी 16.88 प्रतिशत बताई गई है।
बसपा के लिए यह वोट ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। 2007 और 2012 में पार्टी ने चांदपुर सीट लगातार जीती। 2022 में भी बसपा प्रत्याशी शकील अहमद ने 37,359 वोट यानी करीब 16.65 प्रतिशत मत हासिल किए।
2022 की जीत का अंतर सिर्फ 234 था और बसपा के वोट 37 हजार से अधिक थे। इससे समझा जा सकता है कि BSP के वोट का छोटा हिस्सा भी दूसरी दिशा में जाने पर परिणाम पूरी तरह बदल सकता था।
2027 में सपा की PDA रणनीति के तहत दलित मतदाताओं में विस्तार एक प्रमुख लक्ष्य है। जुलाई 2026 में सपा SC/ST उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने और सामान्य सीटों पर भी दलित प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर काम कर रही है।
दूसरी तरफ भाजपा के लिए दलित वोट में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना और बसपा के पुराने आधार में सेंध जरूरी होगी।
जाट वोट और चांदपुर की पुरानी RLD राजनीति
चांदपुर की राजनीतिक पहचान में जाट समुदाय का प्रभाव बेहद पुराना है। सीट की चुनावी प्रोफाइल के मुताबिक यहां कई बार जाट प्रत्याशी जीतते रहे हैं और राष्ट्रीय लोकदल का भी लंबे समय तक प्रभाव रहा है। पुराने जातीय अनुमान में करीब 35 हजार जाट मतदाता बताए गए हैं।
स्वामी ओमवेश की राजनीति भी किसान और RLD की राजनीति से लंबे समय तक जुड़ी रही है।
UttarPradesh.org की राजनीतिक यात्रा के अनुसार उन्होंने 1993 में समाजवादी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति शुरू की। 1996 में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चांदपुर से चुनाव जीता। 2002 में RLD के टिकट पर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे और बाद में राज्य सरकार में लोक निर्माण तथा गन्ना विभाग में राज्यमंत्री रहे। 2022 में सपा के टिकट पर उन्होंने तीसरी विधानसभा जीत दर्ज की।
2002 में उन्होंने RLD के टिकट पर 60,595 वोट हासिल कर बसपा के राम अवतार सिंह को 10,667 वोट से हराया था।
यही किसान और जाट राजनीतिक नेटवर्क 2022 में भी उनके लिए महत्वपूर्ण माना गया।
लेकिन 2027 में इस सामाजिक समीकरण की सबसे बड़ी परीक्षा होगी, क्योंकि RLD अब भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में है।
RLD के NDA में जाने से बदल गया जाट वोट का गणित
2022 विधानसभा चुनाव में RLD समाजवादी पार्टी की सहयोगी थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा-RLD गठबंधन ने जाट और मुस्लिम वोटों को साथ लाने की रणनीति अपनाई थी।
अब तस्वीर उलट है। जुलाई 2026 तक RLD भाजपा-नीत NDA का हिस्सा है और दोनों दल 2027 विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन समन्वय तथा सीट बंटवारे की तैयारी कर रहे हैं। जुलाई की NDA बैठक में RLD सहित सहयोगी दलों ने सीटों पर अपनी संगठनात्मक ताकत और सामाजिक समीकरण के आधार पर दावेदारी की बात रखी।
चांदपुर में इसका सीधा असर जाट वोट पर पड़ेगा।
अगर RLD का परंपरागत जाट-किसान वोट 2027 में NDA उम्मीदवार के पक्ष में मजबूत रूप से ट्रांसफर होता है, तो भाजपा गठबंधन को 2022 की तुलना में नया लाभ मिल सकता है।
लेकिन 2024 लोकसभा परिणाम बताता है कि गठबंधन का गणित इतना सरल नहीं है।
