'मैं अतीक अहमद का बेटा हूं', मौत से ठीक पहले अबान में ऐसा क्या कहा था? चश्मदीदों ने खोला आखिरी पल का राज
Published: Friday, August 7, 2026, 10:19 [IST]
माफिया अतीक अहमद के 21 साल के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की झांसी में दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही क्रेटा कार जब अनियंत्रित होकर दीवार से टकराई तो परखच्चे उड़ गए। कार में खून से लथपथ फंसे आबान ने दम तोड़ने से महज दो मिनट पहले लोगों से मदद मांगी थी।
हादसे के बाद सामने आए चश्मदीदों, घायलों और पुलिस की शुरुआती जांच ने उन आखिरी पलों की तस्वीर सामने रखी है, जब अबान जिंदगी के लिए जूझ रहा था। सबसे भावुक बात यह रही कि कार से बाहर निकालते वक्त उसने अपनी पहचान बताते हुए लोगों से खुद को बचाने की गुहार लगाई थी। आखिर हादसा कैसे हुआ, अब तक जांच में क्या सामने आया और प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या देखा, आइए पूरी कहानी समझते हैं।
हादसे के आखिरी 5 मिनट: चश्मदीदों ने क्या देखा?
गुरुवार 6 अगस्त सुबह अबान अहमद अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ प्रयागराज से झांसी के लिए निकला था। उसका मकसद झांसी जेल में बंद बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करना था। रास्ते में झांसी से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना इलाके के खिल्ली गांव के पास उनकी क्रेटा कार हादसे का शिकार हो गई।
शुरुआती जांच में पुलिस का कहना है कि कार काफी तेज रफ्तार में थी। इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने कंक्रीट स्ट्रक्चर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह टूट गई और उसके हिस्से हाईवे पर दूर-दूर तक बिखर गए।
पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास जब हादसा हुआ, तो आसपास के लोग दहल गए। पास की दुकान में काम कर रहे चश्मदीद साकेश ने बताया कि अचानक किसी बम फटने जैसी जोरदार आवाज आई। वे लोग दौड़े तो देखा कि क्रेटा कार (UP70 FW2432) पूरी तरह पिचक चुकी थी और दरवाजे लॉक हो चुके थे।
लोहे की रॉड से कार का दरवाजा तोड़कर लोगों को बाहर निकाला गया। एक अन्य चश्मदीद दीपक यादव ने हादसे के ठीक बाद का दर्दनाक मंजर बयां किया। चश्मदीद दीपक ने बताया,
"खेत जाते वक्त देखा कि हाईवे पर अचानक एक बछड़ा आ गया था। उसे बचाने के चक्कर में कार बाईं ओर मुड़ी, तभी सामने बाइक आ गई। खुद को बचाने की कोशिश में कार सीधे कंक्रीट की दीवार से भिड़ गई। जब हम घायलों को निकालने पहुंचे, तो एक लड़के के मुंह में खून भरा था। हमने नाम पूछा तो उसने तड़पते हुए कहा- 'मेरा नाम आबान है... मुझे बचा लो।' इसके बाद वह कुछ नहीं बोल सका और दो मिनट में उसकी सांसें थम गईं।"
मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। वहीं कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाईवे पर अचानक एक बछड़ा आ गया था।
उसे बचाने के लिए ड्राइवर ने कार मोड़ी। इसी दौरान सड़क किनारे बाइक भी आ गई। दोनों को बचाने की कोशिश में कार पूरी तरह बेकाबू होकर कंक्रीट की दीवार से टकरा गई। कुछ घायल यात्रियों ने यह भी कहा कि सड़क पर पड़ी ईंट की वजह से कार का संतुलन बिगड़ा। फिलहाल पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
एक्सीडेंट की असली वजह क्या थी?
शुरुआती जांच में हादसे का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीडिंग को माना जा रहा है। हल्की बारिश के बीच 120 की स्पीड में कार हवा में 7 फीट तक उछली और कंक्रीट की दीवार से जा टकराई। टक्कर का असर इतना तेज था कि कार के पुर्जे 40 फीट दूर तक बिखर गए।
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने प्राथमिक जांच के आधार पर बताया कि ओवरस्पीडिंग ही दुर्घटना की मुख्य वजह नजर आ रही है। हालांकि हाईवे पर मवेशी के आने, ईंट पर पहिया चढ़ने या सड़क पर बिखरी चीजों से संतुलन बिगड़ने जैसे सभी एंगल से तफ्तीश की जा रही है।
कार जैद चला रहा था और बाईं तरफ आगे की सीट पर आबान और पीछे उसका दोस्त सोनू बैठा था। गाड़ी का बायां हिस्सा दीवार से सबसे ज्यादा टकराया, जिससे आबान के सिर में इंजन के कलपुर्जे धंस गए और उसके साथ-साथ सोनू की मौके पर ही मौत हो गई।
गाड़ी में कुल 5 लोग सवार थे। बाईं तरफ बैठे आबान और सोनू की मौत हुई, जबकि तीन लोग घायल हुए:
- मोहम्मद जैद (35): अतीक की बहन का दामाद (ड्राइव कर रहा था)।
- मोहम्मद उमर (18): अतीक परिवार का सगा रिश्तेदार, जिसके हटवा स्थित घर में चकिया पर बुलडोजर चलने के बाद से आबान और अहजम रह रहे थे।
- फारुक अहजम (28): अतीक के पूर्व पीए का बेटा और आबान का करीबी दोस्त।
कार में मिलीं किताबें और सिगरेट, भाई से था गहरा लगाव
यह क्रेटा कार अतीक की मौसेरी बहन के दामाद मोहम्मद जैद की है, जो गाड़ी चला रहा था। एक्सीडेंट के बाद क्षतिग्रस्त कार से सिगरेट की डिब्बी के साथ दो अंग्रेजी नॉवेल- 'द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान' और 'द इडियट' भी मिलीं।
आबान ये किताबें झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद के लिए लेकर जा रहा था। दोनों भाइयों में बेहद गहरा लगाव था। आबान ने बीते 10 महीनों में करीब 49 बार जेल जाकर अली से मुलाकात की थी। जब जेल में अली को छोटे भाई के गुजर जाने की खबर मिली तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। दूसरी तरफ लखनऊ जेल में बंद सबसे बड़े भाई उमर को प्रोटोकॉल के तहत फिलहाल इस घटना की जानकारी नहीं दी गई है।