भगवान कार्तिकेय को क्यों मिला छह सिर वाला रूप? जानिए षडानन बनने की पौराणिक कथा
भगवान कार्तिकेय को छह सिर (षडानन) क्यों प्राप्त हुए थे? जानिए देवताओं के सेनापति कार्तिकेय के जन्म और कृतिकाओं से जुड़ी यह पौराणिक कथा।
भगवान कार्तिकेय को क्यों मिला छह सिर वाला रूप? जानिए षडानन बनने की पौराणिक कथा (Ai Image)
- Published: 02 Aug 2026, 04:04 PM IST
- Last Updated: 02 Aug 2026, 05:44 PM IST
Lord Kartikeya six heads story: शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, जब तारकासुर नामक असुर के अत्याचारों से तीनों लोक त्राहिमाम कर रहे थे, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ रहा था। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि तारकासुर का वध केवल भगवान शिव के तेज (पुत्र) द्वारा ही संभव है। इसके बाद देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव और माता पार्वती के तेज से छह दिव्य ऊर्जा पुंज प्रकट हुए, जिन्हें अग्निदेव ने गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया।
गंगा के तट पर सरकंडों के वन में छह अत्यंत सुंदर बालकों का जन्म हुआ। ये सभी बालक भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) के विभिन्न रूप थे। देवताओं के संकट को दूर करने के लिए भगवान शिव के इन अंशों ने देवताओं के सेनापति का पदभार संभाला और राक्षसों का संहार करने के लिए आगे आए।
जब छह माताओं ने एक साथ किया स्तनपान
जब वे छह बालक सरकंडों के वन में प्रकट हुए, तो उस समय वहां छह कृतिकाएं (नक्षत्रों की देवियां—अन्वा, अरुणभ्र, संभृति, कंजला, एकयष्टि और दिती) वहां पहुंचीं। उन सभी देवियों के मन में बालकों को देखते ही वात्सल्य उमड़ पड़ा। हर एक देवी चाहती थी कि वह उस बालक को अपना दूध पिलाए।
लेकिन बालक तो एक ही शक्ति के छह अलग-अलग रूप थे, और हर देवी उस सुंदर बालक को अपनी गोद में लेकर दुलारना चाहती थी। बालक कार्तिकेय समझ गए कि यदि उन्होंने किसी एक को चुना तो बाकी माताएं निराश हो जाएंगी।
षडानन बनने की पावन घटना
अपनी इसी दिव्य लीला के तहत, बाल रूप में ही भगवान कार्तिकेय ने अपने शरीर का विस्तार किया और उनके छह सिर (मुख) प्रकट हो गए। एक साथ छह मुख हो जाने के कारण वे सभी छह माताओं (कृतिकाओं) का स्तनपान एक ही समय पर करने लगे।
बालक के इस अद्भुत और चमत्कारी रूप को देखकर सभी देवियां अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने प्रेम से उन्हें अपने आंचल में समेट लिया। चूंकि उनके छह मुख थे, इसलिए उन्हें 'षडानन' (छह मुख वाले) कहा जाने लगा और कृतिकाओं द्वारा पाले जाने के कारण उनका एक नाम 'कार्तिकेय' भी प्रसिद्ध हुआ। आगे चलकर इन्हीं छह मुखों की मदद से उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का वध कर देवताओं को उनका अधिकार दिलाया।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा स्कंद पुराण और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक सनातन धर्म की पावन कथाओं और उनके आध्यात्मिक अर्थों की जानकारी पहुंचाना है।