2024 में चांदपुर खंड में SP ने RLD-NDA को 10,616 वोट से पछाड़ा
चांदपुर बिजनौर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2024 लोकसभा चुनाव में पूरे बिजनौर संसदीय क्षेत्र से RLD के चंदन चौहान NDA उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते।
लेकिन चांदपुर विधानसभा खंड में समाजवादी पार्टी आगे रही।
| चांदपुर विधानसभा खंड, लोकसभा 2024 | वोट |
| दीपक सैनी, SP | 88,691 |
| चंदन चौहान, RLD-NDA | 78,075 |
| सपा की बढ़त | 10,616 |
सपा ने चांदपुर विधानसभा खंड में करीब 44.01 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि RLD-NDA को करीब 38.74 प्रतिशत मिले।
यह नतीजा 2027 के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
2022 में सपा केवल 234 वोट से विधानसभा जीती थी।
2024 में उसी विधानसभा क्षेत्र में सपा की बढ़त 10 हजार से अधिक हो गई।
और खास बात यह है कि 2024 में RLD भाजपा के साथ थी।
इसका मतलब यह है कि जाट-RLD वोट का NDA में जाना भी अकेले सपा की बढ़त रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। मुस्लिम, सैनी, दलित और दूसरे OBC मतदाताओं का व्यवहार इस परिणाम में महत्वपूर्ण रहा होगा।
सैनी वोट पर 2027 में सबसे ज्यादा नजर
चांदपुर में सैनी मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 25 हजार है। 2026 के वर्तमान वोटर बेस पर पुराना अनुपात देखें तो यह करीब 23-24 हजार का संकेत देता है।
2017 में भाजपा ने कमलेश सैनी को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 35,649 वोट के बड़े अंतर से चुनाव जीता।
2022 में भाजपा ने फिर कमलेश सैनी पर भरोसा किया। उन्हें 90,288 वोट मिले और वह सिर्फ 234 वोट से चुनाव हारीं।
यानी सैनी सामाजिक पहचान भाजपा की चांदपुर रणनीति में दो लगातार चुनावों तक केंद्रीय रही।
2024 लोकसभा चुनाव में दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार दीपक सैनी था और उसने चांदपुर विधानसभा खंड में RLD-NDA पर 10,616 वोट की बढ़त बनाई।
इसलिए 2027 में सैनी वोट भाजपा और सपा दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यदि समाजवादी पार्टी 2024 की तरह सैनी और दूसरे OBC मतदाताओं में मजबूत हिस्सेदारी बनाए रखती है तो उसके लिए 2022 की सीट बचाना आसान हो सकता है। अगर भाजपा इस वोट को वापस एकजुट करती है और RLD का जाट आधार जोड़ती है तो मुकाबला फिर बेहद करीबी हो सकता है।
चौहान मतदाता भी लगभग सैनी जितने प्रभावी
चांदपुर में चौहान मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 25 हजार है।
2022 जैसे 234 वोट के मुकाबले में 20-25 हजार का कोई भी सामाजिक समूह निर्णायक होता है।
चौहान और दूसरे गैर-यादव OBC-सवर्ण मतदाता भाजपा के व्यापक सामाजिक गठबंधन का हिस्सा रहे हैं, लेकिन उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण के आधार पर इनका मतदान बदल सकता है।
2027 में भाजपा अगर जाट, सैनी और चौहान वोट का बड़ा हिस्सा एक साथ जोड़ती है तो वह मजबूत स्थिति बना सकती है। दूसरी तरफ सपा की कोशिश मुस्लिम आधार के साथ OBC और दलित मतों में हिस्सेदारी बनाए रखने की होगी।
ब्राह्मण और छोटे सामाजिक समूह क्यों जरूरी?
