गाजियाबाद जिले की लोनी विधानसभा दिल्ली से सटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी और तेजी से बदलती शहरी सीटों में शामिल है। Loni Assembly Caste Equations को देखें तो मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा सामाजिक समूह माने जाते हैं, जबकि गुर्जर, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, पूर्वांचली, जाट, त्यागी, वैश्य, वाल्मीकि और उत्तराखंडी मतदाता चुनावी नतीजे पर निर्णायक असर डालते हैं। 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार लोनी विधानसभा में कुल 4,46,941 मतदाता हैं। इनमें 2,45,547 पुरुष, 2,01,360 महिला और 34 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति की दशा और दिशा निर्धारित करने वाला एक निर्णायक मोड़ है।
लोनी का हालिया चुनावी रिकॉर्ड भाजपा के पक्ष में है। नंदकिशोर गुर्जर ने 2017 में 42,813 वोट से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में राष्ट्रीय लोकदल के मदन भैया के खिलाफ उनकी बढ़त घटकर 8,676 वोट रह गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा लोनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से आगे रही, लेकिन अंतर केवल 21,854 वोट था। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा का आधार मजबूत होने के बावजूद मुस्लिम, दलित, प्रवासी और स्थानीय जातीय वोटों का नया तालमेल 2027 में मुकाबले को करीबी बना सकता है।
लोनी विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा क्षेत्र | लोनी |
| विधानसभा संख्या | 53 |
| जिला | गाजियाबाद |
| लोकसभा क्षेत्र | गाजियाबाद |
| आरक्षण | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | नंदकिशोर गुर्जर |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी |
| विधानसभा का गठन | 2008 के परिसीमन के बाद |
| पहला चुनाव | 2012 |
| 2022 जीत का अंतर | 8,676 वोट |
| 2026 कुल मतदाता | 4,46,941 |
| पुरुष मतदाता | 2,45,547 |
| महिला मतदाता | 2,01,360 |
| थर्ड जेंडर मतदाता | 34 |
| मतदाता सूची के भाग | 571 तक |
| प्रमुख सामाजिक समूह | मुस्लिम, गुर्जर, दलित, ब्राह्मण, पूर्वांचली, जाट और त्यागी |
| क्षेत्रीय स्वरूप | मुख्य रूप से शहरी एवं अर्ध-शहरी |
| प्रमुख मुद्दे | जलभराव, सीवर, प्रदूषण, सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार |
लोनी विधानसभा का गठन 2008 के परिसीमन के बाद किया गया था और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ। इसमें लोनी नगर क्षेत्र, ट्रॉनिका सिटी, बंथला, मंडोला, बेहटा हाजीपुर, चिरौड़ी, पावी सादकपुर, मीरपुर हिंदू, अग्रोला और आसपास के ग्रामीण-अर्धशहरी क्षेत्र शामिल हैं।
Loni Assembly Caste Equations की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बड़ी मुस्लिम आबादी के साथ कई प्रभावशाली हिंदू जातियों और प्रवासी समुदायों की मौजूदगी है। पुराने चुनावी अनुमानों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार से 1.60 लाख तक बताई गई है। गुर्जर मतदाताओं का अनुमान 35 हजार से 75 हजार, जबकि ब्राह्मण मतदाताओं का अनुमान 20 हजार से 40 हजार के बीच मिलता है।
अनुसूचित जाति के भीतर जाटव और वाल्मीकि मतदाताओं की अलग-अलग मजबूत मौजूदगी बताई जाती है। पुराने आकलनों में जाटव मतदाता करीब 60 हजार और वाल्मीकि मतदाता लगभग 20 से 23 हजार तक बताए गए थे। अन्य अनुमानों में संयुक्त अनुसूचित जाति मतदाता करीब 40 हजार बताए गए। यह अंतर बताता है कि उपलब्ध जातिवार संख्या आधिकारिक नहीं, बल्कि अलग-अलग समय के राजनीतिक अनुमान हैं।
लोनी विधानसभा का पुराना अनुमानित जातीय समीकरण
| सामाजिक समूह | अलग-अलग पुराने आकलनों में अनुमान |
|---|---|
| मुस्लिम | लगभग 90 हजार से 1.60 लाख |
| गुर्जर | लगभग 35 हजार से 75 हजार |
| जाटव/दलित | लगभग 40 हजार से 60 हजार |
| वाल्मीकि | लगभग 20 हजार से 23 हजार |
