सेम सेक्स में मैरिज होनी चाहिए या नहीं? जानें संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्या जवाब दिया

छात्रों से संवाद करते संघ प्रमुख मोहन भागवत.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen Z और Gen Alpha छात्रों से संवाद कर रहे हैं. इसमें उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन भी संवाद का एक तरीका है. छात्र इस तरह से भी सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं. मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z आंदोलन देश के खिलाफ नहीं है, वे इस आंदोलन को गलत नहीं मानते हैं. इस दौरान जब उनसे सवाल किया गया कि सेम शेक्स मैरिज पर क्या कहना है? संघ क्यों विरोध करता है?

इस पर उन्होंने कहा कि LGBT सोसाइटी का हिस्सा है. हमारी सोसाइटी में सिस्टम है, ट्रेडिशन है. विवाह एक इंस्टीट्यूशन है. फैमिली यूनिट ऑफ सोसाइटी है. नेक्स्ट जनरेशन कुटुंब या फैमिली इस समाज के सिटीजन हैं. सालों से ये सिस्टम चल रहा है. अगर हम एक्जिस्टिंग सिस्टम डिस्टर्ब करेंगे और नया सिस्टम नहीं होगा तो कॉन्फ्लिक्ट होगा. सोसाइटी कानून को डिक्टेट करती है. सिस्टम को रिपेयर करना होगा. मैनर को बदलना होगा. इसके तरीके अपनाने होंगे. सेम शेक्स मैरिज के लिए कानून बनाना होगा, जो सोसाइटी अपनाए और सोसाइटी आगे स्मूथ बढ़ती रहे ये देखना होगा.

मोहन भागवत ने कहा कि आंदोलन भी बातचीत का ही एक रूप है; वरना, यह सिर्फ बहस बनकर रह जाता है. उन्होंने कहा कि जब लोग बातचीत करते हैं, तो अच्छे नतीजे निकलते हैं. लोकतंत्र में, आंदोलन आम सहमति बनाने का एक जरिया होते हैं, जब लोगों की चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो आंदोलन का रास्ता अपनाना एक विकल्प बन जाता है. Gen Z की शिकायतें सही हैं. भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बहुत जरूरत है और इसके लिए बातचीत जरूरी है.

ये भी पढ़ेंः सोशल डिस्क्रिमिनेशन जब तक होगा तब तक रिजर्वेशन, जिसे मिल गया उसे दूसरे को अवसर देना चाहिए आरक्षण पर बोले भागवत

आज की पीढ़ी अपने सवालों के जवाब चाहती है: भागवत

Gen Z के बारे में मोहन भागवत ने कहा कि जब हम ‘Gen Z’ या ‘Gen Alpha’ पीढ़ी का हिस्सा थे, तो हम अपने बड़ों की बात सुनते थे. लेकिन आज की पीढ़ी अपने सवालों के जवाब चाहती है. अगर कोई रिश्ता हो, तो वे जवाब जरूर मिल जाएंगे. इस तरह का संवाद जरूरी है लोकतंत्र इसी तरह काम करता है.

RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z की शिकायतें सही हैं. भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ करने की जरूरत है. बातचीत बहुत जरूरी है. अंग्रेजी में जिसे ‘डिबेट’ कहते हैं, उसे हम ‘शास्त्रार्थ’ (बौद्धिक चर्चा) कहते हैं. बच्चों के साथ ये करना बहुत जरूरी है.

ये भी पढ़ेंः रोजगार को केवल नौकरी से जोड़कर देखना गलत, समाज को सोच बदलनी होगी: मोहन भागवत

पाकिस्तान-चीन पर क्या बोले मोहन भगवत?

मोहन भागवत ने कहा कि संकट के समय सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए. चीन भी मानता है कि दो हजार साल पहले भारत ने उन्हें संस्कार दिए थे. पाकिस्तान हमारा ही हिस्सा है, इसलिए इसका समाधान भारत के पास ही है. भारत किसी का नुकसान नहीं चाहता. टकराव के बाद बातचीत जरूरी है, क्योंकि कोई भी हमेशा के लिए दुश्मन नहीं रहता, पाकिस्तानी हमेशा के लिए दुश्मन नहीं हैं. भले ही राज्य की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हों, और टकराव के समय हम सरकार के साथ खड़े हों, फिर भी इंसानियत सबसे ऊपर है.