चांदपुर की सीट-विशेष प्रोफाइल में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 20 हजार बताई गई थी। इसके अलावा त्यागी, पाल, कश्यप, वैश्य, प्रजापति और दूसरे सामाजिक समूह भी मौजूद हैं।
अक्सर चुनावी विश्लेषण में मुस्लिम, जाट या दलित जैसे बड़े समूहों की चर्चा में इन छोटे और मध्यम समुदायों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
लेकिन चांदपुर में पिछला विधानसभा चुनाव 234 वोट से तय हुआ था।
ऐसी सीट पर पांच हजार मतदाताओं वाला समुदाय भी निर्णायक हो सकता है, 15-20 हजार वाला समूह तो बहुत बड़ी चुनावी ताकत बन जाता है।
2022 में सिर्फ 234 वोट से जीते स्वामी ओमवेश
2022 विधानसभा चुनाव चांदपुर के इतिहास के सबसे करीबी चुनावों में से एक था।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
| स्वामी ओमवेश | समाजवादी पार्टी | 90,522 | 40.34% |
| कमलेश सैनी | भाजपा | 90,288 | 40.24% |
| शकील अहमद | बसपा | 37,359 | 16.65% |
| यासिर अराफात | AIMIM | 1,586 | 0.71% |
| उदय त्यागी | कांग्रेस | 1,484 | 0.66% |
| NOTA | — | 854 | 0.38% |
स्वामी ओमवेश और कमलेश सैनी के वोट शेयर का अंतर सिर्फ 0.10 प्रतिशत रहा।
इस परिणाम में बसपा के 37 हजार से अधिक वोट सबसे महत्वपूर्ण तीसरा फैक्टर थे। BSP का वोट जीत के अंतर से करीब 160 गुना था।
2027 में बसपा की ताकत बढ़ती या घटती है तो उसका सीधा असर सपा और NDA दोनों पर पड़ सकता है।
2017 में भाजपा ने 35,649 वोट से जीती थी यही सीट
2022 से पांच साल पहले चांदपुर में बिल्कुल अलग राजनीतिक तस्वीर थी।
भाजपा की कमलेश सैनी को 92,345 वोट मिले थे। बसपा के मोहम्मद इकबाल को 56,696 और सपा के मोहम्मद अरशद को 36,531 वोट मिले। भाजपा ने 35,649 वोट से जीत दर्ज की।
| 2017 प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| कमलेश सैनी | BJP | 92,345 |
| मोहम्मद इकबाल | BSP | 56,696 |
| मोहम्मद अरशद | SP | 36,531 |
| शेरबाज खान | कांग्रेस | 15,826 |
| सुरेंद्र कुमार वर्मा | RLD | 11,880 |
| जीत का अंतर | — | 35,649 |
2017 और 2022 की तुलना चांदपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाती है।
2017 में विपक्ष कई हिस्सों में बंटा था और भाजपा बड़ी जीत हासिल कर पाई।
2022 में सपा ने मुस्लिम मतदाताओं के साथ किसान-जाट और दूसरे सामाजिक समूहों का पर्याप्त समर्थन जोड़कर भाजपा की 35 हजार की बढ़त पूरी तरह खत्म कर दी।
2007 और 2012 में लगातार दो बार जीती BSP
चांदपुर के राजनीतिक इतिहास में बसपा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
2007 में BSP के इकबाल ने 58,808 वोट हासिल कर भाजपा के राम अवतार सिंह को 30,011 वोट से हराया।
2012 में इकबाल ने फिर बसपा से चुनाव जीता। उन्हें 54,941 वोट मिले और सपा के शेरबाज खान को 39,928 वोट। जीत का अंतर 15,013 वोट रहा।
| चुनाव | विजेता | पार्टी | वोट | मुख्य प्रतिद्वंद्वी | अंतर |
| 2007 | इकबाल | BSP | 58,808 | राम अवतार सिंह, BJP | 30,011 |
| 2012 | इकबाल | BSP | 54,941 | शेरबाज खान, SP | 15,013 |
| 2017 | कमलेश सैनी | BJP | 92,345 | मोहम्मद इकबाल, BSP | 35,649 |
| 2022 | स्वामी ओमवेश | SP | 90,522 | कमलेश सैनी, BJP | 234 |
यह क्रम दिखाता है कि चांदपुर किसी एक पार्टी का स्थायी गढ़ नहीं है। पिछले चार चुनावों में बसपा, भाजपा और सपा तीनों यहां जीत चुके हैं।
स्वामी ओमवेश का राजनीतिक सफर
स्वामी ओमवेश चांदपुर और बिजनौर की राजनीति के पुराने नेताओं में शामिल हैं। UttarPradesh.org के राजनीतिक सफर के मुताबिक उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा 1993 में समाजवादी पार्टी से शुरू हुई और वह 1996 तक सपा के बिजनौर जिलाध्यक्ष रहे।