| ब्राह्मण | लगभग 20 हजार से 40 हजार |
| पूर्वांचली | एक पुराने अनुमान में करीब 40 हजार |
| जाट | करीब 17 हजार से 20 हजार |
| त्यागी | लगभग 15 हजार से 20 हजार |
| वैश्य | करीब 13 हजार से 15 हजार |
| उत्तराखंडी/गढ़वाली | करीब 18 हजार से 22 हजार |
| ठाकुर/राजपूत | एक पुराने अनुमान में करीब 10 हजार |
| यादव | एक पुराने अनुमान में करीब 7 हजार |
| प्रजापति, पाल, नाई, सुनार और अन्य OBC | स्थानीय वार्डों और कॉलोनियों में प्रभाव |
महत्वपूर्ण नोट: निर्वाचन आयोग मतदाताओं की जाति या धर्म के आधार पर विधानसभा-वार सूची प्रकाशित नहीं करता। ऊपर दी गई संख्या 2017 से 2024 के बीच सामने आए अलग-अलग स्थानीय और चुनावी आकलनों पर आधारित है। 2026 में कुल मतदाताओं की संख्या बदलने के बाद इन्हें वर्तमान आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
2026 में लोनी विधानसभा के 4,46,941 मतदाता
10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में लोनी विधानसभा के कुल 4,46,941 मतदाता दर्ज हैं। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,45,547 और महिला मतदाताओं की संख्या 2,01,360 है। थर्ड जेंडर श्रेणी में 34 मतदाता पंजीकृत हैं। साहिबाबाद के बाद लोनी गाजियाबाद जिले की दूसरी सबसे बड़ी विधानसभा सीट है।
| मतदाता वर्ग | 2026 मतदाता |
|---|---|
| पुरुष | 2,45,547 |
| महिला | 2,01,360 |
| थर्ड जेंडर | 34 |
| कुल मतदाता | 4,46,941 |
जनवरी 2026 में जारी प्रारंभिक सूची में लोनी के करीब 3,93,266 मतदाता रह गए थे। दावे, आपत्तियों और नए पंजीकरण के बाद अंतिम सूची में 53,675 मतदाता बढ़े और संख्या 4,46,941 तक पहुंच गई।
| मतदाता सूची का चरण | संख्या |
|---|---|
| जनवरी 2026 की प्रारंभिक सूची | लगभग 3,93,266 |
| अंतिम सूची में जोड़े गए मतदाता | 53,675 |
| 10 अप्रैल 2026 की अंतिम सूची | 4,46,941 |
प्री-SIR सूची से करीब 85,815 मतदाता कम
अक्टूबर 2025 की प्री-SIR सूची के मुकाबले लोनी विधानसभा में करीब 85,815 मतदाताओं की शुद्ध कमी दर्ज हुई। उस समय मतदाता आधार लगभग 5,32,756 था। अंतिम सूची में यह घटकर 4,46,941 रह गया। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 16.11 प्रतिशत की गिरावट है।
| मतदाता सूची की स्थिति | मतदाता |
|---|---|
| प्री-SIR मतदाता आधार | लगभग 5,32,756 |
| 2026 अंतिम मतदाता | 4,46,941 |
| शुद्ध कमी | लगभग 85,815 |
| कमी का प्रतिशत | करीब 16.11% |
यह बदलाव 2022 की भाजपा की 8,676 वोट वाली जीत के अंतर से लगभग दस गुना बड़ा है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से यह तय नहीं किया जा सकता कि सूची में बदलाव से किस जाति, धर्म या राजनीतिक दल पर कितना प्रभाव पड़ा। समुदाय और बूथवार आधिकारिक विवरण के बिना राजनीतिक लाभ या नुकसान का दावा तथ्यात्मक नहीं होगा।
2012 से तेजी से बढ़े मतदाता, 2026 में बदला आधार
लोनी विधानसभा में 2012 से 2024 के बीच मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। 2012 में सीट पर 3,58,553 मतदाता थे। 2017 में यह संख्या बढ़कर 4,56,713, 2019 में 4,91,073 और 2022 में 5,13,114 हो गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में लोनी के कुल मतदाता 5,23,641 थे। 2026 की अंतिम सूची में संख्या घटकर 4,46,941 रह गई।
| चुनाव अथवा वर्ष | पंजीकृत मतदाता | मतदान प्रतिशत |
|---|---|---|
| 2012 विधानसभा | 3,58,553 | 60.19% |
| 2017 विधानसभा | 4,56,713 | 60.12% |
| 2019 लोकसभा | 4,91,073 | 57.74% |
| 2022 विधानसभा | 5,13,114 | 61.44% |
| 2024 लोकसभा | 5,23,641 | लगभग 54.29% |
| 2026 अंतिम सूची | 4,46,941 | — |
2024 के मुकाबले वर्तमान मतदाता संख्या 76,700 कम है। इसलिए 2022 और 2024 के बूथवार वोटों को 2027 के नए मतदाता आधार पर सीधे लागू करना सही तस्वीर नहीं देगा।
मुस्लिम मतदाता लोनी में कितने निर्णायक?
