नई दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज)- देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और कारोबार को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक पेश किया है। प्रस्तावित संशोधनों में विदेशी निवेशकों, ग्लोबल इनवेस्टमेंट फंड, REIT और InvIT निवेशकों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण एवं डेटा सेंटर क्षेत्र को बड़ी राहत देने का प्रावधान किया गया है।

सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत यह विधेयक तीन प्रमुख आधारों—प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), ‘मेक इन इंडिया’ और कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस)—पर केंद्रित है। इसके तहत ग्लोबल इनवेस्टमेंट फंड के लिए निवेश संबंधी शर्तों को सरल बनाया जाएगा, जबकि दुरुपयोग रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रावधान बनाए रखे जाएंगे। साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए कर व्यवस्था को स्पष्ट और स्थायी स्वरूप देने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे वैश्विक फंड प्रबंधक भारत में अपने फंड स्थानांतरित कर सकेंगे।

विधेयक में REIT और InvIT निवेशकों को भी बड़ी राहत दी गई है। नई कर व्यवस्था में भी इन संस्थाओं से मिलने वाले लाभांश पर कर छूट जारी रखने का प्रस्ताव है। इससे कर व्यवस्था बदलने का निवेशकों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और छोटे निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सरकार ने डेटा सेंटर उद्योग को भी प्रोत्साहन देने की तैयारी की है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत इस क्षेत्र में परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा तथा कई सरकारी अनुमोदनों की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी, जिससे निवेश और परियोजनाओं की गति तेज होने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विदेशी कंपनियों को दी जाने वाली कर छूट की अवधि भी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत भारत में कार्यरत इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को पूंजीगत वस्तुएं, उपकरण और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को वित्त वर्ष 2031 से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2041 तक जारी रखने की योजना है।

इसके लिए आयकर अधिनियम-2025 की अनुसूची-4 में संशोधन किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, यदि विदेशी कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरणों का उपयोग भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण में किया जाता है, तो संबंधित आय पर कर छूट मिलती रहेगी। यह सुविधा उन्हीं कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मिलेगी जो कस्टम बॉन्डेड क्षेत्र में संचालित हों और विदेशी कंपनियों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, सब-असेंबली, वियरेबल्स तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण करते हों।

सरकार का मानना है कि ये संशोधन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे, विदेशी निवेश आकर्षित करेंगे और रणनीतिक क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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