Gen Z देश-विरोधी नहीं

मोहन भागवत ने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि Gen Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन इसका एक सही तरीका होता है, अगर कोई बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान पढ़े, तो उसमें वह तरीका बताया गया है. हमें यह समझना होगा कि अगर Gen Z आवाज उठा रही है, तो इसलिए क्योंकि यह जरूरी है. Gen Z देश-विरोधी नहीं है,वे देश-विरोधी एजेंट नहीं हैं, वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं. हमें उनके साथ जुड़ाव बनाना होगा.

ये भी पढ़ेंः पाकिस्तान-चीन की सिविल सोसायटी से भारत को बात करनी चाहिए? जानें मोहन भागवत का जवाब

छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों हुआ पता नहीं

मोहन भागवत ने कहा कि मुझे लगता है कि यह नई पीढ़ी मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार है. हमारे पास इस बात की पूरी जानकारी नहीं है कि लाठी-चार्ज क्यों हुआ. मैं आज खबरों में पढ़ रहा था कि कुछ बाहरी लोग उस समूह में घुस आए थे, मुझे नहीं पता कि यह सच है या नहीं. लेकिन अगर मुझसे आंख बंद करके भरोसा करने को कहा जाए, तो मैं Gen Z पर भरोसा करना चुनूंगा.

ये भी पढ़ेंः RSS में महिला विंग अलग है, मुख्य संगठन में महिलाएं क्यों नहीं? जानें क्या बोले मोहन भागवत

RSS को बॉडी में महिलाओं को शामिल क्यों नहीं करना चाहिए?

इस सवाल का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS की अलग-अलग बॉडी में महिलाएं बराबरी के स्तर पर आगे बढ़ रही हैं. संघ ने महिलाओं के लिए एक अलग विभाग बनाया है. मुख्य संगठन के स्तर पर भी महिलाएं जमीनी स्तर पर काम करती हैं और उनकी राय को महत्व दिया जाता है. RSS प्रमुख ने कहा कि न सिर्फ़ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में यह आम सहमति है कि महिलाओं को आगे आना चाहिए और उन्हें बराबरी का अधिकार और दर्जा मिलना चाहिए.

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर करीब 12 साल से मीडिया में काम कर रहे हैं. करियर की शुरुआत साल 2013 में 'अमर उजाला' गाजियाबाद से की थी. यहां इन्होंने करीब एक साल तक रेलवे, कलेक्ट्रेट और आरडब्ल्यूए जैसी बीट पर काम किया. फरवरी 2014 में नवोदय टाइम्स अखबार से जुड़ गए और गाजियाबाद में ही रेलवे, स्पोर्ट्स और एजुकेशन की बीट कवर की. करीब एक साल बाद 2015 में गाजियाबाद से दिल्ली ट्रांसफर हो गया. दिल्ली में अल्पसंख्यकों के मुद्दों के साथ जंतर-मंतर पर कई बड़े धरने-प्रदर्शन कवर किए. अगस्त 2016 में दिल्ली से नोएडा ट्रांसफर हो गया. नोएडा में क्राइम बीट पर लगातार करीब तीन साल काम किया. इसके बाद 2020 में लॉकडाउन के दौरान क्राइम के अलावा गौतमबुद्ध नगर के तीनों प्राधिकरण और दूसरी बीट भी कवर करने का मौका मिला. 2024 में ‘उत्तर प्रदेश टाइम्स’ की डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. इस दौरान 'उत्तर प्रदेश टाइम्स' की नोएडा डिजिटल साइट ट्राइसिटी टुडे में भी काम किया. जनवरी 2025 में न्यूज 24 डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. यहां जुनेद अख्तर ने बतौर सब एडिटर काम किया और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर काम किया. सितम्बर 2025 से TV9 भारतवर्ष की वेबसाइट में सीनियर सब एडिटर के तौर पर जुड़े.

Read More

google button