1996 में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्हें 54,124 वोट मिले और उन्होंने बसपा की सुरेखा को 13,933 वोट से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
2002 में वह राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हुए और चांदपुर से दोबारा विधायक चुने गए। उन्हें 60,595 वोट मिले और जीत का अंतर 10,667 रहा। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में वह लोक निर्माण और गन्ना विभाग में राज्यमंत्री भी रहे।
2007 में वह RLD प्रत्याशी के रूप में तीसरे स्थान पर रहे और 2012 में भी RLD से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।
2022 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लौटे और भाजपा की कमलेश सैनी को 234 वोट से हराकर तीसरी बार विधायक बने।
स्वामी ओमवेश का चुनावी सफर
| वर्ष | पार्टी | नतीजा |
| 1996 | निर्दलीय | विधायक चुने गए |
| 2002 | RLD | विधायक चुने गए |
| 2007 | RLD | चुनाव हारे |
| 2012 | RLD | चुनाव हारे |
| 2022 | SP | तीसरी बार विधायक |
उनकी किसान राजनीति और लंबे RLD संबंध के कारण चांदपुर के ग्रामीण तथा किसान वोटों में उनका पुराना नेटवर्क भी 2027 की लड़ाई में महत्वपूर्ण रहेगा।
बसपा का 37 हजार वोट 2027 में फिर बन सकता है निर्णायक
2022 में बसपा के शकील अहमद ने 37,359 वोट हासिल किए। सपा और भाजपा के बीच अंतर केवल 234 था।
इसलिए बसपा को केवल तीसरे स्थान की पार्टी मानकर चुनावी समीकरण बनाना जोखिम भरा होगा।
अगर बसपा मुस्लिम और दलित वोटों का मजबूत गठजोड़ बनाती है तो वह सपा को नुकसान पहुंचा सकती है।
अगर दलित वोट का बड़ा हिस्सा बसपा से निकलकर सपा या भाजपा की ओर जाता है तो उस दल को बड़ी बढ़त मिल सकती है।
इसी तरह मुस्लिम वोट BSP, AIMIM और सपा के बीच बंटता है तो NDA के लिए रास्ता आसान हो सकता है।
2027 में तीसरे दल का वोट शायद चांदपुर की जीत-हार का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष फैक्टर होगा।
RLD अब NDA में, लेकिन चांदपुर की सीट किसे मिलेगी?
2027 से पहले NDA में सीट बंटवारा अभी अंतिम नहीं हुआ है। जुलाई 2026 की BJP-NDA बैठक में RLD, अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों ने अपनी संगठनात्मक और सामाजिक ताकत के आधार पर सीटों पर दावा रखने की रणनीति बताई, जबकि भाजपा नेतृत्व ने फिलहाल किसी खास सीट पर सार्वजनिक दावे से बचने और संयुक्त संगठन पर फोकस करने को कहा।
चांदपुर जैसी सीट पर यह सवाल महत्वपूर्ण है।
RLD का यहां पुराना इतिहास है।
स्वामी ओमवेश खुद 2002 में RLD से विधायक रह चुके हैं।
जाट और किसान वोट में RLD का प्रभाव है।
लेकिन 2024 लोकसभा में RLD-NDA इसी विधानसभा खंड में सपा से 10 हजार से अधिक वोट पीछे रही।
इसलिए सीट भाजपा लड़े या RLD—2027 में उम्मीदवार की सामाजिक पहचान और स्थानीय स्वीकार्यता गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
सपा के लिए 2024 की बढ़त सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत
समाजवादी पार्टी 2022 में चांदपुर केवल 234 वोट से जीती थी।
इसके बावजूद 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने चांदपुर विधानसभा खंड में अपनी बढ़त बढ़ाकर 10,616 वोट कर ली।
सपा के लिए यह संकेत बताता है कि मुस्लिम आधार के साथ कुछ OBC और दूसरे समुदायों का समर्थन बनाए रखने पर सीट 2027 में भी मजबूत रह सकती है।
लेकिन 2022 की तुलना में राजनीतिक समीकरण बदल चुका है।
तब RLD सपा के साथ थी।
अब RLD NDA में है।
यानी 2027 में सपा को 2022 वाला जाट-RLD गठबंधन स्वतः नहीं मिलेगा। इसकी भरपाई उसे दलित, सैनी, दूसरे OBC और किसान वोटों में विस्तार से करनी होगी।
सपा 2027 से पहले अपने PDA फॉर्मूले को दलित और गैर-यादव पिछड़े मतदाताओं तक विस्तार देने पर खास जोर दे रही है।
