'इडियट, अंधभक्त...', राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में 29 जुलाई को राहुल गांधी की स्टूडेंट्स, इडियट्स, अंधभक्त वाली टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है.

Written By : कार्तिक सागर समाधिया |  Updated at : 30 Jul 2026 08:58 PM (IST)

Preferred Sources

BJP MP Anurag Thakur moves a Notice of Breach of Privilege against LoP Rahul Gandhi 'इडियट, अंधभक्त...', राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर सदन में राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार विशेषाधिकार हनन नोटिस लाए हैं.

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में 29 जुलाई को राहुल गांधी की स्टूडेंट्स, इडियट्स, अंधभक्त वाली टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है. ठाकुर ने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ अपमानजनक और मानहानि करने वाली भाषा बताया है. साथ ही नियमों 352(ii), (iii) और (vii) का उल्लंघन बताया है. हालांकि, राहुल गांधी ने जो बात सदन में कही थी, इडिएट और अंधभक्त को लेकर, उसे संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया है.

क्या कहा था राहुल गांधी ने सदन में ? 

राहुल गांधी ने 29 जुलाई को लोकसभा में चर्चा के दौरान किसी व्यक्ति का नाम न लेते हुए, बल्कि जंतर मंतर पर एक महिला छात्र से हुई बातचीत का हवाला दिया था. इसमें उन्होंने लोगों की तीन कैटेगिरी बताई थीं. इनमें एक स्टूडेंट, इडियट, और अंधभक्त बताई थीं. लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा सके समय नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ब्यौरा दिया था. 

इसमें उन्होंने बताया था कि स्टूडेंट वो होते हैं, जो खुले दिल और विचारों से सच्चाई के पीछे चलते हैं. इंडियट छात्र के मुताबिक, वह अंहकारी वय्कित जो खुद को भगवान मानता है. किसी की नहीं सुनता है. अंधभक्त वह व्यक्ति होता है, जिसे पक्का यकीन होता है कि वह इडियट ही भगवान है. 

इस बयान पर सत्ता पक्ष के मंत्रियों (संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू) आपत्ति जताई थी. इसके जवाब में राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा था कि वह सदन के अंदर किसी सदस्य या किसी का नाम लेकर यह बात नहीं कह रहे हैं. बल्कि छात्रों के कहे शब्दों को साझा कर रहे थे. 

क्या होता है विशेषाधिकार हनन 

विशेषाधिकार हनन यानी ब्रीच ऑफ प्रिवलेज तब होता है, जब संसद या विधानमंडल के किसी सदस्य या सदन के अधिकारों और विशेषाधिकारों का उल्लंघन या अपमान किया जाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 (संसद के लिए) और अनुच्छेद 194 (राज्य विधानमंडलों के लिए) के तहत सदस्यों को विशेष अधिकार मिलते हैं. 

विशेषाधिकार हनन का मुख्य कारण बाधा उत्पन्न करना होता है. जब कोई व्यक्ति या अधिकारी किसी सांसद को उसके कर्तव्य निभाने से रोकता है. गलत बयानबाजी, सदन, उसकी समितियों या सदस्यों पर झूठे और निराधार आरोप लगाता है. सदन की अवमानना करता है. सदन के आदेशों की अवहेलना करना या उसकी कार्यवाही की गलत रिपोर्ट को पब्लिश करना शामिल है. 

पीड़ित सांसद लोकसभा में अध्यक्ष या राज्यसभा में सभापति को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देता है. यदि अध्यक्ष या सभापति इसे सही मानते हैं तो मामले को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया जाता है. दोषी पाए जाने के बाद सदन व्यक्ति को चेतावनी, सदन से निलंबन या अन्य आवश्यक दंड दे सकता है. 

नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.

Read More

Published at : 30 Jul 2026 08:12 PM (IST)

Breaking News, Anytime, Anywhere - Download ABPLIVE on Android and iOS now!

और पढ़ें

Sponsored Links by Taboola