लोनी में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ा अकेला सामाजिक समूह माने जाते हैं। अलग-अलग पुराने अनुमानों में उनकी संख्या 90 हजार से 1.60 लाख तक बताई गई है। इतनी बड़ी भिन्नता इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सटीक धर्मवार वोटर संख्या उपलब्ध नहीं है।
2012 में बसपा के जाकिर अली ने 89,603 वोट हासिल कर सीट जीती थी। उस चुनाव में मुस्लिम मतों के साथ बसपा के दलित आधार का गठजोड़ निर्णायक रहा। 2017 में जाकिर अली को 70,275, रालोद के मदन भैया को 42,539 और सपा के राशिद मलिक को 42,302 वोट मिले। विपक्ष और मुस्लिम मतों के तीन प्रमुख उम्मीदवारों में बंटने के बीच भाजपा ने 42,813 वोट की बड़ी जीत दर्ज की।
2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने मदन भैया को प्रत्याशी बनाया। उन्हें 1,18,734 वोट मिले और वह भाजपा से केवल 8,676 वोट पीछे रहे। बसपा, कांग्रेस और AIMIM ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इन तीनों दलों को कुल मिलाकर 30 हजार से अधिक वोट मिले। मुस्लिम मतों का और अधिक एकीकरण होता तो मुकाबले का परिणाम बदल सकता था। यह चुनावी नतीजों से निकलने वाला संकेत है, समुदायवार मतदान का आधिकारिक विवरण नहीं।
2027 में मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा या किसी अन्य विपक्षी उम्मीदवार के बीच किस स्तर तक बंटते हैं, यह सीट का सबसे महत्वपूर्ण चुनावी सवाल होगा।
गुर्जर वोट भाजपा और विपक्ष दोनों के लिए अहम
लोनी विधानसभा की राजनीति में गुर्जर समाज का विशेष प्रभाव है। पुराने चुनावी अनुमानों में गुर्जर मतदाताओं की संख्या 35 हजार से 75 हजार तक बताई गई है। वर्तमान विधायक नंदकिशोर गुर्जर इसी समुदाय से आते हैं और 2017 तथा 2022 में लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं।
2017 में भाजपा की बड़ी जीत में गुर्जर मतों के साथ ब्राह्मण, त्यागी, वैश्य, जाट, दलित और दूसरे गैर-मुस्लिम मतदाताओं के संयुक्त समर्थन की भूमिका दिखाई दी। 2022 में रालोद के मदन भैया भी गुर्जर समाज से थे। निर्दलीय रंजीता धामा की सामाजिक और स्थानीय मौजूदगी ने भी भाजपा के वोटों को प्रभावित किया। इसके बावजूद नंदकिशोर गुर्जर सीट बचाने में सफल रहे।
2027 में भाजपा की कोशिश गुर्जर मतों का बड़ा हिस्सा अपने साथ बनाए रखने की होगी। समाजवादी पार्टी और रालोद से बाहर के दूसरे राजनीतिक विकल्प भी स्थानीय गुर्जर नेतृत्व के माध्यम से भाजपा के आधार में सेंध लगाने का प्रयास कर सकते हैं।
2022 में निर्दलीय रंजीता धामा के 27 हजार वोटों का असर
2022 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रंजीता धामा ने 27,289 वोट हासिल किए थे। उन्हें मिले मत भाजपा की जीत के अंतर से तीन गुना से अधिक थे। यह नतीजा बताता है कि लोनी में स्थानीय नेतृत्व और राजनीतिक बगावत जातीय समीकरण जितनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है।
| चुनावी तथ्य | वोट |
|---|---|
| भाजपा की जीत का अंतर | 8,676 |
| निर्दलीय रंजीता धामा के वोट | 27,289 |
| जीत के अंतर से अधिक | 18,613 |
भाजपा के खिलाफ किसी मजबूत स्थानीय बागी की मौजूदगी 2027 में फिर चुनावी गणित बिगाड़ सकती है। इसके विपरीत पार्टी स्थानीय असंतोष को नियंत्रित रखती है तो उसका गुर्जर और हिंदू सामाजिक आधार अधिक संगठित दिखाई दे सकता है।