खेती, गंगा खादर और गुड़ मंडी भी चुनावी मुद्दे
चांदपुर मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा है। 2011 आधारित चुनावी प्रोफाइल में करीब 79.54 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों से जुड़े बताए गए हैं।
क्षेत्र की पहचान गंगा के खादर इलाके और गुड़ की बड़ी मंडी से भी जुड़ी है। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान स्थानीय मुद्दों में रहा है।
इसलिए यहां जातिगत समीकरण के साथ—
गन्ना मूल्य,
किसानों का भुगतान,
बाढ़ और जलभराव,
ग्रामीण सड़कें,
सिंचाई,
बिजली,
रोजगार और स्थानीय व्यापार
जैसे मुद्दे भी मतदान के अंतिम फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
मुस्लिम किसान, जाट, सैनी, चौहान, दलित कृषि मजदूर और दूसरे OBC समुदाय अलग राजनीतिक पहचान रखते हैं, लेकिन कृषि अर्थव्यवस्था इन सभी को जोड़ने वाला साझा मुद्दा है।
उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण
चांदपुर के साथ प्रदेश की अन्य सीटों के सामाजिक समूह, चुनावी इतिहास और जातीय संरचना समझने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विधानसभा-वार श्रृंखला देखी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा का सामाजिक चरित्र अलग है। चांदपुर में मुस्लिम-जाट-दलित-सैनी-चौहान समीकरण जिस तरह परिणाम तय करता है, वही अनुपात पड़ोसी बिजनौर, नूरपुर या नहटौर में अलग रूप लेता है।
2027 के विधानसभा चुनाव में चांदपुर पर क्यों रहेगी नजर?
चांदपुर के 2027 चुनाव को समझने के लिए छह बड़े आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण हैं।
2007: BSP 30,011 वोट से जीती।
2012: BSP ने फिर 15,013 वोट से सीट बचाई।
2017: BJP ने 35,649 वोट की बड़ी जीत हासिल की।
2022: SP ने BJP को सिर्फ 234 वोट से हराया।
2024: लोकसभा चुनाव में चांदपुर विधानसभा खंड में SP ने RLD-NDA पर 10,616 वोट की बढ़त बनाई।
2026: SIR के बाद अब कुल मतदाता सिर्फ 3,03,865 हैं।
इन आंकड़ों के साथ एक बड़ा गठबंधन परिवर्तन भी जुड़ा है।
2022 में सपा के साथ खड़ी RLD अब NDA के साथ है।
इससे जाट और किसान वोट का पुराना समीकरण बदलेगा।
भाजपा-RLD गठबंधन के लिए जाट, सैनी, चौहान, सवर्ण, दलित और दूसरे OBC मतदाताओं को जोड़ने का अवसर रहेगा।
सपा के सामने मुस्लिम वोट को मजबूत रखते हुए दलित और OBC मतदाताओं में अपना आधार बढ़ाने की चुनौती होगी।
बसपा के पास 2022 के 37 हजार से अधिक वोटों के कारण मुकाबले को बदलने की क्षमता है।
और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 2026 की वोटर लिस्ट है। करीब 28,500 मतदाता कम होने के बाद बूथवार पुराने समीकरण भी बदल चुके होंगे।
प्रदेश में गठबंधन, संभावित उम्मीदवार और सीटवार चुनावी गतिविधियों की कवरेज के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव की विशेष श्रृंखला देखी जा सकती है। जुलाई 2026 तक NDA में अंतिम सीट बंटवारे की तस्वीर सामने नहीं आई है और राजनीतिक दल संगठन तथा सामाजिक समीकरणों के आधार पर तैयारी तेज कर रहे हैं।
Chandpur Assembly Caste Equations की सबसे बड़ी खासियत यही है कि करीब 3.04 लाख के मौजूदा मतदाता आधार में मुस्लिम सबसे बड़ा एकल सामाजिक समूह है, लेकिन दलित, जाट, सैनी, चौहान और ब्राह्मण वोट मिलकर उससे कहीं बड़ा राजनीतिक ब्लॉक बनाते हैं।
2027 में चांदपुर की लड़ाई जातियों की संख्या के साधारण जोड़ से ज्यादा वोट ट्रांसफर की परीक्षा होगी। 2017 में भाजपा की 35 हजार से अधिक की बढ़त, 2022 में सपा की सिर्फ 234 वोट की जीत और 2024 में सपा की 10,616 वोट की विधानसभा-खंड बढ़त बताती है कि यहां चुनावी गठबंधन कुछ ही वर्षों में पूरी तस्वीर बदल सकता है।
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