बार-बार नाखून चबाना सिर्फ एक खराब आदत नहीं, बल्कि बढ़ते मानसिक तनाव या व्यवहार से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है. इसे मेडिकल भाषा में 'ओनिकोफेजिया' कहते हैं, जिसके लंबे समय तक रहने से दांतों और त्वचा दोनों को नुकसान पहुंचता है.

Nail Biting Health Risks : काम में दिमाग उलझा हो, मन में किसी बात की घबराहट हो या फिर खाली बैठे बोरियत महसूस हो रही हो… ऐसे में बहुत से लोगों का हाथ अपने आप मुंह तक चला जाता है और वे नाखून चबाने लगते हैं.

ज्यादातर लोग इसे बचपन की एक मामूली आदत समझकर छोड़ देते हैं. लेकिन अगर यह आदत इतनी बढ़ जाए कि उंगलियां छिलने लगें, फिर भी हाथ न रुके, तो इसे अनदेखा करना सही नहीं है.

यह सिर्फ आदत है या कोई मानसिक जुड़ाव?

मेडिकल साइंस में नाखून चबाने के इस व्यवहार को ओनिकोफेजिया (Onychophagia) कहा जाता है. जब कोई व्यक्ति किसी खास सोच या हल्के तनाव में कभी-कभार ऐसा करता है, तो इसे सामान्य माना जा सकता है.

परेशानी तब शुरू होती है जब यह कंट्रोल से बाहर होने लगे. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार नाखून चबाना ‘बॉडी-फोकस्ड रिपेटिटिव बिहेवियर’ (BFRB) का हिस्सा हो सकता है.

यह व्यवहार कुछ हद तक ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) के लक्षणों से मेल खाता है, जहां इंसान तनाव को कम करने के लिए अनजाने में एक ही क्रिया को बार-बार दोहराता है.

हालांकि, हर बार नाखून चबाने का मतलब मानसिक बीमारी नहीं होता.

शरीर को पहुंच सकते हैं ये बड़े नुकसान

लगातार नाखून काटने या चबाने से सिर्फ नाखूनों की सुंदरता ही खराब नहीं होती, बल्कि सेहत पर भी कई तरह से असर पड़ता है:

संक्रमण का खतरा: हमारे हाथों में दिनभर सैकड़ों तरह के बैक्टीरिया जमा होते हैं. नाखून चबाते समय ये मुंह के रास्ते पेट में पहुंचकर बीमारियों का कारण बनते हैं.

त्वचा में सूजन और दर्द: नाखूनों के आसपास की नाजुक त्वचा छिल जाती है, जिससे उंगलियों में लालिमा, सूजन और इंफेक्शन हो सकता है.

दांतों और मसूड़ों को नुकसान: लगातार दबाव पड़ने से दांतों का अलाइनमेंट बिगड़ सकता है और मसूड़ों में चोट लगने का खतरा रहता है.

नाखूनों का बेढंगा होना: बार-बार चबाने से नाखूनों की नेचुरल ग्रोथ प्रभावित होती है और वे कमजोर होकर टूटने लगते हैं.

इस आदत से कैसे पाएं छुटकारा?

अगर आप या आपके आसपास कोई इस आदत से परेशान है, तो कुछ व्यावहारिक कदम उठाकर इसे रोका जा सकता है:

नाखून हमेशा छोटे रखें: जब नाखून बड़े ही नहीं होंगे, तो उन्हें चबाने का मौका कम मिलेगा.

हाथों को व्यस्त रखें: जब भी बोरियत या घबराहट महसूस हो, तो हाथों में स्ट्रेस बॉल या फिजेट टॉय ले लें.

कड़वे टेस्ट का इस्तेमाल: नाखूनों पर मेडिकल स्टोर से मिलने वाली सुरक्षित कड़वी कोटिंग या कड़वा तेल लगा सकते हैं. इससे जैसे ही हाथ मुंह में जाएगा, आपका ध्यान तुरंत भटक जाएगा.

तनाव घटाने पर ध्यान दें: योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की आदत से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे अनजाने में नाखून चबाने की इच्छा घटती है.

अगर यह आदत बहुत ज्यादा बढ़ गई है और उंगलियों में जख्म बनने लगे हैं, तो किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट या काउंसलर से बात करना सही कदम रहेगा.