जाटव और वाल्मीकि मतदाता बड़ा स्विंग वोट
लोनी में अनुसूचित जाति की पुरानी जनसांख्यिकीय हिस्सेदारी करीब 13.57 प्रतिशत बताई गई है। अलग-अलग चुनावी अनुमानों में जाटव और वाल्मीकि मतदाताओं की संयुक्त संख्या 60 से 80 हजार तक बताई गई।
2012 में बसपा ने मुस्लिम-दलित गठजोड़ के जरिए सीट जीती थी। 2017 में पार्टी 70,275 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही। 2022 में बसपा के आकिल को केवल 25,717 वोट मिले। पार्टी के मतों में आई बड़ी गिरावट से भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन दोनों के लिए अवसर बना।
| चुनाव | बसपा के वोट |
|---|---|
| 2012 | 89,603 |
| 2017 | 70,275 |
| 2022 | 25,717 |
बसपा का पूरा वोट केवल दलित मतों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, क्योंकि उसके उम्मीदवार और सामाजिक गठबंधन हर चुनाव में अलग थे। फिर भी पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट से दलित वोटों के नए वितरण का संकेत मिलता है।
2027 में बसपा जाटव और वाल्मीकि समाज के बीच अपना आधार वापस बनाती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। बसपा कमजोर रहती है तो दलित वोट भाजपा और सपा के बीच सबसे बड़ा स्विंग फैक्टर बन सकता है।
ब्राह्मण मतदाता और शहरी हिंदू गठजोड़
पुराने अनुमानों में लोनी के ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 20 हजार से 40 हजार तक बताई गई है। लोनी शहर, नई कॉलोनियों और दिल्ली सीमा से जुड़े क्षेत्रों में ब्राह्मण परिवारों की अच्छी मौजूदगी मानी जाती है।
भाजपा के लिए ब्राह्मण वोट उसके व्यापक शहरी हिंदू गठजोड़ का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 2022 में आम आदमी पार्टी ने ब्राह्मण उम्मीदवार सचिन कुमार शर्मा को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें 6,324 वोट ही मिले। इससे संकेत मिलता है कि केवल जातीय पहचान भाजपा के पारंपरिक शहरी वोट को बड़े स्तर पर नहीं तोड़ सकी।
2027 में भाजपा ब्राह्मण, वैश्य, त्यागी, पंजाबी, उत्तराखंडी और गैर-यादव OBC मतदाताओं को अपने गुर्जर आधार के साथ बनाए रखना चाहेगी। विपक्ष को इस सामाजिक गठजोड़ में सीमित सेंध भी मुख्य मुकाबले को करीबी बनाने में मदद कर सकती है।
पूर्वांचली मतदाता लोनी की नई राजनीतिक ताकत
दिल्ली से सटे होने के कारण लोनी में पूर्वांचल, उत्तराखंड, मध्य उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से आए परिवारों की बड़ी आबादी रहती है। एक पुराने आकलन में पूर्वांचली मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार और उत्तराखंडी मतदाताओं की संख्या लगभग 22 हजार बताई गई थी।
इन मतदाताओं का चुनावी व्यवहार केवल जाति के आधार पर तय नहीं होता। राशन कार्ड, मकान की रजिस्ट्री, अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण, सड़क, बिजली, पेयजल, रोजगार, सार्वजनिक परिवहन और दिल्ली तक आवागमन जैसे मुद्दे इनके लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्रवासी मतदाता किसी एक दल का स्थायी वोट बैंक नहीं हैं। भाजपा राष्ट्रीय और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए इन तक पहुंच बनाए रखना चाहेगी। सपा तथा कांग्रेस नागरिक सुविधाओं, महंगाई, रोजगार और स्थानीय समस्याओं के जरिए समर्थन बढ़ाने का प्रयास कर सकती हैं।
जाट, त्यागी और वैश्य मतदाताओं की भूमिका
लोनी विधानसभा में जाट मतदाताओं की पुरानी अनुमानित संख्या करीब 17 से 20 हजार बताई गई है। राष्ट्रीय लोकदल का जाट और किसान समाज में परंपरागत प्रभाव रहा है। 2022 में रालोद सपा के साथ था, जबकि अब वह भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल है।
त्यागी मतदाताओं का अनुमान करीब 15 से 20 हजार और वैश्य मतदाताओं का अनुमान लगभग 13 से 15 हजार मिलता है। भाजपा को इन समुदायों में मजबूत समर्थन की उम्मीद रहती है। रालोद के भाजपा के साथ होने से जाट मतों का हिस्सा भी NDA के सामाजिक आधार में जुड़ सकता है।
हालांकि लोनी का जाट प्रभाव बागपत या मेरठ की ग्रामीण सीटों जैसा नहीं है। यहां शहरी समस्याएं, कॉलोनी आधारित नेटवर्क और स्थानीय उम्मीदवार जातीय पहचान के साथ मतदान को प्रभावित करते हैं।
लोनी का 80 प्रतिशत से अधिक शहरी चरित्र
पुराने निर्वाचन प्रोफाइल के अनुसार लोनी विधानसभा के करीब 80.75 प्रतिशत मतदाता शहरी और 19.25 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े थे। लोनी दिल्ली का आवासीय एवं श्रमिक विस्तार बन चुकी है। बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए प्रतिदिन दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद आते-जाते हैं।
| क्षेत्रीय स्वरूप | पुराना अनुपात |
|---|---|
| शहरी मतदाता | लगभग 80.75% |
| ग्रामीण और बाहरी क्षेत्र | लगभग 19.25% |
इस शहरी स्वरूप के कारण लोनी का चुनाव केवल किसान या जातीय राजनीति से तय नहीं होता। जलभराव, सीवर, प्रदूषण, अनधिकृत कॉलोनियां, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, अस्पताल, स्कूल और बिजली जैसे विषय अलग-अलग समुदायों को समान रूप से प्रभावित करते हैं।
2022 में भाजपा ने 8,676 वोट से बचाई लोनी सीट
2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा के नंदकिशोर गुर्जर को 1,27,410 वोट और करीब 40.4 प्रतिशत वोट शेयर मिला। रालोद के मदन भैया को 1,18,734 वोट मिले। निर्दलीय रंजीता धामा 27,289 और बसपा के आकिल 25,717 वोट लेकर तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। भाजपा ने 8,676 वोट से चुनाव जीता।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| नंदकिशोर गुर्जर | भाजपा | 1,27,410 | लगभग 40.4% |
| मदन भैया | राष्ट्रीय लोकदल | 1,18,734 | लगभग 37.7% |
| रंजीता धामा | निर्दलीय | 27,289 | लगभग 8.7% |
| आकिल | बसपा | 25,717 | लगभग 8.2% |
| सचिन कुमार शर्मा | आम आदमी पार्टी | 6,324 | लगभग 2.0% |
| मेहताब | AIMIM | 3,214 | लगभग 1.0% |
| मोहम्मद यामीन मलिक | कांग्रेस | 2,049 | लगभग 0.7% |
| अमित कुमार | हिंदुस्थान निर्माण दल | 1,946 | लगभग 0.6% |
| NOTA | — | 1,565 | लगभग 0.5% |
| जीत का अंतर | — | 8,676 | करीब 2.7% |
इस परिणाम में स्थानीय बगावत, गुर्जर वोटों का विभाजन, मुस्लिम मतों की दिशा और बसपा का प्रदर्शन सभी महत्वपूर्ण रहे। भाजपा ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की, लेकिन 2017 के मुकाबले उसकी बढ़त तेजी से घटी।
2017 में भाजपा ने 42,813 वोट से जीती थी सीट
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के नंदकिशोर गुर्जर को 1,13,088 वोट और 41.44 प्रतिशत वोट शेयर मिला था। बसपा के जाकिर अली को 70,275, रालोद के मदन भैया को 42,539 और सपा के राशिद मलिक को 42,302 वोट मिले।
भाजपा ने बसपा उम्मीदवार को 42,813 वोट से हराया था।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| नंदकिशोर गुर्जर | भाजपा | 1,13,088 | 41.44% |
| जाकिर अली | बसपा | 70,275 | 25.75% |
| मदन भैया | रालोद | 42,539 | 15.59% |
| राशिद मलिक | सपा | 42,302 | 15.50% |
| अमित कुमार | निर्दलीय | 3,808 | 1.40% |
| NOTA | — | 1,663 | 0.61% |
| जीत का अंतर | — | 42,813 | 15.69% |
2017 में बसपा, रालोद और सपा तीनों ने मजबूत उम्मीदवार उतारे थे। विपक्षी और मुस्लिम मतों का विभाजन भाजपा की बड़ी जीत का प्रमुख राजनीतिक कारण बना।
2012 में बसपा ने जीता था लोनी का पहला चुनाव
2012 में लोनी विधानसभा में पहली बार चुनाव हुआ। बसपा के जाकिर अली ने 89,603 वोट और 41.52 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। रालोद के मदन भैया को 64,355 और भाजपा के डॉ. विनोद सिंह बंसल को 48,319 वोट मिले।
बसपा ने रालोद उम्मीदवार को 25,248 वोट से हराया था।
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
|---|---|---|---|
| जाकिर अली | बसपा | 89,603 | 41.52% |
| मदन भैया | राष्ट्रीय लोकदल | 64,355 | 29.82% |
| डॉ. विनोद सिंह बंसल | भाजपा | 48,319 | 22.39% |
| औलाद अली | समाजवादी पार्टी | 6,666 | 3.09% |
| डॉ. हबीबुर रहमान खान | निर्दलीय | 1,863 | 0.86% |
| जीत का अंतर | — | 25,248 | 11.70% |
पहले चुनाव में तीसरे स्थान पर रही भाजपा ने पांच वर्ष बाद अपना वोट 48 हजार से बढ़ाकर 1.13 लाख किया और सीट जीत ली।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों का तुलनात्मक परिणाम
| चुनाव | विजेता | पार्टी | विजेता के वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2012 | जाकिर अली | बसपा | 89,603 | 25,248 |
| 2017 | नंदकिशोर गुर्जर | भाजपा | 1,13,088 | 42,813 |
| 2022 | नंदकिशोर गुर्जर | भाजपा | 1,27,410 | 8,676 |
लोनी के तीन विधानसभा चुनावों में बसपा और भाजपा को सफलता मिली है। भाजपा ने लगातार दो चुनाव जीते, लेकिन 2022 में उसकी बढ़त घटकर एक चौथाई से भी कम रह गई।
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को 21,854 वोट की बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव में लोनी विधानसभा सेगमेंट से भाजपा के अतुल गर्ग को 1,43,522 वोट मिले। कांग्रेस की डॉली शर्मा को 1,21,668 वोट प्राप्त हुए। भाजपा ने लोनी में 21,854 वोट की बढ़त बनाई।
| 2024 लोकसभा: लोनी विधानसभा सेगमेंट | वोट |
|---|---|
| भाजपा | 1,43,522 |
| कांग्रेस-INDIA गठबंधन | 1,21,668 |
| भाजपा की बढ़त | 21,854 |
लोनी में 5,23,641 पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 2,84,088 ने मतदान किया था। मतदान प्रतिशत लगभग 54.29 रहा।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को लोनी से 63,542 वोट की बढ़त मिली थी। 2024 में यह घटकर 21,854 रह गई। इससे स्पष्ट है कि भाजपा आगे रही, लेकिन विपक्ष ने अंतर करीब 41 हजार वोट कम कर दिया।
2022 और 2024 के परिणाम क्या बताते हैं?
| चुनाव | भाजपा वोट | मुख्य विपक्ष के वोट | भाजपा की बढ़त |
|---|---|---|---|
| विधानसभा 2022 | 1,27,410 | रालोद 1,18,734 | 8,676 |
| लोकसभा 2024 | 1,43,522 | कांग्रेस 1,21,668 | 21,854 |
2022 में भाजपा और रालोद अलग-अलग गठबंधनों में थे। अब रालोद भाजपा के साथ है। इससे जाट और किसान मतदाताओं का अतिरिक्त समर्थन NDA को मिल सकता है। दूसरी तरफ 2024 में कांग्रेस ने मुस्लिम, दलित और विपक्षी वोटों में बेहतर प्रदर्शन कर भाजपा की पुरानी लोकसभा बढ़त कम की।
विधानसभा चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी का प्रभाव लोकसभा चुनाव से अधिक होता है। इसलिए 2024 की बढ़त को 2027 का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
भाजपा के लिए जीत का सामाजिक रास्ता
भाजपा की ताकत गुर्जर मतदाताओं के साथ ब्राह्मण, त्यागी, वैश्य, जाट, उत्तराखंडी, पूर्वांचली, गैर-यादव OBC और दलित मतदाताओं के व्यापक गठजोड़ से बनती है।
नंदकिशोर गुर्जर की लगातार दो जीत से पार्टी को स्थानीय नेतृत्व का लाभ मिलता है। 2022 में राजनीतिक बगावत और कड़े मुकाबले के बावजूद भाजपा ने 1.27 लाख से अधिक वोट हासिल किए।
रालोद के भाजपा के साथ आने से जाट और कुछ ग्रामीण मतदाताओं में NDA की स्थिति मजबूत हो सकती है। पार्टी के सामने मुख्य चुनौती स्थानीय असंतोष, प्रत्याशी चयन और 2026 में बदली मतदाता सूची की होगी।
समाजवादी पार्टी और विपक्ष के लिए जीत का गणित
विपक्ष के लिए मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा समर्थन सबसे मजबूत शुरुआती आधार हो सकता है। इसके साथ जाटव, वाल्मीकि, पूर्वांचली, गुर्जर और दूसरे पिछड़े वर्गों का समर्थन जोड़ना जरूरी होगा।
2022 में रालोद प्रत्याशी को सपा गठबंधन का लाभ मिला था। अब रालोद भाजपा के साथ है, इसलिए सपा को अपना नया स्थानीय चेहरा तैयार करना होगा।
2024 में कांग्रेस ने लोनी से 1.21 लाख से अधिक वोट हासिल किए। सपा और कांग्रेस का गठबंधन कायम रहता है तो सीट किस दल के हिस्से में जाएगी और उम्मीदवार कौन होगा, यह चुनावी गणित का बड़ा प्रश्न बनेगा।
विपक्ष को ऐसा उम्मीदवार चाहिए जिसकी पहचान केवल मुस्लिम मतदाताओं तक सीमित न हो। गुर्जर, दलित, पूर्वांचली और दूसरे शहरी समूहों में स्वीकार्यता के बिना भाजपा को हराना कठिन हो सकता है।
बसपा की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण
बसपा ने 2012 में लोनी का पहला चुनाव जीता और 2017 में दूसरे स्थान पर रही। 2022 में पार्टी का वोट घटकर 25,717 रह गया।
सीट पर मुस्लिम और अनुसूचित जाति दोनों की बड़ी मौजूदगी बसपा को सामाजिक अवसर देती है। मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार के जरिए पार्टी विपक्षी वोट में सेंध लगा सकती है, जबकि दलित उम्मीदवार जाटव और वाल्मीकि मतदाताओं को दोबारा जोड़ सकता है।
बसपा का प्रदर्शन कमजोर रहता है तो उसका पुराना दलित और मुस्लिम वोट भाजपा तथा सपा-कांग्रेस के बीच किस दिशा में जाता है, यह मुख्य मुकाबले का अंतर तय करेगा।
जलभराव, प्रदूषण और अनधिकृत कॉलोनियां बड़े मुद्दे
लोनी में जातीय समीकरण के साथ स्थानीय नागरिक समस्याएं लंबे समय से चुनावी मुद्दा रही हैं। जलभराव, टूटी सड़कें, सीवर और नालियों की समस्या, पेयजल, बिजली, प्रदूषण, अवैध औद्योगिक इकाइयां, सार्वजनिक स्वास्थ्य और यातायात मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।
दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर यातायात और जलभराव, लोनी बॉर्डर क्षेत्र में तार जलाने और धातु ढलाई से होने वाला प्रदूषण तथा अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी प्रमुख स्थानीय शिकायतों में शामिल रही हैं।
लोनी की बड़ी आबादी दिल्ली और नोएडा में काम करती है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो विस्तार, रेलवे संपर्क और दिल्ली तक सुगम आवागमन भी जातीय पहचान से बाहर जाकर मतदान को प्रभावित कर सकते हैं।
2026 SIR ने बदल दिया बूथ और कॉलोनी का गणित
प्री-SIR मतदाता आधार के मुकाबले लोनी में करीब 85,815 मतदाताओं की शुद्ध कमी हुई है। 2022 के चुनाव की जीत केवल 8,676 वोट से हुई थी। इसलिए सूची का बदलाव सभी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
जनवरी की प्रारंभिक सूची से अंतिम प्रकाशन के बीच 53,675 मतदाता दोबारा जुड़े। इससे यह भी स्पष्ट है कि दावे, आपत्तियां और नए पंजीकरण लोनी जैसी प्रवासी आबादी वाली सीट में चुनावी गणित पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
नई मतदाता सूची से किसी दल की जीत या हार तय नहीं होती। लेकिन सभी पार्टियों को अपने समर्थक मतदाताओं के नाम, बूथ समितियों, कॉलोनी नेटवर्क और मतदाता संपर्क सूची का दोबारा सत्यापन करना होगा।
2027 में इन दस सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर रहेगी नजर
पहला सवाल मुस्लिम मतों की एकजुटता का होगा। मुस्लिम वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ जाता है या बसपा और दूसरे उम्मीदवार इसमें सेंध लगाते हैं, इससे मुख्य मुकाबला प्रभावित होगा।
दूसरा, गुर्जर वोट का रुख होगा। भाजपा और मौजूदा विधायक के लिए यह महत्वपूर्ण सामाजिक आधार है। विपक्ष की सीमित सेंध भी करीबी मुकाबले में असर डाल सकती है।
तीसरा, जाटव और वाल्मीकि मतदाता होंगे। बसपा, भाजपा और सपा तीनों अनुसूचित जाति वोट में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
चौथा, ब्राह्मण और त्यागी वोट होगा। भाजपा के लिए शहरी हिंदू गठजोड़ में दोनों समुदाय महत्वपूर्ण हैं।
पांचवां, पूर्वांचली और उत्तराखंडी मतदाता होंगे। इनका निर्णय जातीय पहचान के साथ नागरिक सुविधाओं, रोजगार और आवागमन से प्रभावित हो सकता है।
छठा, जाट वोट और रालोद का गठबंधन होगा। 2022 में विपक्ष के साथ रहा रालोद अब भाजपा के साथ है, जिससे सीट का सामाजिक समीकरण बदला है।
सातवां, बसपा का प्रदर्शन होगा। दलित और मुस्लिम आधार का कुछ हिस्सा वापस आने पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
आठवां, स्थानीय बगावत और प्रत्याशी चयन होगा। 2022 में निर्दलीय उम्मीदवार को 27 हजार से अधिक वोट मिले थे। मजबूत बागी फिर किसी दल का गणित बिगाड़ सकता है।
नौवां, जलभराव, प्रदूषण और नागरिक सुविधाएं होंगी। लोनी की शहरी समस्याएं जातीय सीमाओं से बाहर जाकर मतदाताओं को प्रभावित करती हैं।
दसवां और सबसे नया फैक्टर 2026 की 4,46,941 मतदाताओं वाली अंतिम सूची है। प्री-SIR आधार से करीब 85,815 की कमी के बाद 2022 और 2024 का पूरा बूथवार गणित दोबारा तैयार करना होगा।
2012 में बसपा की 25,248 वोट की जीत, 2017 में भाजपा की 42,813 वोट की बढ़त, 2022 में केवल 8,676 वोट का अंतर और 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की 21,854 वोट की बढ़त लोनी की बदलती राजनीति को दिखाती है। भाजपा के पास लगातार दो विधानसभा जीत, मौजूदा विधायक और रालोद गठबंधन का लाभ है। विपक्ष के पास बड़ी मुस्लिम आबादी, 2024 में घटा लोकसभा अंतर और स्थानीय नागरिक समस्याओं के जरिए चुनौती खड़ी करने का अवसर मौजूद है।
उत्तर प्रदेश की सभी सीटों के सामाजिक और राजनीतिक गणित को समझने के लिए उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा के जातिगत समीकरण की विस्तृत कवरेज पढ़ी जा सकती है।
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